Friday, Dec 06, 2019
famous-temple-of-hanuman-in-prayagraj-know-about-the-hidden-facts

प्रयागराज में स्थित हनुमान जी के इस मंदिर से जुड़ा है एक ऐसा रहस्य जिससे आप भी हैं अनभिज्ञ

  • Updated on 6/25/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हिन्दू धर्म (Hindu Religion) में भगवान से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं हैं जिसके बारे में लोग शायद कम ही जानते हैं। वैसे तो आज के इस दौर में भगवान के दिव्य दर्शन हो पाना नामुमकिन हैं, लेकिन उनके चमत्कार (Miracle) आज भी हमें उनकी मौजूदगी का एहसास कराते हैं। एक ऐसा ही चमत्कार आप इलाहाबाद (Allahabad) के संगम तट पर स्थित बड़े हनुमान मंदिर में देख सकते हैं जहां भक्तों को उनकी मौजूदगी का ऐहसास होता है।

क्या है इस मंदिर के पीछे का रहस्य

पौराणिक कथाओं (Mythological Stories) में इस मंदिर (Temple) को लेकर कई ऐसी मान्यताएं जुड़ी हैं जो काफी हैरान कर देने वाली हैं। बता दें कि, संगम तट पर स्थित ये मंदिर काफी पुराना है इसके अलावा इस मंदिर में आज भी चमत्कार देखने को मिलते हैं जहां लेटे हनुमान जी को गंगा मां (Godess Ganga) स्वंय स्नान कराने आती है। इस चमत्कार के पीछे भी एक रहस्य छिपा है जो आज हम आपको अपनी इस खबर में बताएंगे। इस कहानी की रामभक्त हनुमान से शुरूआत के पुनर्जन्म से होती है।

सोमवार के दिन शिव की भक्ति में लीन होकर करें ये पांच काम, मिलेंगे ये लाभ

रावण (Ravan) का वध कर और लंका पर विजय प्राप्त के बाद पवनपुत्र हनुमान (Pawanputra Hanuman) जब अपार कष्ट से पीड़ित होकर मरणा सन्न अवस्था में पहुंच गए थे। इसके बाद माता जानकी ने इसी जगह पर उन्हे अपना सिन्दूर देकर नया जीवनदान दिया था और हमेशा आरोअग्य व चिरायु रहने का आशीर्वाद देते हुए कहा था कि जो भी इस त्रिवेणी तट (Trivani) पर संगम स्नान पर आएगा उसे संगम स्नान का असली फल तभी मिलेगा जब वह हनुमान जी के दर्शन करेगा।

शनिदेव के प्रकोप से अगर बचना चाहते हैं आप तो भूलकर भी न करें ये 5 काम

यहीं पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जब भगवान राम (Lord Ram) लंकापति रावण (Ravan) को हराकर उस पर विजयी प्राप्त करके संगम स्नान कर भारद्वाज ऋषि से आशीर्वाद लेने प्रयागराज पहुंचे तो हनुमान जी यहीं इसी जगह पर शारीरिक कष्ट से पीड़ित होकर मूर्छित (बेहोश) हो गए। जब माता जानकी से उनकी ये पीड़ा देखी नहीं गई तो उन्होंने पवनपुत्र हनुमान को अपनी सुहाग की निशानी सिंदूर लगाकर उन्हें एक नई जिंदगी दी और हमेश स्वस्थ और आरोअग्य रहने का वरदान (आशीर्वाद) दिया। यही नहीं मंदिर की कहानी इतनी पुरानी है की आज भी यहां लोग हनुमान जी पर सिंदूर और कुमकुम चढ़ाते हैं।

शुक्रवार के दिन भूलकर भी ना करें ये काम नहीं तो घर में आर्थिक समस्या हो जाएगी उत्पन्न

जब औरंगजेब ने की थी हनुमान जी की मूर्ती हटाने की जरूरत 

ऐसा कहा जाता है कि 1400 ईसा पूर्व में जब भारत में औरंगजेब का शासनकाल (Aaurangjeb Empire) था तब उसने हनुमान जी की मूर्ती (Statue of Lord Hanuman) को हटाने का प्रयास किया था। इतना ही नहीं करीब 100 सैनिकों को इस प्रतिमा को यहां स्तिथ किले के पास के मन्दिर से हटाने के काम मे लगा दिया था। बहुत कोशिशों के बाद मूर्ति यहां से टस से मस नहीं हुई है। कुछ दिनों बाद औरंगजेब के सैनिक भी गंभीर रूप से बीमार हो गए जिसके बाद औरंगजेब ने इस मूर्ती को हटाने का फैसला छोड़ दिया।

आर्थिक तंगी से हैं परेशान तो शुक्रवार के दिन करें मां लक्ष्मी की पूजा, सारे कष्टों का होगा निवारण

दूर-दूर से यहां आते हैं लोग 

इस मंदिर की काफी पूरानी मान्यता है जिसके लिए लोग यहां आते हैं दूर-दूर से मात्र हनुमान जी के दर्शन करने के लिए। संगम प्रयागराज में आने वाले हर एक श्रद्धालु मंदिर में हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने और उनके दर्शन करने के लिए यहां आते हैं। मंदिर में लेटे हनुमान जी की पूजा तभी आरंभ होती है जब मां गंगा उन्हें स्नान कराकर वापस लौट जाती हैं। प्रयागराज में स्थित इस भव्य मंदिर को देखने के लिए श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में तांता लगता और देश-विदेश के लोग भी इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.