Monday, Jan 24, 2022
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अब वायु प्रदूषण के रियल टाइम सोर्स की मिलेगी जानकारी

  • Updated on 10/23/2021

-दिल्ली सरकार और आईआईटी कानपुर के बीच एमओयू पर हुए हस्ताक्षर
नई दिल्ली। अब आईआईटी कानपुर दिल्ली में वायु प्रदूषण के वास्तविक कारणों का अध्ययन कर पता लगाएगी। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और आईआईटी कानपुर के बीच शुक्रवार को वायु प्रदूषण के रियल टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

आईआईटी कानपुर 23 महीने में अध्ययन पूरी कर दिल्ली सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। दिल्ली के पार्यवरण गोपाल राय ने कहा कि भारत में पहली बार दिल्ली के अंदर तकनीक के माध्यम से वायु प्रदूषण के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए स्टडी होने जा रही है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार इस तरह की आधुनिक तकनीक से आधारित समाधान को लागू करने वाली पूरे देश में पहली राज्य सरकार है।


अध्ययन के जरिए हवा की गुणवत्ता की साप्ताहिक,मासिक और मौसम के हिसाब से विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके अलावा एनओएक्स,एसओटू,ओजोन, बीटीएक्स, मौलिक कार्बन,कार्बनिक कार्बन और अन्य कार्बनिक यौगिकों का पता करने के लिए अत्याधुनिक सुपरसाइट्स तैयार की जाएंगी।

दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की पहचान करने के लिए जगह-जगह मोबाइल वैन भी तैनात की जाएगी। रियल टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट परियोजना किसी भी स्थान पर वायु प्रदूषण में वृद्धि के कारणों की पहचान करने में मदद करेगी। वाहन,धूल,बायोमास जलने,पराली जलाने और उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण के वास्तविक समय के प्रभाव को समझने में मदद करेगी।

इसके बाद परिणामों के आधार पर दिल्ली सरकार प्रदूषण के स्रोतों पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। बता दें कि आईआईटी कानुपर के वैज्ञानिकों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समक्ष बीते फरवरी में प्रजेंटेशन दिया था। प्रजेंटेशन के बाद दिल्ली कैबिनेट ने इसे दिल्ली में लागू करने का निर्णय लिया था।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि वैसे तो इस बारे में कई अध्ययन हुए हैं, लेकिन दिल्ली में प्रदूषण के रियल टाइम स्रोत के बारे में सही-सही जानकारी नहीं है और अध्ययन से इस स्थिति के बारे में समाधान खोजने में मदद मिलेगी। पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 12 करोड़ रूपए की इस परियोजना में दिल्ली में किसी भी स्थान पर वायु प्रदूषण में वृद्धि के लिए जिम्मेदार कारकों की पहचान करने में मदद मिलेगी चाहे वे वाहनों के कारण हों, धूल, कचरा जलाना या उद्योगों से निकलने वाला धुंआ हो या किसी अन्य कारण से प्रदूषण हो रहा हो।

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