Tuesday, Dec 07, 2021
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vikram tyagi kidnapping case did not change on 3 captains, 3 kotwals and 3 sp city

बदले 3 कप्तान, 3 कोतवाल और 3 एसपी सिटी पर नहीं बदली विक्रम त्यागी अपहरणकांड की तफ्तीश

  • Updated on 9/22/2021

नई दिल्ली/संजीव शर्मा। बिल्डर विक्रम त्यागी अपहरणकांड जिले की एक ऐसी सनसनीखेज घटना है जो 15 महीने बाद भी पुलिस के लिए अनसुलझी पहेली बनी हुई है। इस घटना में बदमाशों ने विक्रम त्यागी का उन्हीं की गाड़ी में अपहरण किया, खून बहाया और लूटपाट की, लेकिन उत्तर प्रदेश की पुलिस बदमाशों को पकडऩा तो दूर बल्कि उनका सुराग तक भी नहीं तलाश पाई। जबकि इन 15 महीनों में जिले के तीन पुलिस कप्तान, सिहानी गेट थाने के तीन कोतवाल और जिले के तीन एसपी सिटी भी बदले पर कोई भी अधिकारी इस अपहरणकांड की तफ्तीश को खुलासे में तब्दील नहीं कर सका।

अब पीडि़त परिवार का पुलिस से भरोसा उठ चुका है। उन्हें पुलिस की कार्यशैली में ही खामियां नजर आ रही हैं। बेबस परिवार बस एक ही सवाल पूछ रहा है कि आखिर विक्रम को आसमान खा गया या फिर जमीन निगल गई? पीडि़त परिवार के इस सवाल का न तो यूपी पुलिस के पास कोई जवाब है और न ही बड़े बड़े मामलों को खोलने का दावा करने वाली एसटीएफ टीम के पास कुछ कहने भर को बचा है। पीडि़त परिवार पुलिस से नाउम्मीद हो चुका है तो पुलिस भी जहां भर की खाक छानने के बाद इस केस की फाइल को लगभग बंद कर अपने दूसरे कामों में व्यस्त हो चली है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या विक्रम त्यागी अपहरणकांड कभी खुल पाएगा या फिर पुलिस की जांच फाइल के पन्नों में ही दफन होकर रह जाएगी?


फेल होते गए अधिकारी, इंस्पेक्टर और विवेचक 
इस सनसनीखेज घटना के दौरान कलानिधि नैथानी जिले के पुलिस कप्तान थे। उनके बाद डीआईजी/एसएसपी अमित पाठक और फिर एसएसपी पवन कुमार ने जिले की कमान संभाली। वहीं, मनीष कुमार मिश्र के कार्यकाल में हुई घटना के बाद एसपी सिटी के पद पर अभिषेक वर्मा और निपुण अग्रवाल आए, लेकिन कोई भी अधिकारी उक्त घटना को खोलने में कामयाब नहीं हो सका। साथ ही इंस्पेक्टर दिलीप बिष्ट के कार्यकाल के बाद सिहानी गेट थाने में इंस्पेक्टर कृष्ण गोपाल शर्मा और इंस्पेक्टर मिथिलेश उपाध्याय भी आकर चले गए, लेकिन कोई भी इंस्पेक्टर खुलासे के नजदीक पहुंचने में कामयाब नहीं हो सका।

इसके अलावा घटना के खुलासे में लगाए गए जिले की स्वाट, सर्विलांस और डीसीआरवी टीम के तेजतर्रार प्रभारी भी पूरी तरह से नाकाम साबित हुए। कई विवेचक और सह विवेचक बदले गए पर कोई काम नहीं बना। 15 महीनों की जांच पड़ताल पर गौर करें तो पता चलता है कि तमाम अधिकारी, इंस्पेक्टर, विवेचक और सह विवेचक इस मामले में जुटे लेकिन सभी फेल होकर यहां से चलते बने।  नोएडा एसटीएफ भी इस मामले में पहले ही हथियार डाल चुकी है। अब इस घटना के खुलासे का जिम्मा वर्तमान एसएसपी पवन कुमार और एसपी सिटी निपुण अग्रवाल के कंधों पर है। वैसे इन दोनों अधिकारियों के लिए भी सफलता की डगर काफी मुश्किल जान पड़ती है। 


खुलासे का किया हर प्रयास, लेकिन निशाने पर नहीं लगा तीर
ऐसा कहना भी न्यायोचित नहीं होगा कि पुलिस ने इस मामले में कोई प्रयास नहीं किया, लेकिन बदकिस्मती से पुलिस का कोई तीर निशाने पर नहीं बैठ सका। विक्रम की गाड़ी से मिले खून का पुलिस ने डीएनए टेस्ट कराया, जो उसके माता-पिता से मेल खा गया। अंदेशा जताया गया कि बदमाशों ने विक्रम की हत्या कर लाश को कहीं ठिकाने लगा दिया। इसके लिए पुलिस ने मेरठ जोन के सभी जिलों में मिली लावारिस लाशों का डाटा खंगाला। बुलंदशहर और हरिद्वार में मिली दो लावारिस लाशों से पुलिस को उम्मीद की किरण जगी, लेकिन उनका बिसरा विक्रम के माता-पिता के डीएनए से मेल नहीं खाया। जिसके बाद पुलिस एक बार फिर नाउम्मीद हो गई।

विक्रम का सुराग तलाशने के लिए पुलिस ने मेरठ जोन में मिले लावारिस शवों के फिंगर प्रिंट मैच कराए, लेकिन किसी का भी फिंगर प्रिंट मैच नहीं हो सका। घटना करने वाले बदमाशों का क्लू तलाशने के लिए पुलिस ने जेल के भीतर और जमानत पर छूटे 500 से अधिक बदमाशों से पूछताछ की, लेकिन कोई कामयाबी हाथ नहीं लग सकी। पुलिस विभाग के दो तेज तर्रार दरोगा पारस मलिक और प्रजंत त्यागी महीनों तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डेरा डालकर बदमाशों का पता लगाने में जुटे रहे, हजारों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन उन्हें भी कोई कामयाबी हाथ नहीं लग सकी।

पुलिस का दावा है कि विक्रम त्यागी अपहरणकांड को अंजाम देने वाले बदमाशों को पकडऩे के चक्कर में सैकड़ों बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन किसी ने भी उक्त घटना में शामिल होने की बात कबूल नहीं की। माना जा रहा है कि तमाम प्रयासों के बावजूद पुलिस का तीर निशाने पर नहीं बैठ सका। अगर ऐसा हुआ होता तो उक्त सनसनीखेज घटना को अंजाम देने वाले बदमाश सलाखों के पीछे होते। 


राजनगर एक्सटेंशन में हुई थी विक्रम संग वारदात 
26 जून 2020 को पटेलनगर स्थित दफ्तर से राजनगर एक्सटेंशन स्थित घर लौटते वक्त बदमाशों ने बिल्डर विक्रम त्यागी को उन्हीं की कार में अगवा कर लिया था। अगले दिन विक्रम की खून से सनी गाड़ी मुजफ्फरनगर के तितावी थानाक्षेत्र में लावारिस हालत में खड़ी मिली थी। पुलिस ने विक्रम की गाड़ी तो बरामद कर ली, लेकिन आज तक न तो विक्रम और न ही उन्हें अगवा करने वाले बदमाशों का पुलिस कोई क्लू तलाशने में कामयाब हो सकी। 


वर्जन
विक्रम त्यागी के चाचा संजय त्यागी का कहना है कि अब उनका पुलिस से भरोसा उठ चुका है। घटना के न खुलने में उन्हें दिल्ली और यूपी पुलिस की खामी नजर आती है। संजय त्यागी का मानना है कि शुरुआती जांच के दौरान पुलिस से हुई खामियों के चलते यह घटना आज तक नहीं खुल सकी। 

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