Thursday, Aug 11, 2022
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आरएमएल,सफदरजंग और लेड़ी हार्डिंग के रेजिडेंट डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन

  • Updated on 11/27/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। तीन केंद्रीय अस्पतालों - आरएमएल, सफदरजंग और लेडी हाॢडंग - के रेजिडेंट डॉक्टरों ने नीट-पीजी 2021 काउंसङ्क्षलग आयोजित करने में बार-बार हो रही देरी के विरोध में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) की सेवाएं शनिवार को रोक दीं।  यह कदम फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोरडा) द्वारा 27 नवंबर से अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं को रोक देने के लिए एक राष्ट्रव्यापी आह्वान के बाद उठाया गया है।      राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने अस्पताल प्रशासन को लिखे पत्र में कहा, जारी कोविड-19 महामारी के कारण, नीट पीजी 2021 में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश अनिश्चित काल के लिए विलंबित हो गया है। रेजिडेंट डॉक्टर पिछले डेढ़ वर्षों में कोविड और गैर-कोविड दोनों सेवाओं को अथक रूप से आगे बढ़ा रहे हैं और शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से थक गए हैं।   

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नीट पीजी काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग
चिकित्सकों के संघों ने सरकार और शीर्ष अदालत से नीट पीजी काउंसङ्क्षलग और प्रवेश प्रक्रिया में तेजी लाने और अदालती कार्यवाही को तेज करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की। अखिल भारतीय आयुॢवज्ञान संस्थान (एम्स) आरडीए ने भी इस मुद्दे पर समर्थन व्यक्त करते हुए भारत सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और काउंसङ्क्षलग प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। उसने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि नीट-पीजी 2021 काउंसङ्क्षलग में अनिश्चित काल के लिए देरी हो रही है, इस तथ्य के बावजूद कि प्रवेश परीक्षा के परिणाम घोषित हुए लगभग दो महीने से अधिक का वक्त हो गया है।  आमतौर पर कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही में होने वाली प्रवेश परीक्षा कोविड-19 महामारी के परिणामस्वरूप पहले ही कई महीनों तक विलंबित हो चुकी थी। एम्स आरडीए ने एक बयान में कहा कि इस अत्यधिक देरी से पूरे भारत के मेडिकल कॉलेजों में श्रम शक्ति की कमी हो गई है।  बयान में कहा गया, हजारों स्नातकोत्तर सीटें इस साल रिक्त रह जाएंगी अगर काउंसङ्क्षलग टलती रही। दुनिया के कई देशों में कोविड-19 के मामले बढऩे के साथ, यह जरूरी है कि हमारा देश वैश्विक महामारी की एक और लहर के लिए तैयार रहे। इसमें कहा गया, रेजिडेंट डॉक्टरों के मौजूदा कार्य बल पर पहले से ही अधिक बोझ है, जिसका स्वास्थ्य सेवाओं के सर्वोत्तम वितरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए रेजिडेंट डॉक्टरों के नए बैच की प्रवेश प्रक्रिया बिना किसी और देरी के पूरी की जानी चाहिए।
 
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