Sunday, Oct 17, 2021
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गर्भ से बाहर आने से पहले ही ‘हमारा डाटा बेचा जा रहा’

  • Updated on 8/9/2021

क्या लाखों गर्भवती महिलाओं से प्राप्त डाटा का उपयोग आनुवंशिक रूप से उन्नत सुपर-सैनिक बनाने के लिए किया जा सकता है? हाल ही में रॉयटर्स की एक जांच रिपोर्ट की मानें तो एक लोकप्रिय प्रीनेटल टैस्ट (प्रसव पूर्व परीक्षण) निर्माता बी.जी.आई. समूह चीनी सेना (पी.एल.ए.) के साथ इसी लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।

यह समूह निफ्टी (नॉन-इन्वेसिव फेटल ट्राइसॉमी) नामक एक मैडीकल टैस्ट प्रदान करता है जो 50 से अधिक देशों में उपलब्ध है और गर्भावस्था में डाऊन सिंड्रोम जैसी आनुवंशिक असामान्यताओं का पता लगाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

रॉयटर्स के अनुसार 80 लाख से अधिक महिलाओं ने ये परीक्षण किए हैं और बी.जी.आई. ने पापुलेशन क्वालिटी (जनसंख्या गुणवत्ता) के सुधार में चीनी सेना की मदद करने के लिए एकत्र किए गए इस आनुवंशिक डाटा का उपयोग किया है। 
रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी सरकार के सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि इस विशाल डाटा बैंक तक पहुंच से चीन को वैश्विक फार्मास्यूटिकल्स पर हावी होने में मदद मिल सकती है और आनुवंशिक रूप से उन्नत सैनिकों या रोगजनकों की मदद से अमरीकी आबादी या खाद्य आपूर्ति को निशाना बनाया जा सकता है।  हालांकि, बी.जी.आई. ने इन दावों को खारिज करते हुए एक बयान जारी किया है।

उल्लेखनीय है कि बी.जी.आई. टैस्ट अमरीका में प्रतिबंधित हैं। अमरीकी सरकार डाटा के स्टोरेज तथा आकलन को राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला समझती है। उसका मानना है कि इससे चीन को आॢथक और सैन्य फायदा हो सकता है। 
यह सच है कि चीन लोगों के निजी डाटा की चोरी कर रहा है। ऐसी खबरें पश्चिम के देशों की पत्रकारिता में काफी प्रचलित हैं। ऐसे में फोन कम्पनियां भी यही काम कर रही हैं।  

सभी जानते हैं कि डी.एन.ए. अब बड़े एक बिजनैस का रूप धारण कर चुका है और वास्तव में यह कोई नहीं जानता कि आपकी सबसे निजी जानकारी किसके पास है, उन्होंने इसे किसे बेचा है, और वे कम्पनियां या सरकारें इसके साथ क्या कर रही हैं? 

उदाहरण के लिए गत वर्ष निजी इक्विटी कम्पनी ‘ब्लैकस्टोन’ ने ‘एनसेस्टरी डॉट कॉम’ का अधिग्रहण किया जिसके पास दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता डी.एन.ए. नैटवर्क में 1.80 करोड़ लोगों के डी.एन.ए. की जानकारी है। 

‘ब्लैकस्टोन’ ने कहा है कि डी.एन.ए. की इस जानकारी से पैसा कमाने की उसकी कोई योजना नहीं है लेकिन अधिकतर विशेषज्ञ उनके इस दावे पर अत्यधिक संदेह करते हैं। स्पष्ट है कि उन्होंने  5 बिलियन डॉलर यूं ही तो खर्च नहीं किए होंगे। 
इस बीच ब्रिटिश सरकार भी बड़े पैमाने पर डाटा जमा कर रही है और ऐसा लग रहा है कि वह इंगलैंड में सभी लोगों के चिकित्सा इतिहास को एकत्रित कर रही है।

बी.जी.आई. को लेकर रॉयटर्स की रिपोर्ट इस बात की याद दिलाती है कि हमारे जीवन का एक भी पहलू ऐसा नहीं है जिसकी जानकारी जमा करके उसका उपयोग पैसा कमाने के लिए नहीं किया जा रहा हो। 

लगता है जैसे हमारे गर्भ से बाहर आने से पूर्व ही हमारा डाटा बेचा जा रहा है। वैसे इस कहानी का एक और पहलू भी है, वह यह कि हमें यह भी नहीं पता कि चीनी सरकार वास्तव में आनुवंशिक रूप से उन्नत सैनिकों को बनाने के लिए जन्म पूर्व परीक्षणों के डाटा का उपयोग कर रही है या नहीं।

परंतु इस प्रकार के परीक्षणों का उपयोग अगली पीढ़ी के आनुवंशिक गुणों को चुनने के लिए होने लगा है। गर्भावस्था की शुरूआत में आनुवंशिक असामान्यताओं के लिए भ्रूण का परीक्षण करने की क्षमता के भारी नैतिक प्रभाव हैं। प्रश्न उठता है कि यदि ऐसे टैस्ट के नतीजे असामान्य आते हैं तो क्या किया जाएगा? 

डेनमार्क में लगभग सभी लोग यह परीक्षण चुनते हैं और गर्भस्थ बच्चे के डाऊन सिंड्रोम से ग्रस्त होने का पता चलवाते हैं। इनके कुछ भयंकर परिणाम भी हो सकते हैं जिनके बारे में शायद अभी तक हमें पता नहीं है।

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