Friday, May 07, 2021
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विकास दुबे एनकाउंटर : यूपी की योगी सरकार पेश करेगी स्टेटस रिपोर्ट

  • Updated on 7/14/2020


नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह विकास दुबे और उसके सहयोगियों की मुठभेड़ों में मौत के मामले में प्रशासन द्वारा उठाये गये कदमों के विस्तृत विवरण के साथ एक स्थिति रिपोर्ट पेश करेगी। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस ए एस बोपन्ना की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये इस मामले की सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि दुबे और उसके सहयोगियों की मुठभेड़ में मौत के साथ ही गैंगस्टर द्वारा आठ पुलिसर्किमयों की हत्या के मामले की जांच के लिये पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने पर विचार किया जा सकता है। 

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पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की जांच की निगरानी ऐसा काम है, जिसे करने के लिये न्यायालय बहुत इच्छुक नहीं है। पीठ ने कहा कि इस प्रकरण में भी वह तेलंगाना में पशुचिकित्सक से सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में चार आरोपियों की मुठभेड़ में मौत के मामले में दिये गये आदेश जैसा ही कदम उठाने पर विचार कर सकती है। तेलंगाना के मामले में न्यायालय ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित कर दिया था। 

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शीर्ष अदालत ने कहा कि इन मुठभेड़ की घटनाओं की न्यायालय की निगरानी में जांच के लिये दायर याचिकाओं पर 20 जुलाई को विचार किया जायेगा। इससे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि सरकार ने इस मामले को बहुत ही गंभीरता से लिया है और वह इस मामले में प्रशासन द्वारा उठाये गये कदमों के ब्योरे के साथ 16 जुलाई तक स्थिति रिपोर्ट पेश करेंगे। 

कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में तीन जुलाई की रात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गयी पुलिस की टुकड़ी पर घात लगाकर किये गये हमले में पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गये थे। पुलिस की इस टुकड़ी पर विकास दुबे के घर की छत से गोलियां बरसाईं गयीं थीं। विकास दुबे 10 जुलाई की सुबह कानपुर के निकट भौती इलाके में पुलिस मुठभेड़ में उस समय मारा गया जब उसने कथित तौर पर पुलिस की दुर्घनाग्रस्त गाड़ी से निकल कर भागने का प्रयास किया। उप्र पुलिस इसी गाड़ी में विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर ला रही थी। 

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इस घटना के बारे में जानकारी देते हुये कानपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बताया था कि इस दुर्घटना में चार पुलिसकर्मी भी जख्मी हुये। पुलिस का कहना था कि मुठभेड़ में घायल दुबे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। विकास दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने से पहले अलग अलग मुठभेड़ों में उसके पांच कथित सहयोगी मारे जा चुके थे। दुबे की मुठभेड़ में मौत से कुछ घंटे पहली ही याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने इस गैंगस्टर की सुरक्षा सुनिश्चित करने का उप्र सरकार और पुलिस को निर्देश देने का अनुरोध किया था। उन्होंने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और न्यायालय की निगरानी में पांच आरोपियों की मुठभेड़ में हत्या की सीबीआई से जांच कराने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया था। 

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बाद में, दिल्ली स्थित अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी और एक अन्य ने भी आठ पुलिसर्किमयों की हत्या के मामले और बाद में दस जुलाई को विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले और उत्तर प्रदेश में पुलिस-अपराधियों और नेताओं की सांठगांठ की जांच में न्यायालय की निगरानी में सीबीआई या एनआईए से इसकी जांच कराने तथा उन पर मुकदमा चलाने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, कानपुर में पुलिस की दबिश के बारे में महत्वपूर्ण सूचना विकास दुबे तक पहुंचाने में कथित संदिग्ध भूमिका की वजह से निलंबित पुलिस अधिकारी ने भी अपने संरक्षण के लिये न्यायालय में याचिका दायर की है। 

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पुलिस अधिकारी कृष्ण कुमार शर्मा ने अपनी पत्नी विनीता सिरोही के जरिये यह याचिका दायर की है। इसमें विनीता ने आशंका व्यक्त की है कि उसके पति को गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से खत्म किया जा सकता है। कानपुर के बिकरू गांव में पुलिस की दबिश के बारे में विकास दुबे तक सूचना पहुंचाने के संदेह में सब इंसपेक्टर शर्मा को तीन अन्य पुलिसर्किमयों के साथ पांच जुलाई को निलंबित कर दिया गया था। इस बीच, गैर सरकारी संगठन पीयूसीएल ने भी एक याचिका दायर कर विकास दुबे और उसके दो सहयोगियों की उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की जांच विशेष जांच दल से कराने के लिये अलग से याचिका दायर की है। 

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याचिका में कहा गया है कि इन मुठभेड़ के बारे में पुलिस के कथन से कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिनकी जांच जरूरी है। इस गैर सरकारी संगठन ने जनवरी, 2017 से मार्च 2018 के दौरान उप्र में पुलिस मुठभेड़ों की एसआईटी या सीबीआई से जांच के लिये याचिका दायर की थी। इसी मामले में पीयूसीएल ने अंतरिम आवेदन दायर किया है जिसमें इन मुठभेड़ों तथा अपराधियों एवं नेताओं के बीच साठगांठ की जांच के लिये उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक दल गठित करने का अनुरोध किया है।

 

 

 

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