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14 साल बाद आया एेसा योग, शनिश्चरी अमावस्या के दिन एेसे पाए शनि प्रकोप से छुटकारा

  • Updated on 3/17/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। शनिदेव की पूजा कर उन्हें मनाने के लिए लोग हर तरह की कोशिश करते हैं। 17 मार्च यानी इस शनिवार को 14 साल बाद शनिश्चरी अमावस्या पर शुभ योग बना है। खास बात यह है की  इससे पहले 20 मार्च 2004 में चैत्र मास में शनैश्चरी अमावस्या आई थी और 2018 के बाद 2025 में ही ये योग बनेगा। इस शुभ योग ने शनिदेव को प्रसन्न करना बहुत आसान बना दिया है। 

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इस दिन किए गए दान-पूजन अक्षय फल देने वाले होते हैं, जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प दोष एवं शनि प्रकोप होता है, उन जातकों पर प्रेतबाधा, जादू-टोना, स्लिप-डिस्क, नसों के रोग, बच्चों के रोग, गृहक्लेश, असाध्य बीमारी, विवाह का न होना, संतान का शराबी बनना एवं कभी-कभी अकाल दुर्घटना का कारण भी बन जाता है।

कर सकते हैं ये उपाय

1. शनि अमावस्या पर आप काले रंग के वस्त्र धारण करें और तुलसी के 108 पत्ते लेकर उन पर श्री राम लिखें और पत्तों को एक सूत्र में पिरो कर माला बना कर श्री हरि विष्णु के गले में डालें। 

2. शनि देव का पूजन और तेल से अभिषेक कर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा जैसे संकट और आपदाओं से मुक्ति पा सकते हैं। शनि देव की कृपा से मनुष्य को जीवन के हर कठिन काम और प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

3. किसी पवित्र नदी, तीर्थस्थान या महाराष्ट्र के शिंगणापुर के शनि मंदिर में स्नान करें और गणेश पूजन, विष्णु पूजन, पीपल का पूजन करें। 

कुछ इस तरह करें पीपल की पूजा: पीपल पर जल चढ़ाएं, पंचामृत चढ़ाकर गंगाजल से स्नान कराएं, रोली लपेट कर जनेऊ अर्पण करके पुष्प चढ़ाएं और नैवेद्य का भोग लगाकर नमस्कार करें। इसके बाद पीपल की सात परिक्रमा शनि के बीज मंत्र का जाप करते हुए करें और पीपल पर सात बार कच्चा सूत बांधें।

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इन वस्तुओं का करें दान

1. भैंसे या घोड़े को चने खिलाएं और एक काली किनारी वाली धोती-कुर्ता, उड़द के पकौड़े, इमरती, काले गुलाबजामुन, छत्तरी तथा चिमटा आदि वस्तुओं का शनि मंदिर के पुजारी को दान देना चाहिए। 

2. जो लोग शनिदेव के प्रकोप से पीड़ित हैं वह शनि यंत्र धारण करें तथा काला वस्त्र एवं नारियल को तेल लगाकर, काले तिल, उड़द की दाल, घी आदि वस्तुएं अंधविद्यालय, अनाथालय या वृद्धाश्रम में दान करें। 

3. शनि प्रकोप एवं संतान से पीड़ित उड़द की दाल के पकौड़े, काले गुलाबजामुन एवं इमरती 101 कुत्तों एवं कौओं को खिलाएं। 

4. काली गाय का दान करने से पितृ दोष से पीड़ित जातकों की 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है।

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