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भगवान शिव का एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर जहां 24 घंटे शिव लिंग पर चढ़ता है जल

  • Updated on 7/24/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सावन (Sawan) का महीना चल रहा है और अगर इस महीने में भगवान शिव (Lord Shiva) के दर्शन किए जाएं तो बहुत ही शुभ माना जाता है। इस महीने में भगवान शिव से मांगा गया कोई भी वरदान आसानी से प्राप्त हो सकता है। वो कहते हैं ना भगवान भोलेनाथ तो बहुत ही भोले होते हैं और सच्चे मन से की गई पूजा से वे इतना प्रसन्न हो जाते है कि भक्तों को मनचाहा वरदान दे देते हैं।

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सावन के महीने में भगवान शिव के दर्शन के लिए लोग इतने आतुर होते हैं कि वे इसके लिए यात्रा पर निकल पड़ते हैं जैसे की अमरनाथ, केदारनाथ और बदरिनाथ यात्रा। वैसे तो भोलेनाथ के भारत में अनेक धर्मस्थल बने हैं जिनको लेकर अलग-अलग इतिहास और मान्यताएं जुड़ी हुई है, लेकिन भारत में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जिनके बारे में लोग बहुत कम ही जानते हैं।

देशभर में जहां भगवान शिव के अनेको मंदिर बने हैं वहीं आज भी कुछ ऐसे रहस्यमयी मंदिर मौजूद है जिनके तथ्य लोगों को हैरान कर सकते हैं। हम बात कर रहे हैं एक ऐसे मंदिर की जिसके बारे में तो लोगों ने बहुत कम सुना होगा लेकिन इसकी धार्मिक मान्या सबसे ज्यादा है।

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झारखंड में स्थित है ये मंदिर
झारखंड (Jharkhand) में स्थित रामगढ (Ramgarh) जिले में भगवान शिव का एक बेहद ही रहस्यमयी मंदिर (Mysterious Temple) है जिसे टूटी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में आज भी शिवलिंग पर 24 घंटे जलाभिषेक होता रहता है। वैसे तो आमतौर पर लोग 1 से 2 या 3 बार जलाभिषेक करते हैं लेकिन 24 घंटों तक जलाभिषेक किसी को भी हैरान कर सकता है। जी हां, इस रहस्यमयी मंदिर की एक बेहद रोचक इतिहास है जिससे बहुत कम लोग जानते हैं।

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क्या है इस मंदिर का इतिहास
झारखंड के रामगढ में स्थित यह मंदिर टूटी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। इतना ही नहीं इस मंदिर में 24 घंटे शिवलिंग पर जलाभिषेक होता रहता है और इस जलाभिषेक का स्त्रोत मां गंगा को माना गया है। प्राचीन (Historical) कहानी के मुताबिक सन् 1925 में अंग्रेज (Foreigners) झारखंड के रामगढ इलाके में रेलवे लाइन बिछा रहे थे। जब वे पानी की खुदाई कर रहे थे तब इसी दौरान उन्हें जमीन के अंदर कुछ अजीब सा दिखाई दिया जो गुंबदनुमा प्रकार का था।

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अंग्रेजो ने जमीन के अंदर तक खुदाई की जहां उन्हें एक प्राचीन मंदिर मिला। इस मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग मौजूद था जिसके ठीक उपर से जल निकल रहा था जो शिवलिंग पर आकर गिर रहा था। जल का स्त्रोत गंगा मां (Goddess Ganga) कि प्रतिमा (Statue) से निकल रहा था जो नाभी से आपरूपि गंगा मां के हाथों से निकल रहा था और शिवलिंग पर गिर रहा था।

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स्वंय गंगा करती है भगवान शिव का जलाभिषेक
इस दृश्य को देखने के बाद अंग्रेज काफी हैरान रह गए थे। बता दें कि, रामगढ के इस मंदिर में आज भी रहस्य सुलझ नहीं पाया है कि आखिर कहां से ये पानी निकलता है और क्या इसका स्त्रोत हैं। लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे देखा जाए तो यह भगवान शिव का चमत्कार है जिसे स्वंय गंगा मां भी पूजती हैं।

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