Monday, Jun 27, 2022
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किसानों ने सरकार से की गेंहू की खरीद और 500 रुपए क्विंटल बोनस की मांग 

  • Updated on 5/17/2022


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। किसानों ने गेहूं के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल के अतिरिक्त बोनस और पूरी खरीद की मांग केंद्र सरकार से की है। एआईकेएस ने मांग की है कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पादन में गिरावट और उत्पादन लागत में बेलगाम बढ़ोतरी को देखते हुए गेहूं की खरीद पर 500 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाए। सरकारी एजेंसियां पर्याप्त तादाद में खरीद केंद्र नहीं खोल रही हैं, जिससे किसानों को उत्पादन की कम मात्रा और कम खरीद की दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है।
    किसान नेताओं ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों की वजह से किसानों को संकट के समय बिक्री करने के लिए मजबूर किया जाता है और परिणामस्वरूप संकट की इस अवधि में कम कमाई होती है। यह बोनस उन किसानों को भी दिया जाना चाहिए जो पहले ही अपना गेहूं सरकारी एजेंसियों को बेच चुके हैं। अधिकांश गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में मार्च-अप्रैल में बेमौसम गर्म मौसम के कारण इस वर्ष उत्पादन में 20-25 प्रतिशत की फसल का नुकसान हुआ है जिससे किसान को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके बाद भी मोदी सरकार ने इस साल 44.4 करोड़ टन गेहूं के घोषित कोटे का आधा भी नहीं खरीदा है।
    उन्होने कहा कि यदि सरकारी एजेंसियां गेहूं की तय मात्रा की खरीद के लिए आगे नहीं आती हैं, तो निकट भविष्य में खाद्य सुरक्षा और आटा व अन्य खाद्यान्नों की कीमतों में वृद्धि होने की संभावनाएं रहेंगी। स्थिति का फायदा उठाकर निजी व्यापारी और कॉरपोरेट कंपनियां जमाखोरी, मुनाफाखोरी के लिए भारी मात्रा में गेहूं की खरीद में जुटी हैं। दूसरी ओर व्यापारी आटे की कीमतों में बढ़ोतरी कर रहे हैं और इस तरह कालाबाजारी के माध्यम से भारी मुनाफाखोरी के साथ स्थिति का लाभ उठा रहे हैं। 
      बता दें कि 2020-21 में गेहूं का निर्यात 21.55 लाख टन था जबकि 2021-22 में इसे बढ़ाकर 72.15 लाख टन किया गया था। इस नीति ने घरेलू खाद्य भंडार को प्रभावित किया था, और गेहूं के स्टॉक की कमी के कारण मोदी सरकार को उन क्षेत्रों में चावल वितरित करने के लिए मजबूर होना पड़ा जहां पहले गेहूं वितरित किया गया था। किसानों ने कहा कि मोदी सरकार अनिश्चित स्थिति का प्रबंधन करने में असमर्थ है और इससे किसानों के बीच व्यापक संकट बिक्री के रास्ते खोलते हुए लोगों की खाद्य सुरक्षा को नष्ट करने का खतरा पैदा होगा। एआईकेएस मोदी सरकार की इन किसान विरोधी नीतियों का कड़ा विरोध करता है। 
 

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