Friday, Jan 24, 2020

दिल्ली सरकार का दावा, इस साल चिकनगुनिया और डेंगू के कम मामले

  • Updated on 10/12/2017

Navodayatimes नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय में कहा कि राजधानी में इस वर्ष 2016 की तुलना में डेंगू और चिकनगुनिया के कम मामले सामने आए हैं और स्थिति ‘खराब नहीं’ है। न्यायमूॢत मदन बी लोकूर और न्यायमूॢत दीपक गुप्ता की पीठ के समक्ष दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि नगर निगम द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार सात अक्तूबर तक राजधानी में चिकनगुनिया के 368 मामले सामने आए थे जबकि इस अवधि में अखिल भारतीय स्तर पर इनका आंकड़ा 8,726 था। उन्होंने कहा कि इसी तरह सात अक्तूबर तक राजधानी में डेंगू के 2,152 मामलों का पता चला।

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इसमें इस वजह से एक व्यक्ति की मृत्यु का मामला भी शामिल है। पिछले साल, दिल्ली में बड़े पैमाने पर चिकनगुनिया और डेंगू के मामले हुए थे। नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार तीन दिसम्बर, 2016 तक डेंगू के 9,633 और चिकनगुनिया के 4,305 मामले सामने आए थे। आंकड़ों के अनुसार इस साल राजधानी में डेंगू के कुल 4,545 मामले सामने आए। इनमें से 2,152 दिल्ली निवासी थे जबकि शेष दूसरे राज्यों से थे। इन 2,152 मामलों में से 345 इसी महीने सामने आए हैं।

डेंगू और चिकनगुनिया की बीामारी साफ पानी में पैदा होने वाले एडिस एजिप्टी मच्छरों से होती है। इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि इस साल स्थिति खराब नहीं है और वह एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में हलफनामा दाखिल करेंगे। शीर्ष अदालत ने 2015 में कथित रूप से पांच निजी अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार की वजह से डेंगू से ग्रस्त सात वर्षीय बालक की मृत्यु के मामले का स्वत: ही संज्ञान लिया था। इस बालक के माता-पिता ने बाद में आत्महत्या कर ली थी। न्यायालय ने इस पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था।  

स्वाइन फ्लू तो कम हुआ, पर मच्छरों का आतंक बरकरार

 पिछले कई महीनों से राजधानी में कहर बरपाने वाला स्वाइन फ्लू अब क्या न्यूट्रल मोड में आ गया है? हालांकि, देशभर में स्वाइन फ्लू से अबतक 2 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली में पिछले दो हफ्ते में स्वाइन फ्लू के एक भी मामले सामने नहीं आए हैं। यह खबर फिलहाल उन लोगों के लिए राहत भरी साबित हो सकती है, जो स्वाइन फ्लू के खौफ से हैरान परेशान हो रहे थे।

एक अक्तूबर तक की स्थिति साफ करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि राजधानी में दो सप्ताह पहले 24 सितम्बर तक स्वाइन फ्लू के 2798 मामले सामने आए थे। जबकि इनमें से 12 मरीजों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद से स्वाइन फ्लू का एक भी मामला सामने नहीं आया। विशेषज्ञों की मानें तो दीवाली बाद स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी आ सकती है। सीनियर फिजिशियन डॉ. आरएन कालरा के मुताबिक दिल्ली में प्रत्येक वर्ष दीवाली के आसपास स्वाइन फ्लू के मरीजों की तादाद बढ़ जाती है।

जबकि इस वर्ष बीमारी जून और जुलाई के महीने में ही लोगों को प्रभावित करने लगी थी। इसलिए मौसम जैसे-जैसे सर्द होगा स्वाइन फ्लू पीड़ितों की तादाद में इलाफा होगा। सनद रहे कि पिछले 7 वर्षों के दौरान राजधानी दिल्ली में स्वाइन फ्लू 118 लोगों की असमय मौत का कारण बना है। वहीं पूरे देश में 8,420 मरीजों ने इसकी चपेट में आकर जान गंवा दिए हैं। मौजूदा वर्ष में जनवरी से एक अक्तूबर के मध्य देश भर में 1965 स्वाइन फ्लू मरीजों की मौत हो चुकी है। 

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मच्छर जनित बीमारियों से भी खतरा   

स्वाइन फ्लू ही नहीं बल्कि दिल्ली में डेंगू भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। समय के साथ डेंगू के रूप बदल रहे हैं। उल्टा बुखार और  डेंगू टाइप फीवर लगातार लोगों को शिकार बना रहा है। आमतौर पर डेंगू से मिलते-जुलते लक्षणों वाले इन दोनों बुखारों की पहचान आसानी से नहीं हो पा रही है। डेंगू की वजह से 1800 से ज्यादा लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। वहीं सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 2 मौतें भी हो चुकी है। जबकि, वायरल और टाइफाइड जैसे बुखार भी लोगों के लिए लगातार चुनौती पैदा कर रहे हैं और अस्पतालों में बुखार पीड़ित मरीजों की तादाद बढ़ाने वाले साबित हो रहे हैं। 

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