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टिकरी बॉर्डर: आंदोलन में मरे किसानों को शहीद का दर्जा देने की उठी मांग

  • Updated on 12/4/2020

नई दिल्ली (अनामिका सिंह): टिकरी बाॅर्डर पर किसानों का प्रदर्शन (Farmer protest) 9 वें दिन भी जारी रहा। अभी तक टिकरी बाॅर्डर पर सर्दी की वजह से 60 साल की उम्र के 3 किसानों की जान जा चुकी है। जिन्हें शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग आंदोलनकारी किसान लगातार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अब चाहे और जानें चली जाएं लेकिन हम आर-पार की लडाई लडकर ही दम लेंगे। यही नहीं पहले इन मृत किसानों के परिजनों ने उनके शवों को ले जाने से साफ इंकार कर दिया था लेकिन बाद में उनका शव लेकर पंजाब चले गए। 

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अधिकतर किसान बुजुर्ग हैं
टिकरी बाॅर्डर पर आंदोलन में शामिल अधिकतर बुजुर्ग किसान हैं और तापमान भी लगातार गिरता चला जा रहा है। जिससे उन्हें असुविधा हो रही है। खुले में सोने की वजह से किसानों की मौत हो रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृत किसानों के शवों को रोहतक-दिल्ली रोड पर नागरिक अस्पताल में रखा गया था लेकिन वहां मौजूद उनके साथियों ने उसे लेने से इंकार कर दिया था उनका कहना था कि जब तक सरकार हमारी मांगों को नहीं मानेगी हम शवों को वापस नहीं ले जाएंगे। अभी तक आंदोलन के दौरान सबसे पहली मौत पंजाब के लुधियाना समराला के खटरा भगवानपुरा निवासी किसान गज्जन सिंह की हुई थी। जिसके बाद बरनाला के जनकराज की मौत हुई।  

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भठिंडा के लखवीर सिंह की हुई मौत
वहीं गुरूवार सुबह भठिंडा के लखवीर सिंह की मौत हुई। लगातार होने वाली मौतों के कारण शुक्रवार को किसानों में खासा रोष देखने को मिला। किसानों की एक ही मांग थी कि मृतक किसानों को शहीद का दर्जा दिया जाए, वो अपने हक की लडाई लड रहे थे लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और बुजुर्ग किसानों को अपनी जान गंवानी पडी। प्राप्त जानकारी के अनुसार गज्जन सिंह और जनकराज की मौत के बाद बीते मंगलवार को परिजनों ने आंदोलनकारी किसानों के शवों को पहले पंजाब ले जाने से भी इंकार किया था।  

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अन्य किसानों ने दिया धरना
मुआवजे समेत अन्य मांगों को लेकर पुराने रोहतक-दिल्ली रोड पर नागरिक अस्पताल के बाहर करीब 3 घंटे परिजनों व अन्य किसानों ने धरना भी दिया था। जिसके बाद किसानों के शवों को अस्पताल के शवगृह में रखा गया लेकिन बाद में शवों को घर भेज दिया गया था। इसी प्रकार के हालात किसान लखवीर सिंह की मौत के बाद भी देखने को मिले। लगातार तीन मौतों से अब किसानों का रोष अधिक होता जा रहा है।

महिलाएं खाना परोसने से लेकर नारेबाजी तक दे रही हैं साथ
टिकरी बाॅर्डर पर बीते दो दिनों से महिला किसानों की संख्या बढती जा रही है। पहले महिलाएं सिर्फ प्रदर्शन में पुरूष किसानों का साथ दे रही थीं लेकिन बीते दो दिनों से महिलाएं उनके साथ खाना भी बनवा रही हैं। एक महिला परमिंदर कौर ने बताया कि वो अपने बडे बच्चों को बुजुर्गों के हवाले घर में छोडकर आईं हैं जबकि अपनी 3 वर्षीय बेटी को साथ लाईं हैं। जिसकी देखभाल सब लोग बडे प्यार से कर रहे हैं वो रात को ट्राॅली में सोती है और पूरे दिन वहीं खेलती है।  

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जेल से छूटे हरियाणा के किसान देने पहुंचे समर्थन
किसान आंदोलन की भनक लगने के बाद हरियाणा के कई किसान नेताओं को 24 नवंबर की रात ही उनके घरों से उठा लिया गया था। जैसे ही वो जेल से छूटे तो सबसे पहले अपना समर्थन देने टिकरी बाॅर्डर पहुंचे। यहां उन्होंने बताया कि किस तरह उन्हें जेलों में ठूसकर अपराधियों की तरह रखा गया था। उनका कहना था कि सरकार अपने बल का दुरूपयोग कर रही है।

ट्रैक्टर बना डीेजे, करतब के साथ किसान कर रहे डांस
टिकरी बाॅर्डर पर आंदोलनकारी किसानों ने अपने ट्रैक्टर को जहां मनोरंजन का साधन बना लिया है और डीजे लगवाकर गानों की धुनों पर नाच रहे हैं। वहीं कुछ युवा किसान उस पर चढकर हुक्का गुडगुडाते व करतब दिखाते हुए भी दिख रहे हैं। यही नहीं किसान आंदोलन में अपने प्रतिनिधित्व को दर्शाने के लिए सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब टैग कर रहे हैं। 

बाॅर्डर पर गंदगी का अंबार, निगम नहीं निभा रहा ड्यूटी
बाॅर्डर पर किसान साफ-सफाई का ध्यान रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। थोडी-थोडी देर बाद किसानों द्वारा सडकों पर झाडू लगाया जा रहा है लेकिन कूडे का ढेर सडक के किनारों पर जगह-जगह लगा हुआ है। जिसे बहादुरगढ निगम द्वारा नहीं उठवाया जा रहा है। जिससे हर ओर गंदगी का अंबार लगता जा रहा है। 

 

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