Monday, Mar 01, 2021
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अब निगम विद्यालयों में भी लगेंगे सीसीटीवी कैमरे

  • Updated on 3/14/2016

नई दिल्ली, (ब्यूरो)। निगम के स्कूलों को सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के तहत 20 स्कूलों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है। जल्द ही अन्य स्कूलों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। सीसीटीवी कैमरों के लिए पांच करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।

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एसडीएमसी क्षेत्र में 579 विद्यालय आते हैं। विद्यालयों में लगाए जाने वाले इन कैमरों का मॉनीटङ्क्षरग भी किया जाएगा।

20 विद्यालयों में यह मॉनीटरिंग शुरू हो जाएगी, जिससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। एसडीएमसी के महापौर सुभाष आर्या के मुताबिक दक्षिणी निगम के प्रत्येक विद्यालय में सीसीटीवी कैमरा लगाने पर लगभग एक लाख रुपए का खर्च है। इस पूरी योजना के लिए वर्ष 2016-17 में पांच करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया गया है।

उन्होंने बताया कि सभी 104 वार्डों के पार्षद भी एक-एक स्कूल की देख-रेख करेंगे, जिसके लिए प्रत्येक पार्षद को विद्यालयों के विकास कार्यों के लिए पांच लाख रुपए दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि निगम के स्कूलों को आधुनिक बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है लेकिन सरकार की ओर से फंड समय से जारी नहीं करने पर तमाम तरह की अड़चने आ रही हैं।

प्राइवेट स्कूलों को अधिक फंड मिलेगा

दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में आगामी शैक्षणिक सत्र से सभी निजी स्कूलों में आॢथक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कोटे के तहत नामांकन वाले प्रति छात्र के लिए अब 300 रुपए अधिक का भुगतान करेगी। शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के पास विभिन्न निजी स्कूलों से शिकायत आई थी कि ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत नामांकन दिए गए छात्रों के वास्ते सरकार ‘न्यूनतम राशि’ दे रही है।

इसके बाद राशि बढ़ाने का निर्णय लिया गया। शिक्षा निदेशालय (डीओई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि इस कोटे से ताल्लुक रखने वाले छात्रों को नामांकन देने के बदले में इस समय सरकार निजी स्कूलों को एक निर्धारित राशि का भुगतान करती है।

हालांकि, कम राशि को लेकर कई शिकायतें मिली हैं। अधिकारी ने बताया कि अब इस राशि को 1290 से बढ़ा कर 1598 रुपए करने का निर्णय लिया गया है। नर्सरी कक्षाओं के लिए जारी नामांकन के दौरान सरकार ने ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत कम्प्यूटर के जरिए 26,000 से अधिक सीटें आवंटित की है। दिल्ली सरकार ने पहली बार यह प्रयोग किया है।

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