Thursday, Sep 23, 2021
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सीआर पार्क में रोड ‘गायब’ ढूंढने वाले को 10 हजार ईनाम

  • Updated on 4/18/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/ब्यूरो। अब तक सामान व व्यक्ति आदि के गायब होने की शिकायतें थानों में पहुंचती रही हैं, लेकिन जब कोई सड़क के ही गायब होने की शिकायत दर्ज कराई जाए तो अजीब लगता है। मामला साऊथ दिल्ली के सीआर पार्क थाने का है, जहां दी गई शिकायत में 2014 से एक सड़क गायब है। दिलचस्प बात यह है कि इस सड़क को खोजने वाले को आरडब्ल्यूए की तरफ से दस हजार रुपए का ईनाम देने की भी घोषणा की गई है।

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पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि शहीद सूर्यसेन मार्ग से सुदर्शन मंजाल रोड को जोडऩे वाली करीब डेढ़ किलोमीटर लम्बी सड़क पिछले तीन साल से लापता है। रविवार को अलकनंदा, सीआर पार्क और गे्रटर कैलाश टू के आरडब्ल्यूए के सदस्य इसी सड़क की तलाश में एक निकल पड़े थे।

इन लोगों का कहना है कि कोर्ट को सौंपे गए मैप में दिखायी गई सड़क महज कागजों पर है। लोग उस सड़क को खोजने के प्रयास में जुटे हुए हैं, जो डीडीए के जोनल प्लान एफ 19 में दिखाई गई है। यहां तक तो सब कुछ ठीक है, लेकिन पुलिस के लिए चिंता की बात यह है कि अभी तक तो वह बदमाशों की धरपकड़ का काम करती थी, लेकिन सड़क के गायब होने की शिकायत मिलने पर पुलिस भी हैरान परेशान है। 

सीआर पार्क में मॉल बनाने की है डीडीए की योजना
सीआर पार्क में मॉल बनाने की डीडीए की योजना अब उसके गले में ही फांस बनती जा रही है। डीडीए ने जिस जमीन को सड़क बताते हुए मॉल बनाने के लिए चिन्हित करते हुए अपना प्रस्ताव तैयार किया है। उस जमीन को तलाशने के लिए स्थानीय आरडब्ल्यूए की तरफ से पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। जानकारी के अनुसार लगभग 3.6 एकड़ जमीन को प्राइवेट डेवलपर को करीब 304 करोड़ रुपये में फ्रीहोल्ड लीज पर दिया गया।

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इस जमीन पर मॉल बनाए जाने के खिलाफ स्थानीय आरडब्ल्यूए पिछले वर्ष दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुकी है। उस समय डीडीए ने पूरे मामले में अंतिम निर्णय के लिए कोर्ट के समक्ष दो सदस्य पैनल बनाए जाने की बात बताई थी। जिसके बाद पैनल से भी लोगों ने मुलाकात की थी। डीडीए के अधिकारी का कहना है कि यह योजना कुछ समय पहले बनाई गई थी। फिलहाल डीडीए ने इस मामले में अभी कुछ भी बोलने से इंकार किया है।

डीडीए अधिकारी का कहना है कि वर्ष 2007 में यह योजना बनाई थी। जिस पर कुछ समय पूर्व मंजूरी मिली थी। डीडीए सूत्रों का कहना है कि जहां तक जमीन अथवा सड़क की बात है, उसके लिए जमीन का भू-उपयोग भी परिवर्तित किया गया है। ऐसे में सामुदायिक कार्य के लिए रखी गई जमीन को मॉल के रूप में उपयोग किया जा सकता है। 

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