Wednesday, Jun 26, 2019

World Day against Child Labour : भारत में आज भी हैं करोड़ों बाल मजदूर, पढ़िए खास खबर

  • Updated on 6/12/2019

नई दिल्ली/ रवि सैन। प्रत्येक साल 12 जून को बाल श्रम को समाप्त करने के लिए श्रमिक संगठन, स्वयंसेवी संगठन और सरकारें विश्व बालश्रम विरोध दिवस (World Day against Child Labour) मनाती हैं। इस दिन कई उत्सव-आयोजन होते हैं। सभी सरकारें बाल श्रम को समाप्त करने के लिए बड़े-बड़े वादे करती नजर आती है। हालांकि इसके बावजूद बाल श्रम रुक नहीं पा रहा है। आपको बता दें आज भी दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट के अनुसार करीब 15.2 करोड़ बच्चे बाल मजदूरी करने को मजबूर हैं। इनमें से अधिकतर बदतर हालात में काम कर रहे हैं। वहीं भारत में जनगणना 2011 की रिपोर्ट बताती है कि देश में एक करोड़ से ज्यादा बाल मजदूर हैं।

Related image

बाल मजदूरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने और 14 साल से कम उम्र के बच्‍चों को इस काम से निकालकर उन्‍हें शिक्षा दिलाने के उद्देश्‍य से इस दिवस की शुरुआत साल 2002 में 'द इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन' की ओर से की गई थी। 

विश्व बालश्रम निषेध दिवस पूरे विश्व में बाल मजदूरी के विरोध में मनाया जाता है। भारत (India) के बारे में कहा जाए तो यहां बाल मजदूरी बहुत बड़ी समस्या है। भारत में बाल मजदूरी की समस्या कई सदियों से चली आ रही है। जो दिन बच्चों के पढ़ने, खेलने और कूदने के होते हैं उन दिनो में उन्हें बाल मजदूर बनना पड़ता है। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कहने को सरकारें बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं करती हैं परन्तु आज तक इस पर काबू नहीं पाया जा सका है।

Related image

भारत में फिलहाल बाल मजदूरी को लेकर व्यापक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि साल 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 5 से 14 साल के 25.96 करोड़ बच्‍चों में से 1.01 करोड़ बाल श्रम के काम में लगे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2001 में बाल श्रम में गिरावट की दर पांच फीसद थी जो 2011 में 3.9% दर्ज की गई थी। 
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 15.2 करोड़ बच्चे बाल श्रम के लिए मजबूर हैं। इनमें से अधिकांश बच्‍चे बदतर हालात में काम कर रहे हैं।

हर साल हजारों बच्चे दुर्व्यापार (ट्रैफिकिंग) करके एक राज्य से दूसरे राज्यों में ले जाए जाते हैं। सीमापार ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी गरीब देशों नेपाल और बांग्लादेश से भी भारत में ऐसे बच्चे हजारों की संख्या में लाए जा रहे हैं। जबरन बाल मजदूरी, गुलामी और बाल वेश्यावृत्ति आदि के लिए इन बच्चों को खरीदा और बेचा जाता है।

Related image

इसको समाप्त करने के लिए सरकारों और समाज को मिलकर काम करना होगा। साथ ही बाल मजदूरी पर पूर्णतया रोक लगनी चाहिए। बच्चों के विकास और उनके अधिकारों के लिए अनेक योजनाओं को प्रारंभ किया जाना चाहिए। जिससे बच्चों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव दिख सके और सभी को समान अधिकार प्राप्त हो सके। साथ ही शिक्षा का अधिकार भी सभी बच्चों के लिए अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। गरीबी दूर करने वाले सभी व्यवहारिक उपाय उपयोग में लाए जाने चाहिए। बालश्रम की समस्या का समाधान तभी होगा जब हर बच्चे के पास उसका अधिकार पहुंच जाएगा। इसके लिए जो बच्चे अपने अधिकारों से वंचित हैं, उनके अधिकार उनको दिलाने के लिए समाज और देश को सामूहिक प्रयास करने होंगे।

Related image

आज देश के प्रत्येक नागरिक को बाल मजदूरी का उन्मूलन करने की जरुरत है। और देश के किसी भी हिस्से में कोई भी बच्चा बाल श्रमिक दिखे, तो देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह बाल मजदूरी का विरोध करे और इस दिशा में उचित कार्यवाही करें साथ ही साथ उनके अधिकार दिलाने के प्रयास करें। क्योंकि बच्चे ही भारत के भविष्य हैं। क्योंकि जब तक बच्चों को उनके अधिकारों और शिक्षा से वंचित रखा जाएगा तब तक देश के उज्जवल भविष्य की कल्पना करना निरर्थक है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.