Wednesday, Nov 13, 2019
keep this in mind while worshiping devoutni today otherwise it will be annihilated

देवउठनी एकादशी आज, पूजा करते समय ध्यान रखें इन बातों का ध्यान

  • Updated on 11/8/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देवउठनी एकादशी या तुलसी विवाह का यह खास दिन भगवान विष्णु और उनके अवतारों के पूजन का पर्व है। कार्तिक महीने की यह एकादशी सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है।

इस साल यह पर्व 8 नवंबर यानी आज के दिन पूरे देशभर में मनाया जा रहा है। हिंदु धर्म को मानने वाले लोगों के लिए यह बड़ा दिन माना जाता है। इस दिन जग के पालनकर्ता भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से जागकर जगत का कार्यभार फिर से संभालते हैं। इसी दिन से शादी ब्याह जैसे सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरु हो जाते हैं।  आज के दिन भगवान विष्णु, तुलसी जी, और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। 

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देवउठनी एकादशी की पूजन विधि

-देवउठनी के दिन सभी वर्ती प्रात काल में स्नान के बाद अपने आंगन में चौक बनाए। 

-इसके बाद वहीं पर भगवान विष्णु की आराधना के लिए उनकी मू्र्ती रखे या चित्र बनाए। 

-फिर दिन में धूप निकलने के बाद भगवान के चरणों को ढंक दे। 

-देवउठनी की रात को सुभाषित स्त्रोत पाठ, भगवान की कथा सुने। 

-पूजा में शंख, ढोलक, मृदंग, वीणा के साथ भजन आदी का गायन करके भगवान विष्णु को नींद से उठाएं। 

-पूजा के समय इस मंत्र का उच्चारण कर विष्णु भगवान को प्रसन्न करना बिल्कुल न भूले। 

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देवउठनी एकादशी मंत्र

“उत्तिष्ठो उत्तिष्ठ गोविंदो, उत्तिष्ठो गरुणध्वज।उत्तिष्ठो कमलाकांत, जगताम मंगलम कुरु।।”आसान शब्दों में इसे कहते हैं: “देव उठो, देव उठो! कुंआरे बियहे जाएं; बीहउती के गोद भरै।।”

 

-इसके बाद भगवान विष्णु की आरती उतारें, उनपर गंगाजल 7 बार घूमाकर तिलक करे और अपने पूजा स्थल या मंदिर में रख दें। 

इन सभी विधि-विधान से पूजा करने पर विष्णु भगवान आपकी सभी मनोकामना पूरी कर देंगे। 
 

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