Monday, Apr 23, 2018

सूर्य के उत्तरायण होने का त्यौहार है मकर संक्रांति

  • Updated on 1/14/2018

हमारे भारत वर्ष में कई त्यौहार मनाए जाते हैं। उन प्रमुख त्यौहारों में एक है मकर सक्रांति। इसे कई नाम से जाना जाता है। आसाम में इसे माघ बिहू के नाम से मनाते हैं तो तमिल में पोंगल के नाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान सूर्य 
नारायण मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसलिय इसे मकर सक्रांति कहा जाता है।

मकर राशि में प्रवेश करते ही सूर्य  भगवान की उत्तरायण गति आरम्भ हो जाती है। भागवत गीता में कहा गया है कि 6 महीने दक्षिणायन के व 6 महीने उत्तरायण के होते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है व दक्षिणायन को रात। इसलिये उत्तरायण में देह त्याग कर गया मनुष्य भगवान श्री कृष्ण के धाम को जाता है। महाभारत में भीष्म पितामह ने भी इसी दिन देह त्याग किया था। माता यशोदा ने श्री कृष्ण को पुत्र रूप में पाने के लिए इस दिन व्रत किया था।

गंगा नदी का सागर में संगम भी इसी दिन हुआ था। इसलिए मकर सक्रांति को गंगा सागर पर बहुत बड़ा मेला लगता है। मकर सक्रांति को स्नान दान व तप का विशेष महत्व है। इस दिन शुभ मुहूर्त में किए गए दान का कई हजार गुणा फल मिलता है। मकर सक्रांति पर तिल के दान का विशेष महत्व  है। पूरेदेश में तिल से बने व्यंजनों का भगवान को भोग चढ़ाया जाता है व तिल का दान दिया जाता है।

पवित्र माघ मास में जो व्यक्ति नित्य भगवान विष्णु की तिल से पूजा करता है उसके सारे कष्ट कट जाते हैं। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा जरूर करें व तिल की मिठाई का भोग लगाएँ। इस दिन प्रातः स्नान कर सुर्य उदय के दर्शन करने चाहिए व सूर्य भगवान की पूजा अचना करनी चाहिए। तिल व खिचड़ी का दान करें। सुहागनों को अपने अखंड सौभाष्य के लिए सुहाग की चीजों का दान अवष्य करना चाहिए। क्योंकि इस दिन किया दान अखंड रहता है।

भगवान विष्णु ने भी असुरों का अंत कर युद्ध समाप्ति की घोषणा इसी दिन की थी। तो यह त्यौहार बुराईयों पर अच्छाइयों की जीत व नकारात्मकता को खत्म करने का त्यौहार भी है। मकर सक्रांति का त्यौहार ज्यादातर 14 जनवरी को मनाया जाता है। पर इस साल 2018 में ये त्यौहार 14 जनवरी व 15 जनवरी को दो दिन लगातार मनाया जाएगा। धन्य है मरेा भारत महान व धन्य है यहाँ के सारे त्यौहार। एक नए दिन की शुरुआत एक नए दिन का आगाज़ मकर सक्रांति की सभी को ढेरों शुभकामनाएं।

सीता देवी राठी

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