Wednesday, Oct 20, 2021
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दस दिन की साधना के बाद वापस लौटे केजरीवाल

  • Updated on 9/8/2021


नई दिल्ली। राजस्थान के जयपुर स्थित विपश्यना केंद्र से 10 दिन की कठिन साधना के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को वापस लौट आए। दाेपहर बाद दिल्ली लाैटने के बाद फिर से उन्होंने कामकाज में सक्रियता बढ़ा दी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे मुलाकात की। शाम के समय उन्होंने सरकार के मंत्रियों और पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की।  
गौरतलब कि मुख्यमंत्री केजरीवाल राजस्थान के शहर जयपुर के समीप गलता की पहाड़ियों में बने विपश्यना केंद्र में पिछले 10 दिनों से साधना कर रहे थे। उन्होंने सात सितंबर तक वहां पर साधना की। इस दौरान उन्होंने किसी से मुलाकात तक नहीं की। यहां तक कि मोबाइल फोन, अखबार, टेलीविजन और राजनीतिक गतिविधियों से भी दूरी बनाकर रखी थी। साधना केंद्र के नियमों के अनुसार सीएम रोजाना सुबह चार बजे उठ जाते थे। इसके बाद छह बजे तक तय समय पर साधना कक्ष पहुंच जाते थे। साधना के बाद स्नान और नाश्ता करने का नियम होता है। फिर सुबह सात बजे से साढे़ सात बजे तक साधना कक्ष में पहुंचकर केजरीवाल फिर ध्यान करते थे। इसके बाद दोपहर साढ़े 12 बजे से दो बजे के बीच लंच करते थे। लंच करने के बाद फिर विपश्यना व साधना होती थी। इसके बाद रात नौ बजे साधना से फ्री होते थे। देखा जाए तो सीएम व‍िपश्‍यना कोर्स के श‍िव‍िर में जाते रहते हैं, लेक‍िन प‍िछले दो सालों से कोरोना महामारी और कार्यों की व्‍यस्‍तता के चलते वह श‍िव‍िर में नहीं जा सके थे।
 बता दें कि महाराष्ट्र के इगतपुर व  हिमाचल प्रदेश के धर्मकोट सहित कई विपश्यना शिविरों में पहले भी केजरीवाल 10 दिवसीय विपश्यना शिविरों में भाग ले चुके हैं। केजरीवाल ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव और साल 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के अपने बेहद व्यस्त चुनाव प्रचार के दौरान भी विपश्यना के लिए समय निकाला था, अवकाश लेकर वे दस दिनों के लिए शिविरों से जुड़े थे। राजनीति में आने से पूर्व भी केजरीवाल विपश्यना शिविरों में जाते रहे हैं। साथ ही, केजरीवाल की रुचि प्राकृतिक चिकित्सा में भी रही है। बेंगलुरु के नेचुरौपैथी सेंटर में भी केजरीवाल जा चुके हैं। विपश्यना ध्यान शिविर के दौरान साधक बाहरी दुनिया से पूरी तरह से कट जाता है। ऐसे में न बाहरी लोगों को साधक के बारे में पता होता है और न ही साधक को दुनिया की कोई खबर होती है।

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