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delhi east mcd primary school

अधिकारियों की लापरवाही के चलते जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर छात्र

  • Updated on 11/25/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। स्कूल में आप अपने बच्चों को अच्छे माहौल में पढने के लिए भेजते हैं लेकिन जब वहां बच्चों की जान ही जोखिम में हो तो कोई क्यों बच्चों को स्कूल में पढने के लिए भेजेगा। ऐसा ही हाल पूर्वी दिल्ली नगर निगम (East MCD) प्राथमिक विद्यालय (Primary school) ताहिर पुर नं. 1 स्कूल (Tahir Pur School) में देखने को मिल रहा है, जहां भवन जर्जर हालत में होने के कारण बच्चों व शिक्षकों की जान हर समय आफत में बनी रहती है। अभिभावकों में भी इस बात को लेकर डर है।

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बता दें कि अभिभावकों का कहना है कि इस स्कूल में कई सुविधाओं का अभाव है। साथ ही दीवारों में दरारें हैं और सीलन से भरी छत कब गिर जाए पता नहीं। ऐसे हालात में बच्चों को स्कूल भेजने के बाद डर बना रहता है। हमारी मजबूरी है कि हमें बच्चों को स्कूल भेजना पड़ता है। उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चों को हम प्राइवेट स्कूल में पढ़ा भी नहीं सकते हैं।

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यहां की छतों से बरसात में पानी टपकता हैं। बरसात के समय बच्चों को पढ़ने और शिक्षकों को पढ़ाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में डेस्क को इधर-उधर खिसकाना पड़ता है। यही नहीं यहां बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी डर के माहौल में बच्चों को पढ़ाना पड़ता है।

कुछ दिन पहले ही हुआ हादसा
गौरतलब हो कि बीते सोमवार को दिल्ली के जाफराबाद रोड स्थित पूर्वी दिल्ली नगर निगम के प्राथमिक स्कूल की एक कक्षा में छत का प्लास्टर गिरा था। हादसे के वक्त कक्षा में बच्चे पढाई कर रहे थे, कुछ बच्चों को चोट भी आई थी। बड़े हादसा होने के बाद भी शिक्षा विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं है और प्राथमिक विद्यालय ताहिर पुर नं.-1 स्कूल में बच्चे ऐसे ही हालत में बैठने को मजबूर हैं। 

कभी भी गिर सकता है प्लास्टर
देखभाल के अभाव में विद्यालय का भवन खस्ताहाल है। विद्यालय के भवन की छत का प्लास्टर झड़ रहा है। छत का सरिया दिखने लगा है और मरम्मत के नाम पर केवल सफेदी कर दी गई है। छत का प्लास्टर कभी भी गिरकर छात्रों को चोटिल कर सकता है। पिलरो में दरारें आ गई हैं। बरसात में छत से पानी टपकता है। 

क्या कहना है स्थानीय पार्षद का 
स्थानीय पार्षद मोहिनी जिनवाल ने बताया कि कई सालों से स्कूल के लिए लड़ाई लड़ रही हूं। कई बार इस मुद्दे को शिक्षा विभाग के सामने रखा है। इसके लिए उन्हें फंड भी पास कर दिया हैं लेकिन कब बनकर तैयार होगा पता नहीं । निगम में बैठे अधिकारियों का कहना है कि इलेक्शन के बाद इसे बनाया जाएगा। शायद निगम में बैठे शिक्षा विभाग के अधिकारी जाफराबाद रोड स्थित स्कूल के तरह हादसे का इंतजार कर रहें हैं। हमारी मांग है कि जल्द से जल्द स्कूल बना दिया जाए या इस स्कूल से बच्चों को किसी अन्य स्कूल में तब तक के लिए स्थानंतरित कर दिया जाए। 

गार्ड रूम बना है कबाडखाना
विद्यालय के गेट पर गार्ड रूम बना है लेकिन गार्ड रूम में कबाड़ भरा हुआ है यहां कोई भी गार्ड नियुक्त नहीं किया गया है कई साल पहले गार्ड रूम बनाया गया था। 

कंप्यूटर फांक रहा है धूल 
यहां चार साल पहले कंप्यूटर विभाग में 10 कंप्यूटर लगाए गए थे। कंप्यूटर शिक्षा के लिए केवल दो साल के लिए ही यहां कंप्यूटर शिक्षक नियुक्त किए गए थे। दो साल पूरा होने के बाद आज तक यहां कोई कंप्यूटर शिक्षक नहीं है। दूसरे विषय के शिक्षक ही कंप्यूटर क्लास लेने को मजबूर है सप्ताह में कभी एक बार क्लास ली जाती है और कभी नहीं भी। स्कूल में बच्चों को कंप्यूटर के विषय में कुछ भी ज्ञान नहीं है। शिक्षकों को कंप्यूटर ट्रेनिंग (Computer Training) देने के लिए केवल तीन दिन का सेमिनार आयोजित किया जाता है। ऐसे में शिक्षकों को ही कंप्यूटर का ज्ञान नहीं हो पाता है तो वे बच्चों को कैसे कंप्यूटर शिक्षा दे पाएंगे। 

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