Tuesday, Nov 30, 2021
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World Antimicrobials Resistance Week concludes

वर्ल्ड एंटीमाइक्रोबियल्स रेजिस्टेंस वीक का समापन

  • Updated on 11/24/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  एंटीमाइक्रोबियल दवाओं से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सिर्फ इन दवाओं के प्रति डॉक्टरों, नीति निर्माताओं और आम लोगों में जागरूकता फैलाना ही पर्याप्त नहीं है। यह मानना है इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (आयुष)का।  एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आर. पी.  पाराशर ने वल्र्ड एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस अवेयरनेस वीक के समापन के अवसर पर कहा कि एंटीमाइक्रोबॉयल दवाओं के प्रति बैक्टीरिया व अन्य रोगाणुओं में बढ़ती रेजिस्टेंस से निपटने के लिए आवश्यक है कि इन दवाओं के बजाय संक्रमण की चिकित्सा हेतु आयुर्वेदिक व यूनानी दवाओं के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए आवश्यक है कि आयुर्वेदिक व यूनानी दवाओं को भी कल्चर एंड सेंसटिविटी टेस्ट और सीरियल प्रोकैल्सीटोनिन टेस्ट में शामिल किया जाए। डॉ पाराशर के अनुसार आयुर्वेदिक व यूनानी दवाएं संक्रमण से निपटने में पूर्णत: सक्षम हैं। इनके प्रयोग से शरीर में तो कोई दुष्प्रभाव उत्पन्न होता ही नहीं है,  ये दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान आयुर्वेदिक दवाओं की उपयोगिता सिद्ध हो चुकी है।

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18 से 24 नवंबर तक मनाया जाता है वल्र्ड एंटीमाइक्रोबियल्स रेजिस्टेंस वीक
एंटीमाक्रोबियल दवाओं के दुष्प्रभाव के चलते होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने के लिए हर साल 18 से 24 नवंबर तक वल्र्ड एंटीमाइक्रोबियल्स रेजिस्टेंस वीक (विश्व रोगाणुरोधी प्रतिरोध सप्ताह) मनाया जाता है। एंटीमाइक्रोबॉयल दवाओं में एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल और एंटीवायरल दवाओं के अलावा परजीवियों (पैरासाइट्स) के इलाज में होने वाली दवाएं शामिल हैं। पहले सिर्फ  एंटीबायोटिक  रेजिस्टेंस पर ध्यान केंद्रित किया गया था लेकिन 2015 से इस मुहिम में सभी एंटीमाइक्रोबियल दवाओं को सम्मिलित कर लिया गया है।

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एंटीबायोटिक्स के अनावश्यक और अंधाधुंध प्रयोग के कारण विश्व भर में सालाना होती लाखों मौत
अकेले एंटीबायोटिक दवाओं के प्रयोग से लाखों लोगों को मौत के मुंह से बचाया जाता है लेकिन यह भी सत्य है कि एंटीबायोटिक्स दवाओं के अनावश्यक और अंधाधुंध प्रयोग के कारण विश्व भर में हर साल सात लाख लोग मौत के मुंह में चले जाते हैं। यदि एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के अनावश्यक प्रयोग को नहीं रोका गया तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार सन् 2050 तक यह संख्या बढक़र एक करोड़ तक जा सकती है। एंटीबायोटिक दवाओं की तरह ही एंटीफंगल और एंटीवायरल दवाओं के फायदों के साथ-साथ नुकसान भी हैं और इनके अनावश्यक प्रयोग से शरीर में अनेक रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

 

 

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