Friday, Jan 21, 2022
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Navratri 2017: नवरात्रि आठवां दिन करें महगौरी का पूजन

  • Updated on 9/28/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। नवरात्रि के आठवें दिन नवदुर्गा के महागौरी स्वरूप की आराधना का विधान है। मां गौरी राहु ग्रह पर अपना आधिपत्य रखती हैं। महागौरी का स्वरुप उस मरणासन्न प्राप्त वयोवृद्ध महिला या पुरुष का है जो कफ़न पहने है तथा अर्थी पर सवार हो मृत पड़ा है। शब्द महागौरी का अर्थ है महान देवी गौरी।

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महागौरी के तेज से पूरा संसार रौशन है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार देवी महागौरी के अंश से कौशिकी का जन्म हुआ जिसने शुंभ-निशुंभ का अंत किया। महागौरी ही महादेव की पत्नी शांभवी हैं।

पौराणिक मतों के अनुसार कालांतर में देवी पार्वती तपस्या के कारण शायमल हो जाती हैं ऐसे में महादेव उन्हे गंगा में स्नान करवाते हैं जिनसे देवी का वर्ण अत्यंत गौर हो जाता है, उनकी छटा चांदनी के सामन सफेद हो जाती है ऐसे में महादेव देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं। सफ़ेद वस्त्र धारण किए हुए सदैव शुभंकरी देवी सफेद रंग के वृष पर सवार रहती हैं। 

शास्त्रों में कहा गया है कि चतुर्भुजी देवी महागौरी की ऊपरी दाईं भुजा अभय मुद्रा में भक्तों को सुख प्रदान करती हैं। इनकी नीचे वाली दाईं भुजा में त्रिशूल सुशोभित है। इनकी ऊपरी बाईं भुजा में डमरू है जो सम्पूर्ण जगत का निर्वाहन करता है व नीचे वाली बाईं भुजा से देवी वरदान देती हैं।

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 महागौरी की अराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। ये उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जिनकी आजीविका का संबंध शेयर मार्केट, क्लार्क, पुलिस व सिक्योरिटी सर्विसेज से है।

देवी महागौरी की उपासना करने से मन पवित्र हो जाता है और भक्त की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महागौरी पूजन से विवाह संबंधित हर समस्या का हल हो जाता है। देवी सीता ने श्रीराम को पति रूप में प्राप्त करने के लिए गौरी पूजन किया था।

मां महागौरी का मंत्र
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा।।
 

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