Monday, Dec 06, 2021
-->

17 दिन मेें तैयार चार्जशीट ने दिलाई फांसी की सजा

  • Updated on 5/6/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/हरीराम गुप्ता। निर्भया गैंगरेप के आरोपियों तक पहुंचने में दिल्ली पुलिस ने जिस ईमानदारी से काम किया उसकी सराहना खुद सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सार्वजनिक कर दिया है। मात्र 17 दिन में ही 3 जनवरी को पुलिस की तरफ से 60 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी गई।

फ्लॉप साबित हो रही है निर्भया फंड योजना

यह चार्जशीर्ट डिस्ट्रिक कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक आरोपियों को फांसी तक पहुंचाने में मददगार साबित हुई। निर्भया केस में अपनाई गई जांच प्रक्रिया और मिली कामयाबी अब दिल्ली पुलिस में आने वाले नए पुलिसकर्मियों के लिए पढ़ाई का एक अध्याय बन गया गया है। दिल्ली पुलिस की इस चार्जशीट को ट्रेनिंग के दौरान पुलिसकर्मियों को पढ़ाया जाने लगा है। 

तत्कालीन पुलिस उपायुक्त छाया शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आया फैसला दिल्ली पुलिस द्वारा ईमानदारी से काम करने का ईनाम है। आज दिल्ली पुलिस को उस मामले में कामयाबी मिली है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर थी। ज्ञात रहे 16 दिसम्बर के आरोपियों तक पहुंचना दिल्ली पुलिस के लिए टेढ़ी खीर था।

12 इंस्पेक्टर के नेतृत्व में गठित 126 पुलिसकर्मियों की टीम ने अलग-अलग इलाकों में दबिश देना शुरू कर दिया। दिल्ली होटल से घटना वाले दिन की रात करीब पौने दस बजे का एक सीसीटीवी फुटेज बरामद हुआ, जिसमें एक सफेद रंग की चार्टर्ड बस दिखाई दी और उस पर यादव लिखा हुआ था।

उस वारदात की सोच कांप जाती है हर लड़की 

पुलिस ने ट्रांसपोर्ट विभाग से ऐसे वाहनों की लिस्ट मांगी और करीब 315 बसों का अध्ययन किया। अगले दिन बस को आरके पुरम इलाके से बरामद कर राम सिंह को दबोच लिया गया। राम सिंह की निशानदेही पर 18 दिसम्बर को मुकेश को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया गया। 18 की शाम को ही पवन और विनय को भी औरंगाबाद से दबोच लिया गया। 19 दिसम्बर को नाबालिग को पकड़ा गया और 21 दिसम्बर को औरंगाबाद से अक्षय को पकड़ लिया गया। 5 दिनों के भीतर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए पांच राज्यों की खाक छाननी पड़ी।

एसीपी राजेंद्र सिंह रेड टीम की अगुवाई कर रहे थे। उनके अनुसार लोगों का गुस्सा भड़का हुआ था और पुलिसवाले भी निशाना बनाए जा रहे थे। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय की तरफ से गठित की गई तीन जांच कमेटी का भी सामना कर पड़ रहा था। ऐसी विषम परिस्थितियों में काम करना काफी कठिन हो रहा था। पुलिस उपायुक्त छाया शर्मा, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त प्रमोद कुशवाहा के हौसले से इन आरोपियों के खिलाफ सुबूत इकट्ठा करने में मदद मिली।

 एलजी ने नगर निगम में नए गठन की प्रक्रिया  को मंजूरी दी

फोरेंरिक रिपोर्ट से लेकर अन्य तकनीकी साक्ष्य सब कुछ आरोपियों के खिलाफ जा रहे थे। दिल्ली पुलिस की कोशिश थी कि जल्द से कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर आरोपियों की सजा मुकर्रर कराई जा सके। मात्र 17 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर पुलिस ने आरोपियों को फांसी तक पहुुंचाने की कहानी लिख दी। 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.