Thursday, Sep 23, 2021
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police commissioner sn srivastava chalked out special strategy amidst problems aljwnt

जज्बा है कायम, समस्याओं से क्या डरना

  • Updated on 5/31/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने पिछले साल नागरिक संशोधन कानून (सीएए) (CAA) के समर्थन में दिल्ली (Delhi) में हुए दंगों के बीच अपना पदभार ग्रहण किया था। लोगों से सीधे संवाद में माहिर एसएन श्रीवास्तव के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण माहौल था। 

इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से ही नहीं, आम लोगों से संवाद कर बड़े सफल तरीके से दिल्ली के माहौल को फिर से शांत कराया। इसी दौरान करोना महामारी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। इस चुनौती को उन्होंने दिल की पुलिस फार्मूला अपनाकर न सिर्फ पुलिस को आम लोगों के दिल की पुलिस बनाया, बल्कि लोगों के सामने पुलिस का एक नया चेहरा तैयार किया। 

फिर से उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिन्हें एक माह में पूरा करना ही सबसे बड़ी चुनौती होगा। इन चुनौतियों को पूरा करने के उद्देश्य से ही आयुक्त ने अपने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को जल्द से जल्द हाई प्रोफाइल मामलों का निष्पादन कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया है। ये वो मामले हैं जोकि सीधे रूप से पुलिस की छवि को प्रभावित कर रही है। इनमें प्रमुख रूप से दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार आरोपियों का चार्जशीट सौंपने के साथ ही। वर्तमान में टूलकिट मामला, छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर हत्या मामले में ओलंपिक पदक विजेता सुशील पहलवान की गिरफ्तारी और कोरोना महामारी के दौरान जीवन रक्षक ऑक्सीजन  दवाएं या कंसेंट्रेटर की कालाबाजारी मामला, जिसमें लगातार कई स्थानों पर कोर्ट ने भी जांच और पुलिस के दलीलों पर सवाल उठा दिए हैं। 

आयुक्त एसएन श्रीवास्तव अपना कार्यकाल पूरा होने के पूर्व इन तीस दिनों में ही इन मामलों की जांच पूरी करने के साथ ही एक पुख्ता त्रुटिहीन चार्जशीट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने की कवायद में हैं। इसके लिए वे खुद से इन मामलों की जांच का निरीक्षण कर रहे हैं। खासकर टूलकिट मामला जो सिर्फ आपराधिक ही नहीं, एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। वहीं अब भी दिल्ली दंगा मामले में भी कई आरोपियों की चार्जशीट अब तक पूरी नहीं हुई हैं, इसे तैयार करने में भी पुलिस काफी संयम और एहतियात बरत रही है। क्योंकि एक छोटी सी भी गलती दिल्ली पुलिस के साथ ही केंद्र सरकार की भी किरकिरी करा सकती है। क्या हैं  वो बड़ी चुनौतियां और क्या हैं पुलिस की तैयारियां इसी पर नवोदय टाइम्स के लिए संजीव यादव, मुकेश ठाकुर और शाहरुख खान की समीक्षात्मक रिपोर्ट

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दिल्ली पुलिस के लिए इम्तिहान की घड़ी, कुछ केस बढ़ा रहे मुश्किलें
कोविड महामारी के दौरान दिल्ली पुलिस भले ही दिल की पुलिस बनी गई हो,लेकिन कोविड की सुनामी के हल्का पड़ते ही दिल्ली पुलिस की मुश्किलें बढऩे वाली हैं। ये मुश्किलें उनके मूल कार्य, इस दौरान घटे अपराधों से जुड़ी जांचों से संबंधित हैं। हाल में दिल्ली पुलिस ने महामारी में कई बड़े हाईप्रोफाइल मामलों टूलकिट, पहलवान सागर हत्याकांड और लोधी कॉलोनी में मिले ऑक्सिजन कंसेंट्रेरटर की कालाबाजारी मामले का खुलासा करने के साथ ही इससे जुड़े कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी की है,लेकिन उसके बावजूद जांच में कई प्रमख प्वांट्स में बरती गई लापरवाही ने पुलिस को सोचने पर मजबूर किया है। कोर्ट में ही नहीं, सोशल मीडिया पर भी दिल्ली पुलिस की किरकिरी हो रही है। इसी का परिणाम है कि वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे रूप से निर्देशित किया गया है। वे अपने मूल काम अपराध नियंत्रण और उससे जुड़ी जांच पर बारीकी से ध्यान दें।  

ट्विटर-टूलकिट पर चार्जशीट में फंसी पुलिस
सबसे चर्चित मुद्दा है टूलकिट विवाद,जिसकी जांच दिल्ली पुलिस कर रही है। किसान आंदोलन में जिस तरह से टूलकिट को एक अहम हथियार बनाकर दिल्ली में दंगों की साजिश को रचने की बात का दावा दिल्ली पुलिस ने किया,उसके बाद से ही टूलकिट चर्चा में है। 

इसी के बाद से तय होनेे लगा कि सोशल मीडिया में इस्तेमाल टूलकिट के जरिए किसी भी बात को चर्चा में लाया जा सकता है,किसी भी मुद्दे को ज्वलनशील बनाया जा सकता है, या उसे नए तरीके से पेश किया जा सकता है। हालांकि उस पर केन्द्र नीति बना रही है,लेकिन पुलिस की मुश्किलें इस बात को लेकर बढ़ी हैं कि किसान आंदोलन में इस्तेमाल की गई टूलकिट  में पुलिस अभी तक  सबूत नहीं जूटा पाई है।

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बयानों में बदलाव से पुलिस की मुश्किल
गुरुग्राम में ट्वीटर के कार्यालय में मारे गए छापे के बाद दिल्ली पुलिस ने बयान जारी किया था कि ट्वीटर कार्यालय पर छापेमारी नहीं, बल्कि  सिर्फ नोटिस देकर जांच में शामिल होने को कहा था। ट्वीटर ने इस संबंध में बयान जारी कहा था कि  हम भारत एवं विश्व सिविल सोसाइटी के बहुत लोगों के साथ ग्लोबल सर्विस टर्म को लागू करने पर पुलिस द्वारा डराने-धमकाने की रणनीति और नए आईटी रूल्स के मूल भावनाओं को लेकर चिंतित हंै इसलिए हमने कुछ हैशटेग को मैनिपुलेटेड टैग लगाए थे। 

ट्विटर का बयान सही नहीं :  दिल्ली पुलिस 
ट्विटर के इस बयान पर दिल्ली पुलिस ने इसे वैध जांच को बाधित करने और सहानुभूति पाने की कोशिश बताते हुए कहा था कि पहली नजर में यह सारे बयान झूठे हैं बल्कि जांच में बाधा डालने के लिए तैयार किए गए हैं। एक अधिकारी के अनुसार वह जांच एजेंसी और निर्णय देने वाली अथॉरिटी बनने की इच्छा रखने लगा है। ट्विटर काल्पनिक डर का व्यापार करने तथा जांच से बचने के लिए इस प्रकार के बयान जारी कर रहा है। जो सही नहीं हैं।

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मीडिया में पुलिस बयान से संबंधित कानून
सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ विभिन्न हाईकोर्टों ने भी बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि जांच के बीच में पुलिस को मीडिया में आरोपी के बारे में बयान देने से बचना चाहिए। हाल ही में हाईकोर्ट ने इसी के लिए पुलिस को फटकार लगाई थी जब पुलिस ने दिल्ली दंगों में आरोपी देवांगना कलिता के केस में अपना कमेंट पास किया था। इसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जांच के बीच पुलिस या कोई भी एजेंसी आरोपी के खिलाफ  मीडिया ट्रायल का प्रयोग नहीं कर सकती।

साइंटिफिक सबूत के सहारे सुशील को हत्यारा साबित करने की कवायद
नई दिल्ली,30 मई (शाहरुख खान): छत्रसाल स्टेडियम में सागर पहलवान मर्डर मामले में (धारा 302) और गैर इरादतन हत्या ( 304) को लेकर अब भी जद्दोजहद चल रही है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच हर वो टेक्निकल और साइंटिफिक सबूत जुटाना चाहती है, जिससे इसे हत्या साबित किया जा सके। दूसरी तरफ पहलवान सुशील कुमार की लीगल टीम अब तक बाहर आई जांच की जानकारियों के आधार पर इसे गैर इरादतन हत्या करार देने के लिए माथा-पच्ची कर रही है। सुशील की तरफ से पहले दो गुटों की लड़ाई में बीच-बचाव करने का तर्क दिया जा रहा था। लेकिन अब वीडियो वायरल होने के बाद उनका पूरा जोर पुलिस की थ्योरी की काट ढूंढकर इस केस को गैर इरादतन हत्या में तब्दील कराने पर दिख रहा है। हालांकि इस हत्याकांड में क्राइम ब्रांच जल्द से जल्द कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करेगी।

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शुरुआती जांच में पुलिस के पास सबूत
सीनियर अफसरों के मुताबिक, शुरूआती जांच में सुशील समेत 9 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में सबूत पेश करने के लिए पुलिस के पास घटना के वक्त बनाई गई मोबाइल में वीडियो,एफएसएल की रिपोर्ट,सागर धनकड़ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, करीब 30 से ज्यादा गवाह,सुशील का स्टेटमेंट, सभी आरोपियों के मोबाइल नंबर की सीडीआर,सोनू महाल समेत घायलों के स्टेटमेंट,क्राइम सीन का रिक्रिएशन, अब तक गिरफ्तार सभी आरोपियों के बयान, घटना स्थल पर वारदात के वक्त मोबाइल लोकेशन का रिकॉर्ड, स्टेडियम में पहलवानी करने आने वाले 10-12 लोगों के स्टेटमेंट,वारदात के बाद घटना स्थल पर पहुुंचे स्टाफ  का स्टेटमेंट,एलएसएल टीम द्वारा मौके से जुटाए गए एविडेंस के अलावा बरामद की गई पांच गाडिय़ां और डबल बैरल गन शामिल हैं।  

जुटाने हैं ये सबूत
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट मयंक गोयल की अदालत में पुलिस ने बताया कि सुशील हत्याकांड का मास्टर माइंड है। अभी सुशील से कई चीजों को बरामद करना है। 

पुलिस ने कहा कि सुशील जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। 4 मई को घटना वाली रात छत्रसाल स्टेडियम के बाहर पार्किंग एरिया से पुलिस ने जो पांच कारें बरामद की थी, उनमें अब तक एक गाड़ी के बारे में ही पता लग पाया है। 

आमने-सामने पूछताछ
 शनिवार को अदालत ने चार दिन की रिमांड पर सुशील को पुलिस को सौंप दिया है। हत्या के इस मामले में अभी 9 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें से आठ आरोपी अभी पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस इन सभी आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगी।  इसके अलावा उनके अन्य साथी कौन-कौन थे, जो वारदात के बाद से फरार हैं, ऐसे लगभग दर्जन भर आरोपियों की तलाश पुलिस कर रही है।

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