Thursday, Aug 18, 2022
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कम से कम दो दिन पहले कैबिनेट नोट भेजा जाए: उपराज्यपाल

  • Updated on 8/6/2022

नई दिल्ली। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने मुख्य सचिव से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि जीएनसीटीडी अधिनियम के तहत ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स (टीओबीआर) के प्रावधानों का पालन किया जाए और सभी कैबिनेट नोट, मेमोरेंडम और प्रस्ताव उनके सचिवालय को कैबिनेट बैठक से कम से कम दो दिन पहले उपलब्ध कराया जाए।

राजनिवास सूत्रों ने कहा कि अप्रैल 2020 से 15 जुलाई 2022 तक कैबिनेट द्वारा विचार किए गए 234 प्रस्तावों में से 79 उपराज्यपाल सचिवालय को एक दिन पहले, 63 उसी दिन और 40 बैठक होने के बाद प्राप्त हुए थे। उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव को लिखे अपने नोट में कहा है कि यह स्पष्ट है कि इस मामले में टीओबीआर का अनुपालन केवल 22 प्रतिशत मामलों में हुआ, जबकि 78 प्रतिशत मामलों में बिना किसी औचित्य के टीओबीआर का उल्लंघन किया गया। उपराज्यपाल के नोट की एक कॉपी मुख्यमंत्री के सचिव को भी भेजी गई है। बता दें कि मुख्य सचिव राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में कैबिनेट के सचिव भी हैं। राजनिवास सूत्रों ने कहा कि उपराज्यपाल ने देखा है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार नियम 1993 (टीओबीआर) का उल्लंघन पारदर्शी और जवाबदेह शासन के हित में नहीं था। टीओबीआर के नियम 13 के नियम 11 और उप नियम (3) के प्रावधानों का हवाला देते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि इस तरह के ज्ञापन, प्रस्ताव और कैबिनेट नोट कैबिनेट की निर्धारित बैठक से ठीक पहले और कई बार बाद में भी प्राप्त हुए थे। कहा गया है कि नियमों के इस तरह के उल्लंघन के लिए कोई कारण दर्ज नहीं किए गए हैं। सूत्रों ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां ऐसे प्रस्ताव और कैबिनेट नोट सीधे कैबिनेट के सामने रखे जाते हैं और उसकी एक प्रति उपराज्यपाल सचिवालय को भी उपलब्ध नहीं कराई जाती है। सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा नियम 13 के उप नियम (3) के तहत तात्कालिकता के मामले में दो दिनों की अवधि को कम किया जा सकता है। लेकिन नोट में रेखांकित किया गया है कि किसी भी मामले में कम से कम दो दिनों की वैधानिक अवधि को कम करने का कोई कारण नहीं बताया गया। दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रदान की गई जानकारी का हवाला देते हुए सूत्रों ने कहा कि पिछले दो वर्षों में 274 प्रस्तावों में से 102 को दिल्ली कैबिनेट द्वारा टेबल एजेंडे के रूप में या प्रभावी विचार-विमर्श के बिना अनुमोदित किया गया था। उपराज्यपाल का मानना है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी शासन के हित में संयम बरता जाना चाहिए। राजनिवास सूत्रों ने कहा कि कैबिनेट की बैठक के दौरान प्रभावी विचार-विमर्श के लिए आवश्यक प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए टीओबीआर के गैर-अनुपालन के परिणामस्वरूप बहुत कम या कोई समय नहीं मिलता है। यह उपराज्यपाल कार्यालय के लिए एक राय बनाने के लिए अपर्याप्त समय है, जो समग्र शासन को प्रभावित करता है।
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एलजी हेडमास्टर की तरह कर रहे काम
उपरा'यपाल के नए कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली सरकार के सूत्रों ने कहा कि एलजी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक की तरह काम कर रहे हैं। वह हमेशा लड़ते रहता हैं, छोटी-छोटी कमियां ढूंढते रहते हैं। हम उनसे लडऩा नहीं चाहते। सरकार के सूत्रों ने कहा कि सरकार जनकल्याण पर ध्यान देना चाहती है।

 

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