Monday, Nov 18, 2019
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Karwa Chauth 2019: यहां जानें करवा चौथ का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

  • Updated on 10/17/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुहागन महिलाओं (Married Womens) का त्यौहार करवा चौथ (Karwa Chauth 2019) को इस बार 17 अक्टूबर 2019 के दिन मनाया जाने वाला है। यह त्यौहार उन सभी सुहागन महिलाओं को समर्पित हैं जो इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। यह त्यौहार (Festival) हर साल कार्तिक मास के चतुर्थी तिथि के दिन मनाया जाता है।

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इस दिन सभी महिलाएं सुबह से शाम तक अपने पति की लंबी उम्र के लिए अन्न निजर्ल व्रत रखती हैं और बाद में चांद को देखकर वह व्रत (Fast) को खोलती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, ऐसा माना जाता है की, यमराज (Yamraj) से सावित्रि (Savitri) ने सत्यान (Satyawan) के प्राणों (Life) की रक्षा के लिए इस व्रत को रखा था।

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क्यों मनाया जाता है करवा चौथ

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार यमराज सत्यवान के प्राण हरने के लिए आ गए जिसे देख पत्नीव्रिता पत्नी सावित्रि ने उनसे उनके पति के प्राणों की भीख मांगी। वह उनके शरीर को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी और उनसे लिपट-लिपट कर रोने लगी। सावित्रि ने यमराज से आग्रह किया के वो उनके पति की आत्मा को ना लेकर जाएं।

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लेकिन यमराज (Yamraj) ने उनकी एक नहीं सुनी जिसके बाद सावित्रि ने अन्न और जल का त्याग कर दिया। सावित्रि की ऐसी दशा देख यमराज विचलित हो गए जिसके बाद उन्होंने पति की आयु को छोड़कर कोई भी वरदान मांगने के लिए कहा। सावित्रि ने कहा की उसे अनेक संतानों की माता बनने का वरदान दें, जिसके बाद यमराज ने उनकी इस वरदान को स्वीकार कर लिया।

चुंकि, सावित्री एक पत्नीव्रिता पत्नी थी और किसी दूसरे पुरूष के बारे में नहीं सोचती थी तो यमराज को उनके आगे विवष होना पड़ा और ऐसे सावित्रि ने सत्यवान के प्राणों को हरने से बचा लिया। तभी से हर साल सुहागन महिलाएं इस दिन को करवा चौथ के रूप में मनाती हैं और अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।

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क्या है पूजा विधि

इस दिन पूजा करने के लिए सुर्योदय में उठे उसके बाद अपने सारे कामों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद स्नान करें और साफ वस्त्रों को धारण करें। अब पूजा की सारी सामग्री जुटा लें। इसके बाद पूजा घर में साफ-सफाई करें और बाद में उसमें गंगा जल से शुद्ध करें। इसके बाद भगवान पर पुष्प और फल अर्पित करें और अगरबत्ति या धुपबत्ति से पूजा करें। पूजा करने के बाद भगवान के सामने अन्न व निजर्ल व्रत का संकल्प लें।

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शाम को महिलाएं साज श्रृंगार में सुहाग का सामान (हरे या लाल रंग की साड़ी, हरी या लाल चुड़ियां, मांग में कुमकुम) पहने। इसके बाद पूजा करें और करवाचौथ व्रत का पाठ करें। पाठ करने के बाद भगवान को प्रसाद का भोग चढ़ाएं और चांद दिखने के बाद उसे अर्घ्ग दें। इसके बाद छलनी में एक दिया रखकर चांद की पूजा करें फिर अपने पति की पूजा करें। आखिर में पति के पैर छुकर उनके हाथों से अन्न और जल ग्रहण करें और व्रत को खोल दें।

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क्या है शुभ मुहूर्त

व्रत का शुभ मुहूर्त - इस दिन व्रत रखने के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त सुबह 06 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा जो रात 08 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।

पूजा करने का शुभ मुहूर्त - इस दिन पूजा करने के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त शाम 05 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगा जो शाम 07 बजकर 03 मिनट तक रहेगा।

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