Tuesday, Jul 05, 2022
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कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद सिद्धू ने कहा - कानून का सम्मान करूंगा

  • Updated on 5/19/2022


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय द्वारा 1988 के ‘रोड रेज’ मामले में एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह‘‘कानून का सम्मान करेंगे।‘‘जब न्यायालय का फैसला आया तो सिद्धू उस समय महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए पटियाला में थे। उन्होंने एक ट््वीट में कहा, Þकानून का सम्मान करूंगा...।' जज ए एम खानविलकर और जज एस के कौल की पीठ ने सिद्धू को दी गई सजा के मुद्दे पर मृतक के परिवार द्वारा दायर पुर्निवचार याचिका को स्वीकार कर लिया।  

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    हालांकि शीर्ष अदालत ने मई 2018 में सिद्धू को मामले में 'जानबूझकर चोट पहुंचाने' के अपराध का दोषी ठहराया था, लेकिन इसने उन्हें 1,000 रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया था। वर्ष 1988 में सड़क पर हुई हाथापाई की घटना के बाद 65 वर्षीय गुरनाम सिंह को अस्पताल ले जाया गया था जहां उनकी मौत हो गई थी।  पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘...हमें लगता है कि रिकॉर्ड में एक त्रुटि स्पष्ट है.... इसलिए, हमने सजा के मुद्दे पर पुर्निवचार आवेदन को स्वीकार किया है। लगाए गए जुर्माने के अलावा, हम एक साल के कारावास की सजा देना उचित समझते हैं।’’  फैसले के बारे में संवाददाताओं के प्रतिक्रिया मांगने पर सिद्धू ने कहा, ‘‘कोई टिप्पणी नहीं।’’   सिद्धू पटियाला में कांग्रेस नेता लाल सिंह के आवास पर थे। बाद में वह पटियाला स्थित अपने आवास चले गए। मृतक गुरनाम सिंह के परिवार ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद ईश्वर का शुक्रिया अदा किया।   

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  गुरनाम सिंह की बहू परवीन कौर ने कहा, 'हम बाबा जी (सर्वशक्तिमान) को धन्यवाद देते हैं। हमने इसे बाबा जी पर छोड़ दिया था। बाबा जी ने जो कुछ भी किया है वह सही है।' कौर ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘हम फैसले से संतुष्ट हैं।’’      परिवार पटियाला शहर से पांच किलोमीटर दूर घलोरी गांव में रहता है।  गुरनाम सिंह के पोते सब्बी सिंह ने भी भगवान का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम ईश्वर का धन्यवाद व्यक्त करते हैं।’’ सिद्धू को मामले में सिर्फ एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा दिए जाने के आदेश के खिलाफ मृतक के परिवार ने याचिका दायर की थी जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया और कांग्रेस नेता को एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।   

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  इससे पहले दिन में, सिद्धू ने आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराने के लिए पटियाला में हाथी की सवारी की।उन्होंने पत्रकारों से कहा कि महंगाई बढऩे से गरीबों, किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर असर पड़ा है।सिद्धू ने एक अन्य ट््वीट में कहा, Þमहंगाई के खिलाफ प्रदर्शन। महंगाई से किसानों, मजदूरों, मध्यम वर्ग के परिवारों के बजट पर असर पड़ा है। भोजन, आवास, परिवहन और स्वास्थ्य देखभाल की लागत में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है...।

कारावास की सजा के बावजूद चुनाव लड़ सकते हैं सिद्धू : विधि विशेषज्ञ 
भारत के चुनावी कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए एक कानूनी विशेषज्ञ ने बृहस्पतिवार को कहा कि 1988 के रोडरेज के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा एक साल के कारावास की सजा सुनाए जाने के बावजूद कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू भविष्य में चुनाव लड़ सकेंगे।  जनप्रतिनिधित्व कानून-1951 की धारा 8 का हवाला देते हुए लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी.टी. आचारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘अगर दो साल या उससे ज्यादा कारावास की सजा होती, तो वह अगले छह साल तक चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य हो जाते।’’ गौरतलब है कि पूर्व क्रिकेटर ने हाल ही में पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे।     जज ए. एम.खानविलकर और जज एस. के.कौल की पीठ ने सिद्धू को सुनाई गई सजा के मुद्दे पर पीड़ित परिवार की समीक्षा याचिका मंजूर की। 

 

 

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