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Ganesha Chaturthi 2019: गणेश चतुर्थी पर इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, होगी सभी इच्छाएं पूरी

  • Updated on 9/2/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भगवान गणेश (Lord Ganesha) के जन्म के अवसर पर हर साल गणेश चतुर्थी को धूमधाम से मनाया जाता है और इस बार गणेश चतुर्थी (Ganesha Chaturthi) 2 सितंबर 2019 यानी की आज ही के दिन मनाया जा रही है। गणेश चतुर्थी हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाई जाती है।

ऐसा कहा जाता है कि इस दिन गणेश भगवान ने जन्म लिया था। साथ ही यह हिंदू धर्म में करीब 10 दिनों तक मनाए जाने वाला त्यौहार है जहां लोग भगवान गणेश की मूर्ति को अपने घर में गाजे-बाजे के साथ लेकर आते हैं और उन्हें स्थापित करते हैं। हिंदू धर्म में मान्यता के मुताबिक जो भी इस दिन हृदय पूर्ण और सच्चे मन से पूजा करता है विघ्नहर्ता उसके जीवन से सभी विघ्न और बाधाओं को दूर कर देते हैं और खुशहाली की वर्षा करते हैं।

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आखिर क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी 
शास्त्रों के मुताबिक भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश ने धरती पर जन्म लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार मां पार्वती (Goddess Parvati) ने अपने शरीर पर उभ्टन लगाया था और वह उसे उतारने की कोशिश कर रही थीं तभी उन्हें अपने शरीर के निकले मैल से एक मूर्ती का सृजन किया जिसे उन्होंने नाम दिया गणेश। भगवान गणेश की उत्पत्ति करने के बाद मां पार्वती स्नान के लिए चली गईं जहां उन्होंने भगवान गणेश को आदेश दिया की वह उनके स्नान के दौरान पैहरेदारी करें। भगवान गणेश ने उनके इस आदेश को स्वीकार कर लिया।

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बाल गणेश ने भगवान शिव को रोका
मां पार्वती स्नान के लिए चली गईं। कुछ समय बाद भगवान शिव वहां आ गए और अंदर जाने के लिए प्रवेश करने लगे। यह देखते हुए गणेश ने भोलेनाथ को अंदर जाने से रोका, जिसके बाद उन्होंने बाल गणेश को समझाने की कोशिश की और फिर अंदर जाने का प्रयास किया।

भगवान शिव को गणेश ने एक बार फिर रोकने का प्रयास किया जिससे भगवान शिव को क्रोध आ गया। क्रोध में भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से बाल का गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब मां पार्वती वहां आईं तो वह यह देखकर रोने लगीं और क्रोधित होकर उन्होंने भगवान शिव को बताया की यह उनका पुत्र था।

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हाथी के बच्चे का लगाया सिर
मां पार्वती ने भगवान शिव (Lord Shiva) से आग्रह किया की वह फिर से बाल गणेश को जीवित कर दें। भगवान शिव ने उनका कहा मानते हुए नए सिर की खोज शुरू कर दी, जहां उन्हें एक हाथी का बच्चे मिला। भगवान शिव के दूतों ने बताया कि वह शिव के पुत्र के धड़ के लिए हाथी के बच्चे का सिर लेने आए हैं।

हथनी ने इसे अपना सौभाग्य मानते हुए हाथी के बच्चे का सिर अलग कर बाल गणेश को लगाया जिससे वह जीवित हो उठे। भगवान शिव ने बाल गणेश को नया जीवनदान देने के साथ एक वरदान भी दिया की वह धरती पर पाप का नाश करें और राक्षसों का वध करें। इसी के साथ ही भगवान गणेश की उत्पत्ति हुई और इस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाने लगा।

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जानें क्या है शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी के दिन पूजा करने के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त है...

गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त आरंभ - प्रात: 11 बजकर 59 मिनट

गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त समाप्त - संध्या काल 08 बजकर 54 मिनट

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