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ईश्वर को पूरी वास्तविकता से पहचानने वाले आदि शंकराचार्य का जन्मदिन, पालघर के संतों के लिए भी जले दीप

  • Updated on 4/28/2020

नई दिल्ली टीम डिजिटल। हिंदु धर्म (hindu dharm) की कुरीतियों को दूर करके पूरी वास्तविकता के साथ ईश्वर को पहचानने वाले आदि शंकराचार्य का जन्मदिन वैसाख पंचमी को पूरे देश में मनाया गया। हालांकि लॉक डाउन है और मंदिरों के कपाट बंद हैं। लिहाजा घरों में ही पूजन के साथ शंकराचार्य (shankara charya) के जन्मदिन को मनाया गया। इसी मौके पर अचानक तेजी से वायरल हुए मैसेज को देखते हुए कई सारे लोगों ने पालघर में हाल ही में मारे गए संतों के लिए भी दीपक जलाए गए।

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भगवान शिव के अवतार थे आदि शंकराचार्य
आदि शंकराचार्य को भगवान शिव का ही अवतार माना जाता है। उन्होंने पूरे देश में घूम-घूम कर हिंदु धर्म में आई कठिनाइयों को दूर किया। आदि शंकराचार्य से जुड़ी दंत कथाओं में उनके वायू मार्ग से जाने, अपना शरीर छोड़कर एक राजा के शरीर में प्रवेश करने सरीखे कई चमत्कारों का वर्णन किया जाता है। मगर इनका कोई प्रमाण नहीं है। आदि शंकराचार्य ने सिर्फ 9 साल की आयु में सन्यास ले लिया था और सिर्फ 32 वर्ष की आयु में शरीर छोड़ दिया।

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हिंदु धर्म को दोबारा स्थापित करने वाले थे शंकराचार्य
इसी छोटे से अंतराल में उन्होंने हिंदु धर्म पर आई कई मुसीबतों का आसानी से संभाल लिया। जिस दौर में आर्य समाज, जैन धर्म, बौद्ध धर्म आदि नए-नवेले मत और संप्रदाय हिंदु धर्म की कुरीतियों और विसंगतियों पर प्रहार कर रहे थे तब आदि शंकराचार्य ने हिंदु धर्म को दोबारा स्थापित किया। चारो पीठों की स्थापना के लिए आदि शंकराचार्य की परंपरा को आज भी चलाया जा रहा है।

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पाल घर के संतों के नाम के भी जले दीपक
उपनिषद, ब्रह्म सूत्र और गीता पर आदि शंकराचार्य ने प्रस्थान त्रयी की रचना की। इस संसार को भ्रम या माया भी आदि शंकराचार्य ने ही बताया था। हाल ही में पालघर में दो संतों को निर्ममता से मार डाला गया था। सोशल मीडिया पर अचानक तेजी से वायरल हुए मैसेज में आदि शंकराचार्य के जन्मदिन पर इन संतों के नाम पर दो दीपक घर की देहरी पर जलाने का आह्वान किया गया था। कुछ लोगों ने इस संदेश को मानते हुए ये दीपक या मोमबत्ती जलाई।

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