Sunday, Sep 19, 2021
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जानें, क्या है ईद में चांद का महत्व

  • Updated on 6/15/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पूरे देश में ईद की तैयारियों शुरु हो चुकी है। वहीं इस त्योहार की रौनक, बाजार में परवान चढ़ती नजर आ रही है, लेकिन  ईद को लेकर लोगों के मन में कई तरह के ख्याल आते है कि ईद क्यों मनाई जाती है, क्यों रमजान के महीने में ही रोजे रखे जाते हैं, क्यों चांद को देखकर ईद की घोषणा की जाती हैं। 

#EidMubarak: आज दिख सकता है चांद! जानें कब मनाई जाएगी ईद

चलिए आपको इन सवालो के जवाबों से रुबरु कराते है।

कब मनाई गई सबसे पहली ईद 

इस्लाम में माना जाता है कि पहली ईद हजरत मुहम्मद पैगंबर ने सन् 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाई थी। यह कुछ-कुछ दीपावली की तरह है, जब भगवान राम के लंका विजय के बाद पहली बार दीपोत्सव की शुरुआत हुई थी। 

क्यों मनाई जाती है ईद 

ईद अल्लाह से ईनाम लेने का दिन है। रमजान में पूरे महीने रोजे रखने के बाद इसकी समाप्ति के रुप में ईद मनाई जाती है। ईद मनाने से पहले एक परंपरा निभाई जाती है, जिसे फितरा कहा जाता है। इस परंपरा के तहत ईद मनाने वाले हर मुस्लिम को अपने पास से गरीबों को कुछ अनाज देना होता है,जिससे वह खुशी से ईद मना सके।

क्यों चांद को देखकर होती है ईद की घोषणा 

ईद का चांद से बड़ा गहरा संबंध है। ईद उल फितर हिजरी कैलेंडर के दसवें महीने के पहले दिन मनाई जाती है और इस कैलेंडर में नया महीना चांद देखकर ही शुरु होता है। ईद भी रमजान के बाद नए महीने की शुरुआत के रुप में मनाई जाती है जिसे शव्वाल कहा जाता है। जब तक चांद न दिखे रमजान खत्म नहीं होता और शव्वाल शुरु नहीं हो सकता। 

ईद पर क्या काम है जरुरी 

ईद वाले दिन की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर फजर की नमाज अदा करने से होती है। उसके बाद खुद की सफाई करना, साफ कपड़े पहनना, फिर उन पर इत्र लगाना और कुछ खाकर ईदगाह जाना। नमाज से पहले फिकरा करना भी जरुरी होता है। ईद की नमाज खुले में अदा की जाती है। 

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