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solar eclipse 2019 why father surya and son shani''''s relations deteriorate know full story

सूर्य ग्रहण 2019: क्यों बिगड़े हैं पिता सूर्य और पुत्र शनि के रिश्ते, जानें पूरी कहानी

  • Updated on 12/6/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। शास्त्रों में पिता और पुत्र के रिश्ते को स्नेह, प्यार का प्रतिक बताया गया है और पुत्र को हमेशा आज्ञाकारी बताया गया है। लेकिन सूर्य देव और शनि महाराज के रिश्ते पिता-पुत्र के होत हुए भी कभी अच्छे नहीं रहे। दोनों के रिश्ते में खटास शनिदेव के जन्म से ही आ गई थी।

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शनिदेव की माता महादेव की भक्त्त थीं
पौराणिक कथा के अनुसार शनिदेव के पिता नाम सूर्य और माता का नाम देवी छाया था। शनिदेव की माता छाया महादेव की अनन्य भक्त्त थीं और प्रतिदिन भोलेनाथ की पूजा करती थी। देवी छाया के गर्भ में शनिदेव पल रहे थे। शिवजी की कठोर पूजा करने के कारण शनिदेव का रंग काला पड़ गया। जब शनिदेव का जन्म हुआ तो वे बहुत काले थे। इससे पिता सूर्य पुत्र का काला रंग देख कर बहुत क्रोधित हुए उन्होंने कहा कि ये मेरा पुत्र नहीं है औऱ वे वहां से चले गए।

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इंद्र को राहु ने भड़काया
राहु को जब ये पता चला तो उन्होंने इंद्र को भड़काते हुए कहते हैं कि सूर्य तुम्हारा सिहासन हड़पना चाहते हैं। वहीं राहु, सुर्य और छाया के रिश्ते ममें तनाव बना देते हैं। ताकि सुर्य देव को देवताओं के क्षेणी से बाहर किया जाए। इसके बाद जब सूर्य इंद्रसभा में आते हैं तो इंद्र देवी छाया के चरित्र पर सवाल उठाते हैं। और सूर्य का मजाक बनाते हैं। इंद्र, सूर्य से कहते हैं कि ये तो वे देवी छाया का त्याग करें या देवत्व का। इसके बाद क्रोधित होकर सूर्य पत्नी छाया और पुत्र शनि को घर से निकाल देते हैं।

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भोलेनाथ ने पिता-पुत्र को मिलाया
इसके बाद शनि अपनी माता को इंसाफ दिलाने के लिए महादेव का कठोर तप करते हैं। भोलेनाथ शनि से प्रसन्न होकर बरदान मांगने को कहते है शनि देव भोलेनाथ से अपने पिता सुर्य से ज्यादा शक्ति मांगते हैं। तब भोलेनाथ ने शनिदेव को वरदान दिया की ग्रहो में तुम्हारा क्षेष्ठ स्थान होगा। वरदान के बाद शनि पिता सूर्य को युद्ध के लिए ललकारते हैं। तब भोलेनाथ आकर सच्चाई बताते हैं और पिता-पुत्र के बीच समझौता करवाते हैं।    

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