Wednesday, Apr 25, 2018

1984 सिख दंगा: पहले सिखों का फिर इंसाफ का हुआ कत्ल

  • Updated on 1/12/2018

नई दिल्ली/ब्यूरो। 1984 के सिख दंगों का इंसाफ सिखों को दिलवाने में असमर्थ रही जांच एजेंसियों एवं कमेटियों की विफलता को दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अब उजागर करेगी। सिख दंगों की याद में बने सच की दीवार स्मारक पर मारे गए सिखों के साथ ही अब 3 आयोग, 7 कमीशन, 2 एसआईटी के द्वारा सिखों के साथ किए गए अन्याय को भी उकेरा जाएगा। ताकि आने वाली पीढिय़ों को अन्याय के इस धारावाहिक के संजीव दर्शन करवाए जा सके।

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यह ऐलान आज यहां कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके तथा महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा ने किया। साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई एसआईटी को दिल्ली कमेटी हर प्रकार का सहयोग देगी। संसद भवन के सामने बने स्मारक में दंगों के दौरान मारे गए लगभग 3000 लोगों के नाम के साथ ही सिखों को बचाने में अपनी जान गंवाने वाले 3 गैर सिखों का नाम भी दीवारों पर अंकित है। 

 ताजा फैसले से दंगों का स्मारक ‘इंसाफ कत्ल’ के स्मारक के तौर पर भी जाना जाएगा। क्योंकि जिन लोगों को इंसाफ दिलवाने की जिम्मेदारी थी, वो लोग सरकारी दबाव, पद की लालच या कातिलों को संरक्षण देने के कारण सिखों को इंसाफ दिलवाने में नाकाम रहे। सिखों का मानना है कि अगर 1984 कांड का पहले ही इंसाफ मिल गया होता तो 2012 के गुजरात दंगे नहीं होते। इंसाफ देने में हुई बेरुखी का ही फायदा सियासी पार्टियों ने भावनात्मक शोषण करने के लिए उठाया है। सिखों की माने तो इन्साफ देने के नाम पर हुए दिखावे में सिखों को इन्साफ ना मिलना भी लोकतांत्रिक देश का ऐसा काला इतिहास है, जिसे छुपाना या बताना दोनों शर्मनाक है।    

बिना डरे गवाही देने के लिए आगे आएं पीड़ित : सिरसा  

विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सज्जन कुमार के खिलाफ नांगलोई थाने के मुकद्दमें में पुलिस को तुरंत चार्जशीट पेश करनी चाहिए, नहीं तो यह संदेश जाएगा कि केंद्र सरकार सिखों को इंसाफ नहीं दे रही है। सिरसा ने गवाहों को दोषियों के खिलाफ गवाही देने के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि अब दिल्ली कमेटी में कांग्रेस समर्थक निजाम नहीं हैं, इसलिए बिना डरे गवाही देने के लिए आप आगे आऐं।

इस मामले में कमेटी द्वारा गवाहों को पूरा सहयोग दिया जायेगा। सिरसा ने सज्जन तथा टाईटलर के जल्द जेल जाने की बात करते हुए कहा कि अपनी बुलेट प्रूफ गाडिय़ों को छोड़ कर वो अब खाली कमरे में अकेले रहने की अभी से आदत डाल ले, क्योंकि तिहाड़ जेल उन्हें हर हाल में जाना होगा। 

विभिन्न जांच कमेटियों का सच 

 मारवाह आयोग को दिल्ली पुलिस की कारगुजारी की जांच का जिम्मा दिया गया था, परन्तु गृह मंत्रालय ने आयोग को जांच बंद करने का आदेश दे दिया था। इसी तरह ही जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग द्वारा दी गई रिपोर्ट को सामाजिक अधिकार संगठनों ने गलत बताते हुए आयोग पर तथ्यों को छुपाने का कथित आरोप लगाया था। कपूर-मित्तल कमेटी ने 72 पुलिस अधिकारियों को दंगों के लिए जिम्मेदार मानते हुए उसमें से 30 पुलिस अधिकारियों की बर्खास्तगी की मांग की थी। लेकिन किसी को भी सजा नहीं दी गई।

जैन-बैनर्जी कमेटी ने सज्जन कुमार के खिलाफ केस दर्ज करने की सिफारिश की थी लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकार ने सज्जन के साथी ब्रह्मानंद गुप्ता द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दर्ज की गई रोक की याचिका पर अपना कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। पोटी-रोशा कमेटी ने भी सज्जन कुमार के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। परन्तु जब सीबीआई सज्जन के घर गई तो सज्जन समर्थकों ने दंगा कर दिया। इसके अलावा जैन अग्रवाल कमेटी ने एचकेएल भगत, धर्मदास शास्त्री तथा जगदीश टाईटलर के खिलाफ केस दर्ज करने की सिफारिश की, लेकिन पुलिस ने कोई केस दर्ज नहीं किया।

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समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करे एसआईटी : सरना 

शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने आज यहां कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1984 के सिख दंगों के 186 मामलों की जांच के लिए सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में बनाई एसआईटी को समय बद्ध तरीके से जांच पूरी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में अनगिनत जांच कमीशन और कमेटियां बनाई जा चुकी है। लेकिन, आज तक किसी भी दोषी को सजा नहीं दी जा सकी। उन्होंने कहा कि बड़े अफसोस की बात है कि मोदी सरकार द्वारा फरवरी 2015 में तीन सदस्य एसआईटी 1984 के नरसंहार की जांच के लिए बनायी गई थी, जिसने 241 केसों को बंद कर दिया था और केवल 12 केसों में चार्जशीट दर्ज की थी। पिछली एस.आई.टी. टीमों की जांच का सिखों को जो तज़ुर्बा रहा है अत:नई एसआईटी से उम्मीद की जा रही है। 

सिख दंगों के आरोपियों को बचा रही कांग्रेस:भाजपा

सिख विरोधी दंगों के मामले ने फिर सियासी तूल पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने वीरवार को कहा कि कांग्रेस और भाजपा की सरकारों ने 1984 में हुए सिख कत्लेआम के आरोपियों को बचाने का काम किया है। 'आप' मुख्यालय में राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य संजय सिंह ने कहा, बड़े शर्म की बात है कि करीब 30 साल तक कांग्रेस और भाजपा इस नरसंहार के दोषियों को बचाने में लगी रही। दिल्ली में जब 'आप' की 49 दिनों की सरकार बनी थी, तब सीएम केजरीवाल ने निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का प्रस्ताव उपराज्यपाल को भेजा था। फरवरी 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद घबराई मोदी सरकार ने 13 फरवरी को आनन-फानन में एसआईटी गठित कर दी। दिल्ली पंजाबी अकादमी के उपाध्यक्ष जरनैल सिंह ने कहा कि इतने सालों में कितने गवाह मर गए। केंद्र सरकार अब बचे हुए गवाहों को सुरक्षा दे और सालभर में ट्रायल पूरा किया जाए। 

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