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आज रात से ही शुरु हो जाएगा मोहनी एकादशी का व्रत, जानें पूजन की विधि

  • Updated on 5/2/2020

नई दिल्ली टीम डिजिटल। दुनिया के मोह और पापों के जंजाल से छूटने के लिए मोहिनी एकादशी व्रत का काफी महात्म्य माना जाता है। रविवार और कुछ स्थानों पर पंचांग में भेद के चलते इसे सोमवार को किया जाएगा। अगर आप भी ये व्रत करने जा रहे हैं तो आपको एक दिन पहले यानी शनिवार (अगर सोमवार को एकादशी मान रहे हैं तो रविवार की रात) से ही व्रत शुरु करना होगा। भगवान विष्णु या भगवान राम की पूजा के साथ इस व्रत को किया जाता है।

एक रात पहले से ही शुरु हो जाएगा व्रत
इस व्रत की विधि काफी आसान है। पंडित सुधीर भारद्वाज के मुताबिक मोहिनी एकादशी से एक दिन पहले यानी आज रात से ही व्रत शुरु करना होगा। व्रत करने वाले को अगले दिन सूर्योदय से पहल उठ कर नहाना और साफ धुले हुए कपड़े पहनने होंगे। हालांकि इस दिन नदी के किनारे स्नान का विधान है, मगर लॉक डाउन के चलते घर में ही नहाने के बाद भगवान राम या विष्णु की पूजा की जाती है।  

व्रत का संकल्प लेकर शुरु होगी पूजा
पंडित संजीव शर्मा बताते हैं कि व्रत का संकल्प लेकर व्रत शुरु किया जाता है। पूजन के लिए कलश की स्थापना करके इस पर लाल रंग का वस्त्र लपेट कर इसकी पूजा करनी होगी। पूजन के लिए भगवान की प्रतिमा को स्नान करवा कर नए कपड़े पहनाने होंगे। पूजन के बाद मीठे फलों का भोग लगाया जाता है। दान दक्षिणा के बाद सारे दिन और रात को भी कीर्तन करना होगा। इस दिन और रात को सोना वर्जित माना जाता है।

मोहिनी एकादशी व्रत की कथा
सरस्वती नदी के पास भद्रावती नगर में धृतिमान राजा का राज्य था। इसी शहर में धनपाल नाम का वणिक भगवान विष्णु का भक्त था। उसके पांच बेटे सुमना, द्युतिमान, मेधावी, सुकृत तथा धृष्टबुद्धि थे। धृष्टबुद्धि उसकी संपत्ति को नष्ट करता रहता था और पाप करने में उसे आनंद मिलता ता। धृष्टबुद्धि को उसके पिता ने घर से निकाल दिया तो वो महर्षि कौंडिन्य के पास पहुंच कर अपनी मुक्ति का मार्ग पूछने लगा। महर्षि ने उसे मोहिनी एकादशी की कथा और व्रत का सार समझाया। इसी व्रत को करने के बाद वो दिव्य देह धारण करके गरुड़ पर बैठकर विष्णुधाम चला गया। इस व्रत के महत्व को एक हजार गाय के दान के बराबर माना जाता है।

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