Wednesday, May 12, 2021
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नकदी की किल्लत से कराह रहा प्लास्टिक उद्योग

  • Updated on 12/7/2016

Navodayatimesनई दिल्ली, (मनोज मिश्र): नोटबंदी और मनी क्राइसिस से प्लास्टिक उद्योग कराह रहा है। नोटबंदी और मनी क्राइसिस के कारण प्लास्टिक कारोबार 50 फीसदी तक सिमट कर रह गया है। वहीं कारोबार कम होने के कारण प्लास्टिक कंपनियों में काम करने वाले 2 लाख मजदूरों पर रोजी-रोटी का संकट मंडरा रहा है। 

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उद्मियों के अनुसार प्लास्टिक का पूरा  कारोबार कैश पर होता है। बाहरी दिल्ली के बवाना औद्योगिक क्षेत्र में करीब 10 हजार प्लास्टिक की छोटी- बड़ी कंपनियां है। इनमें 5000 कंपनियां प्लास्टिक दाना बनने वाली और 3000 हजार के करीब प्लास्टिक का सामान बनने वाली कंपनियां है।

प्लास्टिक दाना बनाने वाली कपंनियों के पास कबाड़ी टूटी-फूटी प्लास्टिक लेकर आते है। जिन्हें पैसा देने के लिए उद्मियों के पास नकदी का गहरा संकट है। वहीं मनी क्राइसिस के कारण कपंनिया भी बाहर से मॉल न तो मगां रही है और न ही भेज रहे है।

ऐसे होता है कैश में कारोबार: उद्मियों ने बताया कि प्लास्टिक का टाने बनने के लिए मॉल कबाडिय़ों से खरीदा जाता है और उन्हें इसका भुगतान कैश के जरिए होता है। वहीं प्लास्टिक का सामान ले जाने वाले कारोबारी भी उन्हें कैश में ही भुगतान करते है,क्योंकि उन कारोबारियों से छोटे-छोटे दुकानदार और रेड़ी-पटरी वाले सामान लेते है,जो उन्हें कैश के रूप में ही पैसों का भुगतान करते है।

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इन राज्यों में जाता है यहां से प्लास्टिक का सामान: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बंगाल, उड़ीसा, केरला, महाराष्ट्र और बिहार सहित कई राज्यों को यहां से प्लास्टिक के बने सामान जाते है। 

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