Tuesday, Jul 05, 2022
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आखिर सुंदरकाण्ड का नाम सुंदरकाण्ड क्यों रखा गया?

  • Updated on 6/26/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल।  रामचरितमानस की रचना तुलसीदास ने महार्षि वाल्मिकी के रामायण को आधार बनाकर लिखा था। सुंदरकांड रामचरितमानस का पंचम सोपान है। सुंदरकांड में पवनसुत हनुमान के यश का गुणगान किया गया है तो इस सोपान के नायक हनुमान जी है। लेकिन प्रश्न यह है कि सुंदरकांड का नाम सुंदरकांड क्यों पड़ा?

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आपको बता दें कि हनुमान जी सीताजी के खोज में लंका गये थे और लंका त्रिकूटांचल पर्वत पर बसी हुई थी। त्रिकूटांचल पर्वत यानि की यहां तीन पर्वत थे। पहला सुबैल पर्वत, जहां कं मैदान पर युद्ध हुआ था, दूसरा नील पर्वत जहां राक्षसों के महल थे और तीसरा सुंदर पर्वत जहां अशोक वाटिका थी। इसी वाटिका में रावण ने सीता जी को  रखा हुआ था और हनुमानजी की सीता जी से भेंट भी इसी वाटिका में हुई  थी।

सुंदररकांड में इसी घटना का वर्णन है और सबसे प्रमुख घटना यही घटित हुई थी सीताजी और हनुमान जी का मिलन। यही वजह है कि इस कांड को नाम सुंदरकांड रखा गया। 

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दरअसल श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। सारे रामचरितमानस में श्रीराम के गुणों और पुरूषार्थ को बताया गया है लेकिन यह कांड एक ऐसा है जिसमें राम भक्त हनुमान के विजय का वर्णन किया गया है। 

सुंदरकाण्ड का पाठ सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। किसी भी प्रकार की परेशानी या संकट हो,सुंदरकाण्ड के पाठ से यह संकट तुरंत ही दूर हो जाता है।  


 

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