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vikas dubey encounter sit issued phone numbers email ids to provide evidence

विकास दुबे एनकाउंटर : साक्ष्य मुहैया कराने के लिए SIT ने जारी किए फोन नंबर, ईमेल आईडी

  • Updated on 7/17/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कुख्यात अपराधी विकास दुबे को लेकर कानपुर प्रकरण की जांच के लिए गठित विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) ने हर खासो आम द्वारा साक्ष्य उपलब्ध कराए जाने के मकसद से शुक्रवार को फोन नंबर, पत्र व्यवहार का पता और ईमेल आईडी जारी किये। सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि जांच की कार्रवाई एसआईटी का नेतृत्व कर रहे अपर मुख्य सचिव संजय आर भूसरेड्डी के कार्यालय में संपादित की जाएगी। भूसरेड्डी का कार्यालय लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश सचिवालय बापू भवन में चौथी मंजिल पर 401 नंबर कमरे में है। 

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विज्ञप्ति के मुताबिक जांच के लिए जन सामान्य, जन प्रतिनिधि आदि की ओर से घटना से संबंधित अभिलेख, साक्ष्य एवं कथन उपलब्ध कराने के लिए पत्र व्यवहार का पता, फोन नंबर एवं ईमेल आईडी जारी की गयी है। विज्ञप्ति में कहा गया कि व्यक्तिगत रूप से मिलकर साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए 20 जुलाई, 2020 से 24 जुलाई, 2020 तक उक्त कार्यालय में दोपहर 12 बजे से दो बजे के बीच संपर्क किया जा सकता है। 

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उल्लेखनीय है कि कानपुर प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी बनायी गयी है, जिसके अध्यक्ष भूसरेड्डी हैं। इसमें अपर पुलिस महानिदेशक हरिराम शर्मा और पुलिस उप महानिरीक्षक जे रविन्दर गौड सदस्य हैं। एसआईटी अपनी जांच पूरी कर 31 जुलाई, 2020 तक रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करायेगी । इस घटना के सम्बन्ध में नौ बिन्दुओं पर जांच की जायेगी।

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एसआईटी पता लगाएगी कि पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में आये कारणों जैसे आरोपी विकास दुबे के विरूद्ध जितने भी अभियोग प्रचलित है उन पर अब तक क्या प्रभावी कार्यवाही की गयी? इसके तथा इसके साथियों को सजा दिलाने हेतु कृत कार्यवाही क्या पर्याप्त थी़? इतने विस्तृत आपराधिक इतिहास वाले अपराधी की जमानत निरस्तीकरण की दिशा में क्या कार्यवाही की गयी? वह यह भी पता करेगी कि आरोपी विकास दुबे के विरूद्ध कितनी जन-शिकायतें आयीं और उन पर थानाध्यक्ष चौबेपुर द्वारा तथा जिले के अन्य अधिकारियों द्वारा क्या जाँच की गयी व पाये गये तथ्यों के आधार पर क्या कार्यवाही की गयी। 

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एसआईटी मालूम करेगी कि विकास तथा उसके साथियों के विरूद्ध गैंगेस्टर एक्ट, गुण्डा एक्ट, एनएसए आदि अधिनियमों के अन्तर्गत क्या कार्यवाही की गयी तथा यदि कार्यवाही किये जाने में लापरवाही रही तो किस स्तर पर लापरवाही रही? साथ ही विकास एवं उसके साथियों के पिछले एक वर्ष के काल डिटेल का परीक्षण करना एवं उसके सम्पर्क में आये सभी पुलिस र्किमयों के विरुद्ध संलिप्तता की साक्ष्य मिलने की दशा में उपयुक्त एवं कड़ी कार्यवाही करनें की अनुशंसा करना एसआईटी के जांच के दायरे में है। 

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विकास दुबे एवं उसके साथियों के पास शस्त्र लाइसेंस एवं शस्त्र होना ज्ञात हुआ है। एसआईटी देखेगी यकि इतने अधिक अपराधों में संलिप्त रहने के बाद भी इनका हथियार का लाइसेंस किसके द्वारा एवं कैसे दिया गया और लगातार अपराध करनें के बाद भी यह लाइसेंस और हथियार उसके पास कैसे बना रहा? एसआईटी विकास दुबे एवं उसके साथियों के द्वारा अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति, व्यापारों एवं आर्थिक गतिविधियों का परीक्षण करते हुए उनके संबंध में युक्तियुक्त सिफारिशें करेगी। यह भी पता लगाएगी कि स्थानीय पुलिस ने इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई, लापरवाही या संलिप्तता तो प्रर्दिशत नहीं की एवं यदि ऐसा हुआ है, तो किस स्तर के अधिकारी दोषी है? 

टीम यह भी मालूम करेगी कि आरोपी विकास दुबे एवं उसके साथियों के द्वारा क्या सरकारी तथा गैरसरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया गया है? यदि हां तो इसमें क्या अधिकारियों की भी भूमिका है तथा वह अधिकारी कौन कौन है। टीम के सदस्यों ने बिकरू गांव का दौरा कर वहां के हालात का जायजा लिया है और स्थानीय लोगों से विस्तार से बातचीत की है। बिकरू गांव में ही विकास के यहां दबिश डालने गयी पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया था, जिसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गये थे। विकास मध्य प्रदेश के उज्जैन से कानपुर लाये जाते समय रास्ते में कथित पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। जिस वाहन से उसे लाया जा रहा था, वह अनियंत्रित होकर पलट गया था और इस दौरान विकास ने भागने की कोशिश की और पुलिस ने उसे मार गिराया। 

 

 

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