Tuesday, May 17, 2022
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Change of category is not allowed in DU''s new admission guidelines

डीयू की नई एडमिशन गाइडलाइंस में श्रेणी परिवर्तन की अनुमति नहीं

  • Updated on 10/5/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल।  आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन ( डीटीए ) के अध्यक्ष डॉ. हंसराज सुमन ने  डीयू के कार्यवाहक प्रो. पीसी. जोशी को पत्र लिखकर मांग की है कि शैक्षिक सत्र 2021-22 में  स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले एससी /एसटी और ओबीसी कोटे के छात्रों को सामान्य वर्गों के छात्रों के बराबर अंक( माक्र्स ) होने पर उन्हें सामान्य श्रेणी में एडमिशन दिया जाए । उन्होंने बताया है कि डीयू प्रशासन द्वारा जारी नई गाइडलाइंस में जिस श्रेणी में छात्रों ने एडमिशन के लिए आवेदन किया है उन्हें उसी श्रेणी में कॉलेज एडमिशन देगा ।

पहली कटऑफ से दाखिले के लिए पहले दिन 43 प्रतिशत से अधिक सीटों पर आवेदन

अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी किए
डीटीए अध्यक्ष डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि डीयू की प्रवेश शाखा ने शैक्षणिक सत्र 2021-2022 में प्रवेश से संबंधित शिकायतों को कम करने के लिए अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं । इस दिशा-निर्देश के बिन्दु नं. 14 कहता है कि किसी भी परिस्थिति में श्रेणी परिवर्तन की अनुमति नहीं है । यह बिंदु भारत के संविधान में प्रदत्त शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण के प्रावधानों के विपरीत है।  यह बिंदु माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित विभिन्न निर्णयों के विरुद्ध भी है । अनारक्षित श्रेणी सामान्य उम्मीदवारों को दिया गया कोई आरक्षण नहीं है और किसी भी श्रेणी का कोई भी उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी में प्रवेश के लिए पात्र है, यदि उसके पास अनारक्षित श्रेणी के लिए योग्यता आधारित अंक ( माक्र्स )  हैं, भले ही उसने अनारक्षित के अलावा किसी अन्य श्रेणी से आवेदन किया हो।  डॉ. सुमन ने  डीयू कुलपति के अलावा डीन ,स्टूडेंट्स वेलफेयर से को भी इस संदर्भ में याद दिलाया है कि गत वर्षों की भांति एससी / एसटी / ओबीसी के छात्रों को सामान्य श्रेणी के छात्रों के बराबर अंक ( माक्र्स ) होने पर उन्हें  सामान्य श्रेणी में एडमिशन दिया जाए । उन्होंने कहा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रवेश शाखा से अनुरोध और अपेक्षा की जाती है कि भारत सरकार के नियमों और नीतियों के अनुसार इस खंड की अपनी अतिरिक्त गाइडलाइंस  में संशोधन करें क्योंकि उसमें यह स्पष्ट नहीं  कि एससी/एसटी/ओबीसी के छात्रों को सामान्य श्रेणी में प्रवेश दिया जाये यदि उनकी कट ऑफ सामान्य के बराबर है । उन्होंने पुन: डीयू गाइडलाइंस में संशोधन किए जाने की मांग की है ।

 

 

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