Friday, Aug 19, 2022
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कंस्ट्रक्शन साइट्स पर प्रदूषण से बचाव के लिए मेट्रो कर रहा है एंटी स्मॉग गन 

  • Updated on 12/5/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। प्रदूषण से बचाव के लिए दिल्ली मेट्रो अपनी कंस्ट्रक्शन साइट्स पर अन्य उपायों के साथ एंटी स्मॉग गनों का इस्तेमाल कर रहा है। निर्माण से होने वाले धूल के कण हवा में न जाएं इसके लिए 14 एंटी गन इस्तेमाल की जा रही हैं। दरअसल अभी चौथे चरण की मेट्रो के लिए 12 सिविल ठेके चल रहे हैं और वहां पानी की बौछार मारकर धूल को उडऩे से रोकने के लिए आधुनिकतम एंटी स्मॉग गन लगाई हैं जो कि 70 से 100 मीटर की दूरी तक हल्की फुहारें छोड़ती हें। 
        एंटी स्मॉग गनों के प्रयोग के दौरान यह सुनिश्चित किया जाता है कि छिड़काव के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी कॉलीफोर्म, वायरस और बैक्टीरिया रहित हो। अधिक प्रभाव छोडऩे के लिए 10 से 50 माइक्रो मीटर वाली बूंदों के आकार के लिए अच्छी क्वालिटी के नोजल उपयोग में लाए जाते हैं। एक एंटी स्मॉग गन 20 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र के लिए पर्याप्त मानी जाती है और मेट्रो ने कहा कि जरूरत बढऩे पर इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। 
पारंपरिक तौर पर पूरी दुनिया में कोयला, साीमेंट निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गनों का इस्तेमाल होता है लेकिन नवम्बर, 2016 में डीएमआरसी ने पहली बार एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अपने निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल किया। 
     यह जानकारी देते हुए मेट्रो के कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने कहा कि एंटी स्मॉग गन के इस्तेमाल पर मिले फीडबैक पर चौथे चरण के निर्माण कार्यों में इसे अनिवार्य कर दिया गया है। दिल्ली सरकार ने भी अब इनके इस्तेमाल को अनिावर्य किया है। चूंकि दिल्ली में इन दिनों प्रदूषण के चलते निर्माण बंद है इसके बावजूद एंटी गन अपना काम नियमित कर रही हैं। मेट्रो ने कहा कि प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए वह एंटी स्मॉग गनों के अलावा दूसरे उपाय भी कर रही है। इसमें बैरिकेडों की सफाई, निर्माण सामग्री को तिरपाल से ढक कर रखें, साइट से निकलने वाले वाहनों के टायरों की सफाई की जाती है। 
 

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