Thursday, Aug 11, 2022
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जल्द ही दिल्ली के नन्हे मुन्हों को मिलने वाला है उनका सबसे बड़ा चिल्ड्रन पार्क

  • Updated on 5/29/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/'टीम डिजिटल। अब जल्द ही यमुनापार के त्रिलोकपुरी इलाके में स्थित डीडीए के संजय लेक पार्क में दिल्ली का सबसे बड़ा चिल्ड्रन पार्क बनने जा रहा है। जो कि इंडिया गेट में मौजूदा  चिल्ड्रेन पार्क से भी बहुत बड़ा होगा।

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डीडीए के एक सीनियर अफसर ने अनुसार यमुनापार एरिया  में संजय लेक पार्क उसका सबसे बड़ा पार्क माना जा रहा है। जिसमें करीब 50 एकड़ झील बनी हुई है। इसमें पहले कभी बोटिंग की जाती थी लेकिन धीरे - धीरे झील के गंदे होने की वजह से वहां बोटिंग रूक गई। लोगों ने पार्क के कई हिस्सों को कुडेदान की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। लेकिन अब इसे  रेनोवेट किया जा रहा है।

वही , इसके साथ ही पायलट प्रॉजेक्ट के तहत पहले चरण में पार्क के 19 एकड़ लैंड को डिवेलप किया जा रहा है। यह लगभग अपने अंतिम चरण पर  है। यहां लोगों के सैर करने के लिए वॉक - वे और साइकिल ट्रैन बनाने के साथ - साथ झील के किनारों को भी सुंदर और आकर्षक बनाया गया है। यहां की करीब पांच एकड़ जमीन पर चिल्ड्रेन पार्क बनाया जाएगा। जिसके लिए यह उम्मीद की जा रही है कि यहां बच्चों को अधिक से अधिक झूले और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें, ताकि बच्चों का यहां बार - बार आने का मन करें। इस पार्क को लेकर महज 6 महीने में पूरा काम कर लिया जाएगा।


इतना ही नहीं यहां 2 ओपन जिम बनाए जा रहे है। 1 ओपन जिम लगभग तैयार हो चुका है। वहीं,दूसरा भी जल्द ही बना  लिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि झील की गंदगी को दूर करने के लिए गंभीरता के साथ प्रयास किए जा रहे है। जल्द ही इसके रिजल्ट भी सामने होंगे,जब लोग यहां बोटिंग करते दिखाई देंगे। पार्क की दीवारों  को भी सुंदर  ग्रैफिटी के जरिए खूबसूरत बनाया जा रहा है। चूंकि  इस पार्क को फोरेस्ट एरिया घोषित किया गया है, इस वजह से यहां कंक्रीट की बहुत गतिविधि नहीं की जा सकती है। ऐसे में यहां अधिकतर काम लकड़ी से किया जा रहा है।जगह - जगह लकड़ी के  शेल्टर बनाए जा रहे है।

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इसके साथ ही डीडीए का कहना है कि यमुनापर में संजय लेक पार्क में बड़ा डीडीए का कोई अन्य पार्क नहीं है। डीडीए कोशिश कर रहा है कि यहां पल्यूशन न फैलाते हुए लोगों को अधिक से अधिक सुविधाएं दी जा सकें। अभी केवल बोटिंग का मामला झील के गंदा होने से अटका पड़ा है। बाकी अन्य काम लगभग पूरा चुके हैं। यहां तीन किलोमीटर का साइकिल ट्रैक भी बनाया जा रहा है। घूमने फिरने के लिए अलग से एक ट्रैक भी तैयार किया जाएगा। 

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