Tuesday, Apr 13, 2021
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अनाज मंडी आग: शॉर्ट सर्किट से डेथ चैंबर में तब्दील हुई इमारत, इन लोगों ने गंवाई जान

  • Updated on 12/9/2019

नई दिल्ली/ मुकेश ठाकुर। दिल्ली (Delhi) के अनाज मंडी (Anaj Mandi) इलाके की तीन मंजिला इमारत में शॉर्ट शर्किट से निकली चिंगारी से लगी आग ने ऐसा धुआं बिल्डिंग में बनाया कि इमारत चंद मिनटों में डेथ चेंबर बन गई। इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल पूरी तरह धुएं से भरी हुई थी जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) की मात्रा अधिक थी। यही मौत का बड़ा कारण थी।

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प्लास्टिक की आग तेज होने से पूरी बिल्डिगं चंद मिनटों में बनी गैस चैंबर
इसके अलावा कई और बड़ी लापरवाहियां भी इस बिल्डिंग में मौजूद थीं, जिसके कारण मौत का आंकड़ा बढ़ता गया एलएनजेपी अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक वहां पर पहुंचाए गए करीब तीन दर्जन लोग मृत अवस्था में थे। यह सभी लोग बिल्डिंग की दूसरी व तीसरी मंजिल पर थे जहां कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की मात्रा बेहद ज्यादा हो चुकी थी, जिसके कारण एक-एक करके लोग गिरने लगे और बेहोश हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई। जांच कर्मियों के मुताबिक बिल्डिंग ही हर मजिंल पर एक ही खिड़की थी जो पूरी तरह से बंद थी, जिसके कारण ये गैस बाहर नहीं निकली वहीं दूसरी तरफ प्लास्टिक की आग तेज हो रही थी जिसके कारण पूरी बिल्डिगं चंद मिनटों में गैसचैंबर बन गई। 

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जीने बेहद संकरे और हर इमारत में प्लास्टिक  
जांच के तहत पाया गया कि बिल्डिंग के जीने बेहद संकरे थे, जिसके कारण लोग जब जीने से नीचे उतरें तो एक दूसरे पर गिर पड़े। जीने पर से 12 डेथ बॉडी पाई गई, जिनके हाथ व पैर भी टूट गए हैं। ये चोटें उनके शरीर पर एक दूसरे के गिरने और चढऩे से हुई। यही नहीं बिल्डिंग में हर प्लोर पर भारी मात्रा में प्लास्टिक मौजूद थी। क्योंकि इस फैक्ट्री में प्लास्टिग बैग के  प्लास्टिक से बने सामानों को बनाया जाता था। हर प्लोर पर 30 से अधिक व्यक्ति काम करते थे जो इसी प्लास्टिक और उसके साथ प्रयोग होने वाले कपड़ों पर ही सोते थे।

फैक्ट्री के दो फ्लोर पर बैग और खिलौने तो अन्य फ्लोर पर जैकेट बनाई जाती थीं
जांच में आया है कि फैक्ट्री के दो प्लोर पर प्लास्टिक से बनी बैग और खिलौने तो अन्य फ्लोर पर जैकेट बनाई जाती थी जिसमें लैदर और रैकसीन का कपड़ा शामिल था। एनडीआरएफ टीम के मुताबिक प्लास्टिक ने जहां बिल्डिंग को गैस चैंबर बनाया वहीं जैकेट के कपड़े ने आग को इतना भड़का दिया कि लोगों को बचने का मौका नहीं मिला। सफदरजंग अस्पताल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. सलभ कुमार के मुताबिक आग की लपटों के साथ धुएं की मात्रा भी जानमाल के नुकसान के मामले में अहम साबित हो सकता है। धुंए की मात्रा अगर अधिक है तो प्रभावित स्थान में फंसे लोगों की मौत धुएं से दम घुटने के कारण हो सकती है। 

अग्निकांड में मारे गए लोग

1. इमरान - मुरादाबाद, यूपी
2. मो, साजिद - मुजफ्फरपुर  
3. मुशर्रफ अली - बिनजनौर   
4. गुड्डू - समस्तीपुर, बिहार
5. मो. सदरे - समस्तीपुर 
6. मो. साजिद - समस्तीपुर 
7. मो. इकराम - मुरादाबाद 
8. अकबर - समस्तीपुर 
9. फैसल - सहरसा, बिहार
10. सजीम - सहरसा, बिहार
11. अफसार - सहरसा, बिहार
12. शाकिर - —-
13. अफजल - सहरसा, बिहार 
14. साजिद - समस्तीपुर, बिहार
15. मुखिया - —— 
16. एनुल - सीतामढ़ी 
17. गयासुद्दीन - ——-
18. जोजो - समस्तीपुर 
19. गनवा - समस्तीपुर 
20. दुलारे - सीतामढ़ी 
21. अब्बास - सीतामढ़ी
22. राजू - मुजफ्फरपुर 
23. अयुध - ——
24. नवीन कुमार - बेगुसराय  
25. मो गुलाल - सीतामढ़ी 
26. सनाउल्ला - सीतामढ़ी 
27. मो सजार - सहरसा, बिहार
28. जाहिद - सहरसा, बिहार 
घायलों के नाम (खतरे से बाहर) 
1. अज्ञात शख्स 
2. गुलरेज - दरभंगा, बिहार 
3. मुकीम - मधुबनी, बिहार  

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