Tuesday, Feb 18, 2020

लैंड पूलिंग पॉलिसी: 77 हजार एकड़  में बनेंगे आशियाने

  • Updated on 5/19/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/रोहित राय।  लैंड पूलिंग पॉलिसी के प्रभाव से करीब पांच साल बाद वर्ष 2022 तक दिल्ली में 20 लाख से ज्यादा फ्लैट बनाए जा सकेंगे। इससे आम लोगों के अपने अशियाने का सपना पूरा होगा। डीडीए का दावा है कि इस नीति के तहत जो विकास होगा वह छोटे भूखंड मालिकों के लिए भी फायदेमंद होगा।

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उत्तरी दिल्ली के 50 गांव तथा दक्षिणी दिल्ली के 39 गांवों को शहरीकृत गांवों का दर्जा दिया गया है। इन इलाकों को शहरीकृत ग्रामीण इलाके का दर्जा मिला है। इसके बाद अब लैंड पूलिंग योजना के तहत किसान से डेवलपर सीधा समझौता करके जमीन पर विभिन्न योजनाओं से जुड़े प्रोजेक्ट को सरकारी मंजूरी से अंजाम दे सकेंगे।

जना के तहत दिल्ली सरकार को दिए जाने और स्टांप ड्यूटी को माफ करने की भी योजना है। इसके लिए किसान, प्रमोटर या डेवलपर द्वारा पेश किए गए नक्शे की जांच स्थानीय अधिकारी (पटवारी एवं लेखपाल) के जरिए कराई जाएगी जिसमें नक्शा सही पाए जाने पर ही यह लाभ मिलेगा। योजना में छोटे किसानों को राहत दी जाएगी। राहत के तहत डेवलपर अथवा प्रमोटर द्वारा प्रक्रिया के तहत आने वाले खर्च का वहन किया जा सकेगा। वर्ष 2022 तक सबको आवास देने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को भी साकार होने में यह फैसला काफी मददगार साबित होगा।

पिछले दिनों इसी मसले पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने विभिन्न निकायों और दिल्ली सरकार के साथ बैठक की थी जिसमें इन गांवों को शहरी दर्जा देने के संबंध में आगे की प्रगति को लेकर बात हुई थी। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने डीडीए की नई लैैंड पूङ्क्षलग नीति को पांच संशोधनों के साथ मंजूरी दी थी। उसके बाद से गांवों को विकासशील क्षेत्र और शहरी गांव घोषित किए जाने का इंतजार किया जा रहा था पिछले वर्ष अक्तूबर में इन गांवों का मालिकाना हक राजस्व विभाग से दिल्ली सरकार को स्थानांतरित करने के लिए सर्कूलर भी जारी किया गया था।  

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जमीन मालिक को साझेदार बनाने का है प्रावधान 
डीडीए के मुताबिक नई लैंड पूलिंग योजना के तहत विकास में जमीन मालिकों को साझेदार बनाने का प्रावधान है तथा इसको दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी 20 हेक्टेयर और इससे अधिक भूमि तथा दूसरी श्रेणी 20 हेक्टेयर से कम की भूमि के लिए है। दिल्ली के कुल जिन गांवों को लैंड पूङ्क्षलग पॉलिसी में शामिल किया जाएगा।

इनमें मुख्य रूप से द्वारका, नजफगढ़, महरौली, छतरपुर, घिटोरनी, बमनोल, फतेहपुर और पश्चिम दिल्ली के कुछ गांव व उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कुछ गांव शामिल हैं। जोन जे, जोन-के1, के2 जोन, जोन एल, जोन एन, जोन पी1 व पी2 शामिल है। इन सभी जोनों से डीडीए तकरीबन 77 हजार एकड़ जमीन की पूलिंग करेगा। 

दो तरह की होगी पॉलिसी
हाउसिंग सोसायटी और फ्लैट बनाने के लिए छोटे किसानों का ध्यान रखते हुए एक अलग पॉलिसी होगी। इसमें एक या कई किसान एकत्रित होकर अपनी 5 से 50 एकड़ तक की जमीन डीडीए को देंगे। डीडीए उसमें से 52 फीसदी जमीन पर बिजली, पानी और सीवर लाइन जैसी मूलभूत सुविधाएं डेवलप करेगा। बाकी 48 फीसदी जमीन डेवलपर्स को फ्लैट बनाने के लिए दी जाएगी।

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इसमें पांच फीसदी कमर्शल और तीन प्रतिशत इंडस्ट्रियल विकास के लिए रिजर्व रहेगी।दूसरी पॉलिसी 50 एकड़ से 100 एकड़ तक के बड़े प्लॉट के लिए होगी। इस प्रक्रिया में डीडीए 60 प्रतिशत जमीन डेवलपर को वापस करेगा। बाकी जगह मूलभूत जरूरतों को पूरा करके डेवलपर को लौटाई जाएगी ताकि यहां अवैध कॉलोनियों जैसा हाल ना होने पाए और लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत योजनाबद्ध तरीके से विकास हो सके। डीडीए का कहना है कि किसान जो जमीन उसे देंगे, जरूरी नहीं कि वही जमीन उन्हें लौटाई जाए। उनकी जमीन के पांच किमी के दायरे में जमीन उन्हें दी जाएगी। 

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