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wrong path is easy but how will you protect your children from walking on it prsgnt

गलत राह आसान है लेकिन उसपर चलने से कैसे बचायेंगे अपने बच्चों को आप? पढ़ें यहां...

  • Updated on 5/8/2020

नई दिल्ली/प्रियंका। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बॉयज लॉकर रूम और गर्ल्स लॉकर रूम को लेकर बहस छिड़ी हुई है। पहले बॉयज लॉकर रूम को लेकर लड़कों की आलोचनाएं हुई तो उसके बदले में गर्ल्स लॉकर रूम की हकीकत भी खुली।

ये दोनों चैट्स ग्रुप्स है जहां फोटो शेयर किए जाते हैं, इसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर बनाया गया था। मई की शुरुआत में इन ग्रुप्स के स्क्रीनशोर्ट सामने आए जिसके बाद से इस बारे में कई परतें खुलती गईं।

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चैट ग्रुप्स है तो क्या प्रॉब्लम?
दरअसल, अगर ये सिर्फ चैट्स ग्रुप्स होते तो कोई बात नहीं थी लेकिन इन ग्रुप्स में अश्लील और रेप जैसी घटनाओं को अंजाम देने की बात हो रही थी। लड़के लड़कियों के बॉडी पार्ट्स को लेकर अश्लील कमेंट कर रहे थे और लड़कियों के साथ गैंगरेप करने जैसी योजना तक बना रहे थे। इसमें साथ पढ़ने वाली लड़कियों को लेकर बेहद वाहियात बातें की जा रही थीं, जो आपत्तिजनक थी। इस तरह की बातें ही रेप जैसी घटनाओं को जन्म देती है।

इस ग्रुप की चैट सामने आने के बाद लड़कियों की सुरक्षा को देखते हुए दिल्ली महिला आयोग ने कार्रवाई की मांग की जिसके बाद उस ग्रुप में शामिल लड़कों को पकड़ा जा सका। हैरानी वाली बात ये हैं कि इसमें अधिकतर नाबालिग लड़के शामिल थे।

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समस्या कहां है?
देखा जाए तो समस्या हमारी परवरिश की है। व्यक्ति का बिल्डअप किस तरह से, किस माहौल में होता है यह इन सब का कारण बनता है। महिलाओं के प्रति सम्मान और तमीज से पेश आने की आदत परिवार, दोस्त और साथ के लोगों से आता है। अगर परिवार में ही महिलाओं के लिए सम्मान की बात नहीं कही जाती है तो बच्चे इस बात को कभी नहीं सीख पाएंगे कि महिलाएं सम्मान का पात्र हैं।

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इसके लिए कौन जिम्मेदार
शुरुआत से बात करें तो बच्चों के लिए तीन तरह के माहौल उसे अच्छी सोच और बुरी सोच का बनाते हैं। इसमें सबसे पहले है, घर का माहौल, फिर स्कूल का और फिर दोस्तों साथ यानी आपकी कंपनी। बच्चों को घर से अगर लड़ाई-झगड़ा, गालियां, महिलाओं के प्रति खराब सोच देखने को मिलती है तो बच्चे भी उसी को अपने मन में एक धारणा की तरह बसा लेते हैं।

इसके बाद जब स्कूल में भी उन्हें ऐसा माहौल दिखाई देता है तब उनकी ये धारणा पक्की हो जाती है और फिर दोस्तों के बीच उनके प्रेशर से जो धारणा बच्चों के मन में बन चुकी है वो पकने लगती है।

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क्या हो सकता है इसका निदान
इसके सबसे पहले परिवार से ही शुरुआत करनी होगी। बच्चों के सामने और घर में माता-पिता को कुछ बातों का खास ध्यान रखना होगा, जैसे-

-बच्चों से शुरुआत से ही खुलकर बात करने की कोशिश करें। उन्हें ये समझाएं कि आप उनके लिए हमेशा मौजूद हैं और वो आपसे कोई भी बात बिना झूठ बोले शेयर कर सकते हैं। अगर आप ऐसा बचपन से सीखा सकते हैं तो ये आदत बच्चों की किशोरावस्था तक उनके व्यवहार को गलत होने से बचा सकेगी।

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-इस बात का भी ध्यान रखें कि आपका व्यवहार भी बच्चों को प्रभावित करता है। इसलिय माता-पिता दोनों को आपस में सलीके और सम्मान के साथ पेश आना बेहद जरुरी है। बच्चे इन बातों पर बहुत ध्यान देते हैं कि हमारे माता-पिता खुद क्या करते हैं, वैसे ही हम भी करें।

-बच्चों के लिए लिमिट तय करें, उन्हें बताएं कि हर काम की अपनी सीमा है और उसे लिमिट में करना सही है। इसमें उनका खेलना, फोन पर बात करना शामिल हो सकता है साथ ही उन्हें गलती पर जरूर टोकें और ये बार बार बताएं यही सही और बेहतर है।

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-सबसे जरूरी दो बातों का ख्याल रखें कि बच्चों पर भरोसा करें लेकिन उन्हें ये भी सिखाएं कि उन्हें आपका भरोसा तोड़ना नहीं है। दूसरा ये कि आप बच्चों का साथ दें, उनकी हेल्प करें। ताकि वो अगर कभी कहीं फंसे तो सबसे पहले आपको ही मदद के लिए कहें।

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