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अगर मन से नहीं करेंगे भगवान शिव की भक्ति तो ये मिलेगा परिणाम

  • Updated on 8/1/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सावन (Sawan) के महीने में सभी भोलेनाथ (Bholenath) को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के व्रत व पूजा-पाठ करते हैं। लेकिन अगर मन में ही बैर हो तो भगवान भला आपको कैसे वरदान दे सकते हैं। सावन के महीने में शिव की पूजा को लेकर काफी मान्यता है जिसके लिए लोग इस महीने में हर दिन पूजा करते हैं।

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सच्चे मन और नर्म भाव से पूजा करने पर मिलता है वरदान

कहा जाता है कि सावन में जो भी भक्त भगवान शिव (Lord Shiva) की सच्चे मन से पूज करता है उन्हें मनचाहा वरदान प्राप्त होता है और उस पर अभय, अक्षय और धन की वर्षा होती है। लेकिन अगर भगवान शंकर की बेमन से पूजा की जाए तो अगले जन्म राक्षस (Beast) योनी प्राप्त होता है।

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क्रोध व द्वेष मन से की गई पूजा कर सकता है भगवान शंकर को क्रोधित

कथाओं के अनुसार ऐसा कहा गया है कि भगवान शिव बहुत भोले हैं और जो भी उनकी नर्म भाव (Soft Feeling) से पूजा करता है उनकी पुकार वे जल्दी सुनते हैं और वक्त आने पर उसे उसकी भक्ति और साधना के अनुसार फल भी देते हैं। यदि कोई भक्त भगवान शिव की गुस्सा, द्वेष मन, या क्रोध भाव से पूजा करता है तो उसे अगले जन्म राक्षस योनी में जन्म मिलता है।

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लिंग पुराण में भी है इसका वर्णन

इतना ही नहीं जो भी भक्त अगर अनुचित आहार लेकर शिव की अराधना करता है तो उसे गंधर्व का शार्प मिलता है। बता दें कि, भगवान शिव की पूजा को लेकर लिंग पुराण में उल्लेख किया गया है जिसका वर्णन सूत जी ने किया है। इसके साथ ही आइए जानते हैं कि सावन में भगवान शिव की किस प्रकार पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

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भगवान शिव की इस प्रकार करें पूजा

भगवान शिव की पूजा करने के लिए सुबह सुर्योदय से पहले उठ जाएं। इसके बाद सभी कामों से निवृत्त हो जाएं। कामों से निवृत्त होने के बाद स्नान करें और साफ कपड़ों को धारण करें। इसके बाद शिवलिंग को गंगाजल से धोएं और धोने के बाद उस पर दूध चढ़ाए और धुप बत्ती या फिर अगरबत्ती जलाएं।

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इसके बाद शिवलिंग पर गेंदें, सफेद फुल या फिर कमल का फुल चढ़ाएं। फुल चढ़ाने के बाद शिवलिंग पर बेल पत्र, भांग का पत्ता, धतूरा आदि को अर्पित करें। सभी चीजों को अर्पित करने के बाद भगवान शिव की सच्चे और नर्म भाव से पूजा करें और ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।

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