Tuesday, Feb 18, 2020
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दिल्लीवालों पर चढ़ा लोहड़ी का रंग, घर के साथ - साथ होटल में भी दिखा जश्न का इंतजाम

  • Updated on 1/13/2018

नई दिल्ली/नेहा सजवाण। दिल्ली में हर त्योहार को लेकर एक अलग धूम नजर आती है, लेकिन जब बात लोहड़ी की हो तो एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। शनिवार यानी आज दिल्ली में लोहड़ी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। इसको लेकर कई जगहों पर जश्न का इंतजाम भी किया जा रहा है, जहां आकर लोग जमकर लोहड़ी को मना सकते हैं। इसके साथ ही ग्रीन लोहड़ी का क्रेज भी लोगों में काफी देखने को मिल रहा है। लोग पर्यावरण के साथ खुद को और लोगों को बचाने के लिए ग्रीन लोहड़ी मनाना पसंद कर रहे हैं। वहीं बाजारों में भी इसकी धूम देखने को मिल रही है। 

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ग्रीन लोहड़ी का क्रेज 

दिल्ली में इस बार ग्रीन लोहड़ी का क्रेज देखने को मिल रहा है। लोहड़ी के वक्त जलाई जाने वाली लकड़ी से प्रदूषण को देखते हुए लोग कम लकड़ी को जलाने की तैयारी में हैं। इस बार लकड़ी और गोबर के उपलों से लोग तौबा कर रहे हैं। गांधी नगर की लवली मानी कहती हैं कि लोहड़ी खुशी और जश्न का त्योहार है, जिसे हम काफी धूमधाम से मनाते हैं मगर दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इस बार हम बॉन फायर में कटौती कर रहे हैं जिससे धुआं कम हो। 

मूंगफली और गजक गिफ्ट पैक में मौजूद

लोहड़ी और मकर संक्रांति पर बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। दुकानों के साथ ही सड़कों के किनारे बैठकर मूंगफली, रेवड़ी-गजक आदि बेचने वालों के यहां ग्राहकों की संख्या बढ़ गई है। 

लोहड़ी पर मूंगफली, रेवड़ी, गजक, पॉपकॉर्न (फुल्ले) लोगों ने खरीद लिए हैं। बाजारों में खुले रूप में बिकने के साथ यह सभी चीजें पैकिंग में भी मौजूद है। दुकानों पर गजक, रेवड़ी, मूंगफली, पॉपकॉर्न व खजूर आकर्षक गिफ्ट पैक में 500 रुपए में मिल रहे हैं। वहीं खुले रूप में मूंगफली 100 रुपए, रेवड़ी-गजक 160 से 180 रुपए किलो, मूंगफली वाली पट्टी 120 रुपए किलो में मिल रही है। 

प्रकृति को धन्यवाद करने के लिए मनाते हैं लोहड़ी

लोहड़ी का त्योहार प्रकृति को धन्यवाद कहने के लिए मनाया जाता है। लोहड़ी वाले दिन शाम को ढोल-नगाड़े बजते हैं। साथ ही जमकर नाच-गाना होता है। लड़के भांगड़ा करते हैं। वहीं लड़कियां और महिलाएं गिद्धा करती हैं। इस दिन गुड़ की रेवड़ी, मूंगफली और फुल्ले खाये जाते हैं। साथ ही इसे सभी लोगों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। लोहड़ी का त्योहार फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा हुआ है। नवविवाहित जोड़े के लिए पहली लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। लोहड़ी के दिन नवविवाहित जोड़ा अग्नि के चारो ओर फेरे लेते हैं और अपने दांपत्य जीवन की मंगलकामना करते हैं।

दुल्ला भट्टी की कहानी प्रचलित

मुगल शासन काल में दुल्ला भट्टी पंजाब में रहता था। उस समय लड़कियों का सौदा किया जाता था और दूसरे धर्म में जबरन शादी कर दी जाती थी। दुल्ला भट्टी सौदागरों से लड़कियों को बचाकर उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवाता था। इसलिए दुल्ला भट्टी को नायक के रूप में माना जाता है। लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाई जाती है और सुंदरी मुंदरिये का गीत गाकर दुल्ला भट्टी को याद किया जाता है।

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सजे फार्म हाउस और होटल

घर के आंगन में बॉन फायर जलाकर लोहड़ी मनाने के साथ आप फार्म हाउस और होटल में भी अन्य लोगों के साथ इस त्योहार को मना सकते हैं। इस बार लोहड़ी के लिए लोगों ने पहले से ही फार्म हाउस और होटल्स की बुकिंग कर ली है। लोहड़ी के लिए दिल्ली के कई फार्म हाउस पूरी तरह पैक हो चुके हैं। 

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