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पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल के बाद अब ‘बंगलादेश पर चीन के डोरे’ 

  • Updated on 6/23/2020

भारत से शत्रुता तथा भारत को पड़ोसियों से अलग-थलग करके घेरने की साजिश के तहत चीनी शासक भारत के सभी पड़ोसी देशों से अपने संबंध सुधारने और उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों के लिए अनेक प्रलोभन दे रहे हैं। इसी मकसद से चीन ने ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक कारिडोर परियोजना’ के अंतर्गत पाकिस्तान में सड़क, रेल और बिजली परियोजनाओं पर 60 अरब डालर का निवेश किया है।

पड़ोसी नेपाल भी कुछ समय से भारत से नाराज चला आ रहा है और अनेक भारत विरोधी निर्णय ले रहा है। भारत के साथ नक्शा विवाद भी उसने चीन के उकसाने पर ही शुरू किया है। 

श्रीलंका सरकार को भी चीन के सरकारी बैंकों का कर्ज न चुका पाने के कारण अपना हम्बननोटा बंदरगाह 100 वर्ष के लिए चीन को लीज पर देना पड़ा है जिससे वह चीन के दबाव में आ गई है। 

सुदूर मालदीव के साथ कभी भारत के अच्छे संबंध थे और वहां 1988 में भारत ने अपना कमांडो दस्ता भेज कर तख्ता पलटने का प्रयास नाकाम किया था परंतु अब वहां भी चीन ने अपना प्रभाव बढ़ा लिया है और वहां चीन की सहायता से अनेक परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

हालांकि भारत सरकार ने बंगलादेश को पाकिस्तान की गुलामी से मुक्त कराने में बड़ी भूमिका निभाई और उस समय चीन के शासकों ने पाकिस्तान का साथ दिया था परंतु 1975 के सैनिक विद्रोह में बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या के बाद बंगलादेश के शासक भी चीन की गोद में जा बैठे। चीन एकमात्र देश है जिसके साथ बंगलादेश ने रक्षा समझौता किया है। 
चीन के राष्टï्रपति शी जिन पिंग सन 2016 में ढाका की यात्रा पर आए और उन्होंने बंगलादेश को 24 बिलियन डालर सहायता देने का वायदा किया। चीन ने वहां पुलों, सड़कों, रेल लाइनों, हवाई अड्डों और बिजलीघरों का निर्माण करके बंगलादेश के शासकों पर कुछ ऐसे डोरे डाले कि आज वे चीन को अपने दुख-सुख का साथी और सबसे भरोसेमंद सहयोगी मानने लगे हैं।

इस समय जबकि गलवान घाटी में चीनी हमले के बाद देश में चीन निर्मित सामान पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज हो रही है, चीनी नेताओं ने भारत को घेरने की अपनी कोशिशें तेज करते हुए बंगलादेश को आॢथक प्रलोभनों के जाल में फंसाने के लिए मछली और चमड़े समेत बंगलादेश के 5161 उत्पादों को 97 प्रतिशत तक टैरिफ मुक्त करने की घोषणा कर दी है।
भारत इस क्षेत्र में अपने एकमात्र साथी बंगलादेश को भी गंवाता दिखाई दे रहा है जो भारतीय नेताओं के लिए भारी ङ्क्षचता का विषय होना चाहिए :

वतन की फिक्र कर नादां, मुसीबत आने वाली है,
तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में।

—विजय कुमार

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