Friday, Jan 28, 2022
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दिल्ली: नजफगढ में 100 बेड का अस्पताल तैयार सिर्फ उद्घाटन का इंतजार

  • Updated on 5/24/2021

नई दिल्ली/अनामिका सिंह। राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल कोरोना की दूसरी लहर ने खोलकर रख दी। केंद्र सरकार व राज्य सरकार के अस्पतालों में बेड ना मिलने से अधिकतर लोगों ने सडक पर ही दम तोड दिया। ऐसे में यदि नजफगढ में बनकर लंबे समय से तैयार खडा 100 बेड का अस्पताल शुरू हो जाता तो दिल्ली-देहात के लोगों की दिक्कतें कुछ कम हो जातीं। लेकिन पूर्व स्वास्थ्य और गुलामनबी आजाद से लेकर वर्तमान सांसद प्रवेश वर्मा जिस अस्पताल का शिलान्यास कर चुकें है वो मात्र चार पेडों की शिफ्टिंग की एनओसी के चलते उद्घाटन का इंतजार कर रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस जमीन पर अस्पताल बनाया गया है वो प्राइमरी हेल्थ सेंटर नजफगढ की है, जिसकी स्थापना साल 1939 में हुई थी। इससे 73 दिल्ली के गांवों को जोडा गया था, जिसके 30 सब स्टेशन थे जिनका काम गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मुहैया करवाना था। इस इलाके में कोई भी बडा अस्पताल नहीं था तब साल 2004 में भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव ने इसे रेफरेल यूनिट बनाने का आदेश दिया जहां से सफदरजंग व एम्स मरीजों को भेजा जा सके लेकिन वो कार्यान्वित नहीं हो पाई।

साल 2007 में फिर केंद्र सरकार ने यहां 35 बेड का अस्पताल बनाने की मंजूरी दे दी लेकिन तब भी अस्पताल सिर्फ कागजों में ही रह गया। साल 2010-11 में नजफगढ गांव के कुछ प्रतिष्ठित लोग अस्पताल बनवाने की मांग को लेकर सांसद महाबल मिश्रा से मिले, जिनमें ब्लॉक चेयरमैन चौधरी रामकला, टिन्नूमल भारद्वाज, पार्षद जयकिशन शर्मा, समाजसेवी करतार सिंह शामिल थे। महाबल मिश्रा इस डेलीगेशन के साथ गुलाम नबी आजाद से मिला और केंद्र सरकार से इस जमीन पर 100 बेड का अस्पताल व नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ पैरामेडिकल बनाने को मंजूरी मिली।

जिसकी लागत 245 करोड 17 लाख तय की गई। जिसमें अस्पताल के करीब 95 करोड व इंस्टीच्यूट के लिए करीब 145 करोड बनाना तय किया गया। जिसमें 32 कोर्स पढाने को उस समय मंजूरी दी गई थी। 23 मार्च 2013 में इसका टेंडर हुआ और एचएलएल लाईफ केयर लिमिटेड को काम करने की मंजूरी दी गई। 86 करोड को एडवांस पेमेंट की गई। 28 फरवरी 2014 में गुलाम नबी आजाद व महाबल मिश्रा ने इसका शिलांयास किया। सरकार बदलते ही अस्पताल का काम ठंडे बस्ते में चला गया लेकिन अप्रैल 2018 में एक आरटीआई सामाजिक कार्यकर्ता करतार सिंह द्वारा लगाई गई।

जिसके बाद इस प्रोजेक्ट पर केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने मीटिंग की और कहा कि जब टेंडर हो रहा है और पेमेंट 86 करोड की जा चुकी है तो काम क्यों नहीं हुआ। फिर दोबारा 95 करोड की लागत से अस्पताल बनने को मंजूरी मिली लेकिन इंस्टीच्यूट अधर में लटक गया। जिसके बाद साल 2018 में सांसद प्रवेश वर्मा ने इसका शिलान्यास किया और अस्पताल की बिल्डिंग का निर्माण पूरा किया गया। वर्तमान में स्थिति यह है कि सिर्फ 4 पेडों को दिल्ली सरकार के वन विभाग से शिफ्टिंग की मंजूरी नहीं मिलने की वजह से इस अस्पताल को शुरू नहीं किया जा सका है। इस बाबत कई बार उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से बात करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

हर्षवर्धन ने लिखा था एनओसी को लेकर दिल्ली सरकार को पत्र 
बता दें कि इस अस्पताल में आने वाली रूकावटों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिसंबर 2020 में एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने अपने 24 फरवरी 2020 के डीओ लेटर का हवाला दिया था। साथ ही अस्पताल को शुरू करने को लेकर वन विभाग से पेडों के स्थानांतरण व प्रत्यारोपण की मंजूरी को जल्द दिए जाने की बात कही थी।

अभी तक नहीं मिली वन विभाग की एनओसी: सांसद प्रवेश वर्मा
सांसद प्रवेश वर्मा से इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अस्पताल की बिल्डिंग बनकर तैयार है। अस्पताल खोले जाने से पहले कई विभागों से एनओसी लेनी होती है फायर टेंडर की मंजूरी चाहिए होती है। लेकिन यह सभी काम सिर्फ 4 पेडों की वजह से लटका हुआ है। कई बार इस बारे में दिल्ली सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुरोध किया जा चुका है लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है, जिससे अस्पताल के उद्घाटन में लगातार देरी हो रही है।

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