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what is the main difference between lock down and curfew

कुछ जिलों में कर्फ्यू तो बहुत सारे जिले लॉक डाऊन, आखिर क्या है दोनों में फर्क

  • Updated on 3/24/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। यूपी को अगले दो दिनों के लिए पूरी तरह लॉक डाऊन (curfew) कर दिया गया है। एमपी के दो जिलों में कर्फ्यू है और 43 लॉक डाऊन, पूरे पंजाब में सिर्फ कर्फ्यू, राजस्थान लॉक डाऊन...। कई दिनों से आप इन्हीं शब्दों को सुन रहे होंगे। ज्यादातर लोगों ने कर्फ्यू को पहले भी देखा भी होगा और घर में बंद भी रहे होंगे। मगर लॉक डाऊन (lockdown) देश में अंदरूनी इलाकों या स्थानीय स्तर पर पहली बार लगाया जा रहा है।

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80 के दशक में श्री लंका भी कर चुका है पूरे देश को लॉक डाऊन
इससे पहले लॉक डाऊन का नाम कानून के जानकारों ने भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तब सुना था जब श्री लंका ने लिट्टे के आतंक के दौर में भारत के खिलाफ पूरे श्री लंका को लॉक डाऊन कर लिया था। यानी भारत से कोई भी व्यक्ति श्री लंका नहीं जा सकता था। लॉक डाऊन को अंतर्राष्ट्रीय कानून ही माना जाता रहा है। लिहाजा स्थानीय स्तर पर इसका उल्लंघन करने पर किसी कानूनी धारा का जिक्र भी नहीं है। ऐसे में  लॉक डाऊन के उल्लंघन के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती।

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दूसके कानूनों के तहत की जाएगी कार्रवाई
लॉक डाऊन कोई कानून नहीं है जिसके खिलाफ कोई अपराधिक मामला दर्ज किया जा सके। दूसरे शब्दों में लॉक डाऊन कोई पनिशिबल एक्ट नहीं  है। जो लोग लॉक डाऊन में भी घर से बाहर निकल रहे हैं उनके खिलाफ संक्रामक बीमारी फैलाने की धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है। अलबत्ता ज्यादातर कानून के जानकारों ने भी घरेलू इलाकों या जिला स्तर पर लॉक डाऊन का नाम नहीं सुना है। इसके अलावा जो लोग फिर भी दुकान खोल रहे हैं उनके खिलाफ भी पांच हजार रुपए तक का अर्थदंड किया जा सकता है। 

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गाड़ी लेकर निकले तो होगी मोटर व्हीकल एक्ट में कार्रवाई
यदि आप किसी वाहन पर बाहर निकले हुए हैं तो आपके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट में कार्रवाई हो सकती है।मूलत: ये अंतर्राष्ट्रीय कानून है जिसका पहली बार स्थानीय या जिला स्तर पर प्रयोग किया जा रहा है। प्रशासन ने क्या करें और क्या ना करें की नियमावली बना दी है जिसका उल्लंघन पर किसी और कानून के तहत या बल प्रयोग करके कार्रवाई की जा रही है। मगर इसका पालन करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। स्वेच्छा से लोगों को घर में रहने की सलाह दी जाती है। इसके तहत मास्क पहने बिना ड्राइविंग करने, दुपहिया वाहन पर एक और गाड़ी में दो से ज्यादा लोगों के बैठने की मनाही है।

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ज्यादा सख्त कार्रवाई की जरुरत होगी तो लगाया जाएगा कर्फ्यू
दूसरी ओर जब लोग लॉक डाऊन के बाद भी बार-बार इसका उल्लंघन करने पर उतारू हो जाएं तो इलाके में कर्फ्यू यानी धारा 144 लगाई जा रही है। कर्फ्यू में शासन सुरक्षा करने वाले अधिकारियों के हाथ में होता है। मौके की नजाकत के हिसाब से कोई भी एक्शन ले सकता है। इसे किसी सीमा में नहीं रखा जा सकता। इसमें प्रशासन अर्थदंड लगा सकता है, बल प्रयोग कर सकता है। जरुरत पढ़ने पर लोगों को जेल में भी डाला जा सकता है। इसीलिए जब लोग लॉक डाऊन का बार-बार उल्लंघन करते हैं या इसे मानने से इंकार कर देते हैं तो कर्फ्यू लगा दिया जाता है।

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