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maha ashtami shubh muhurat and puja vidhi know the kanya pujan time

Navratri 2019 : महाअष्टमी के दिन इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, जानें कन्या पूजन का समय

  • Updated on 10/5/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नवरात्रि महाअष्टमी (maha ashtami) को इस बार 6 अक्टूबर 2019 के दिन मनाया जाएगा। यह दिन माता महागौरी का होता है। मां महागौरी (goddess mahagauri) दुर्गा (goddess durga) का आठवा अवतार है और नौ स्वरूप में यह मुख्य हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी इस दिन मां की सच्चे मन से अराधना करता है व उनके व्रत रखता है उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस दिन कन्या पूजन (kanya pujan) को भी विशेष महत्वता दी जाती है।

Navratri 2019: सप्तमी के दिन ऐसे करें मां कालरात्रि की पूजा

क्या होता है कन्या पूजन

कन्या पूजन दो दिन का होता है जो अष्टमी और नवमी के दिन पड़ता है। जिन्हें अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना होता है वे सप्तमी के दिन मां कालरात्रि का व्रत रखते हैं। परंतु जिन्हें नवमी यानि की आखिरी दिन कन्या पूजन करना होता है वे अष्टमी के दिन व्रत रखते हैं। देवी पुराण के अनुसार कन्या पूजन को नौ दिनों का व्रत (fast) सफल बनाने के लिए रखा जाता है। कहते हैं मां दुर्गा दान, भक्ति और पूजा से नहीं बल्कि वह कन्या पूजन से अधिक प्रसन्न होती हैं।

आखिर क्यों मां महागौरी है नौ स्वरूपों में मुख्य

नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा की जाती है और सभी देवी विशेष रूप से पूजनीय है। परंतु महाअष्मी के दिन मुख्य रूप से मां महागौरी की पूजा की जाती है। इसके पिछे का तथ्य यह है की मां महागौरी को भगवान शिव की अर्द्धांगी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता महागौरी भगवान शिव (lord shiva) को पाने के लिए एक दिन कठोर तपस्या कर रही थी।

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तप के चलते मां का शरीर काला पड़ गया जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए। भगवान के दर्शन देते ही मां का काला शरीर चमकदार हो गया जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें मनचाहा वरदान दिया। कथाओं के अनुसार मां का शरीर कांतिमय होने की वजह से उनका नाम महागौरी पड़ गया। कहते हैं कि मां को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा तरीका है उन्हें श्वेत रंग की चीजें अर्पित करना चाहिए, जिसमें फूल, फल, वस्त्र आदि अर्पित कर सकते हैं।

कैसे करें पूजा

मां महागौरी की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुर्योदय में उठे उसके बाद अपने सारे कामों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद स्नान करें और साफ वस्त्रों को धारण करें। अब पूजा की सारी सामग्री जुटा लें। इसके बाद पूजा घर में साफ-सफाई करें और बाद में उसमें गंगा जल से शुद्ध करें। अब एक कलश लें उसमें गंगा जल, पानी के साथ एक सिक्का भी डालें, बाद में कलश को पूजा घर में स्थापित कर दें। इसके बाद माता पर सफेद रंग के पुष्प और सफेद रंग के फल (केला), सफेद रंग की मिठाई अर्पित करें और अगरबत्ति या धुपबत्ति से पूजा करें। पूजा करने के बाद माता के सामने व्रत का संकल्प लें।

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कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

महाअष्मी पूजन शुभ मुहूर्त - महाअष्टमी के पूजन का समय 05 अक्टूबर में सुबह 9 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 6 अक्टूबर 10 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।

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