Friday, Jul 01, 2022
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वैचारिक लड़ाई का अखाड़ा न बने विश्वविद्यालय : अमित शाह

  • Updated on 5/19/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। विश्वविद्यालयों को हिंसा और वैचारिक लड़ाई का अखाड़ा नहीं होना चाहिए। संघर्ष की जगह विमर्श को स्थान मिलना चाहिए। आइडियोलॉजी के लिए लडऩे की जरूरत नहीं होती बल्कि विचार और विमर्श से ही आइडियोलॉजी आगे बढ़ती है और युगों-युगों तक चलती है। यह बाते गृहमंत्री अमित शाह ने वीरवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में राजनीतिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्यअतिथि कहीं। स्वराज से नवभारत तक विचारों का पुनरावलोकन विषय पर इस तीन दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन शताब्दी समारोह के हिस्से के रूप में किया जा रहा है। उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्ष डीयू कुलपति प्रो.योगेश सिंह ने की।

चाहे थोड़ा अधिकार मिले, लेकिन अपने दायित्वों की चिंता करें
शाह ने युवाओं से आह्वान किया कि चाहे थोड़ा अधिकार मिले, लेकिन अपने दायित्वों की चिंता करें। जब अपने दायित्वों की चिंता करेंगे तो किसी के अधिकारों की रक्षा स्वयं हो जाएगी। युवाओं आह्वान किया कि वे संघर्ष का रास्ता छोड़ कर दायित्वों का रास्ता अपनाएं। विश्वविद्यालयों के महत्व को बताते हुए कहा कि जब भी परिवर्तन होते हैं,तो उनके वाहक विश्वविद्यालय होते हैं। युग परिवर्तन में विश्वविद्यालयों का विशेष महत्व रहा है। डीयू के संदर्भ में कहा कि आज डीयू 100 साल बाद भी अपनी प्रासंगिता को बनाए रखे है,जो बड़ी बात है। इसके लिए उन्होंने डीयू के पहले कुलपति हरी सिंह गौड़ से लेकर वर्तमान कुलपति प्रो.योगेश ङ्क्षसह सहित सभी को बधाई दी।

नरेंद्र मोदी की सरकार से पहले, भारत के पास कोई रक्षा नीति नहीं थी
शाह ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से पहले, भारत के पास कोई रक्षा नीति नहीं थी। अगर थी भी तो वह विदेश नीति की महज एक परछाई मात्र थी। पहले, आतंकवादी हम पर हमला करने के लिए भेजे जाते थे और उरी तथा पुलवामा हमलों में भी ऐसा ही करने की कोशिश की गई, लेकिन हमने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से दिख दिया कि हमारी रक्षा नीति के क्या मायने हैं। नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में उत्तरपूर्व के 75 प्रतिशत हिस्से से अफसपा को हटाने की चर्चा करते हुए कहा कि कभी लोग कहा करते थे कि धारा 370 हटाने से खून की नदियां बह जाएगी जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने चुटकी बजाकर उसे हटा दिया और किसी की कंकड चलाने की भी हिम्मत नहीं हुई। शाह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भविष्य के भारत का उज्जवल दस्तावेज है। यह पहली शिक्षा नीति है जिसका कोई विरोध नहीं कर पाया।

डीयू को भविष्योन्मुखी पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए :प्रधान
कार्यक्रम के दौरान अपने सम्बोधन में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सुझाव दिया कि डीयू को छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए भविष्योन्मुखी पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए। प्रधान ने कहा डीयू अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है और हम भारत की आजादी का अमृत महोत्सव बना रहे है यह एक संयोग ही है। उन्होने कहा समय बदल रहा है। डीयू पेटेंट प्रक्रिया पर अल्पकालिक डिप्लोमा कोर्स  शुरू कर सकता है। इससे छात्र न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार हासिल करने में सक्षम होंगे। आज प्रौद्योगिकी का अधिक प्रवेश हुआ है, नयी चीजों का सृजन हो रहा है, हमारे देश में अनुसंधान हो रहा है लेकिन उस अनुपात में पेटेंट नहीं हो रहा है।       शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘ क्या डीयू पेटेंट प्रक्रिया पर अल्पकालिक कोर्स चला पायेगा, क्या ब्लाक चेन एकाउंङ्क्षटग पर नया पाठ्यक्रम तैयार कर पायेगा, क्या ई कामर्स पर नया कोर्स तैयार कर पायेगा? दिल्ली विश्वविद्यालय को अपने यहां भविष्योन्मुखी कोर्स जोडऩा चाहिए।

1977-80 बैच का छात्र चाहत है डिग्री पूरी करना :डीयू वीसी
डीयू कुलपति ने स्वागत भाषण में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री का डीयू परिसर में आना विश्वविद्यालय के इतिहास में एक स्वर्णित दिन है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में ही विचार तैयार होते है और उन्हें लागू किया जाता है। इसी कड़ी में डीयू शताब्दी वर्ष में उन छात्रों को डिग्री पूरी करने का मौका दे रहा है,जो किसी कारण से उस समय अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाए थे। उन्होंने बताया कि इसमें 1560 छात्रों ने अपना पंजीकरण कराया,जिनमें सबसे पुराना विद्यार्थी बीकॉम का 1977-80 बैच का एआरएसडी कॉलेज से है।

 

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