Saturday, Jul 24, 2021
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‘बिहार के सभी चुनावी दलों ने वायदों के अंबार लगाए’ ‘(लेकिन) न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी’

  • Updated on 10/27/2020

इन दिनों बिहार में जारी चुनावी बुखार में विजय प्राप्त करने के लिए सभी दलों ने अपने घोषणापत्रों में ‘लोक लुभावन’ वायदों के अंबार लगा दिए हैं :

* भाजपा (BJP) ने अगले 5 वर्ष में ‘आत्मनिर्भर बिहार’ का रोड मैप जारी करते हुए कोरोना वायरस वैक्सीन का टीका हर ‘बिहार वासी’ को मुफ्त देने, पांच वर्षों में 19 लाख नौकरियां पैदा करने और 2022 तक 30 लाख पक्के मकान आदि देने के वायदे किए हैं। 
* जद (यू) ने घोषणापत्र में ‘सक्षम बिहार, स्वावलम्बी बिहार’ का नारा देते हुए युवा शक्ति की प्रगति, हर खेत तक सिंचाई पहुंचाने, युवाओं को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था करने व उद्यमिता को बढ़ावा देने व ‘महिला सशक्तिकरण’ के वायदे किए हैं। 
* ‘लोजपा’ के घोषणापत्र में ‘बिहार फस्र्ट बिहारी फस्र्ट’ का नारा देते हुए सभी समस्याएं हल करने की बात कही है। इसमें कहा गया है कि ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका इसमें हल न हो। 
* कांग्रेस ने 18 महीनों में 4.30 लाख खाली पड़े पदों पर नियुक्ति करने, कृषि कर्ज माफी, 1500 रुपए मासिक बेरोजगारी भत्ता देने, बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट और हाल ही में अस्तित्व में आए तीन कृषि बिलों को समाप्त करने सहित कई वायदे किए हैं। 
* राजद ने नए स्थायी पदों का सृजन कर कुल 10 लाख नौकरियों की समयबद्ध बहाली की प्रक्रिया कैबिनेट की पहली ही बैठक में, शुरू करने, सभी कर्मचारियों को स्थायी वेतन देने तथा विभागों में निजीकरण समाप्त करने और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई औद्योगिक नीति बनाने का वायदा किया है। 
* ‘जन अधिकार पार्टी’ के नेता ‘पप्पू यादव’ ने मतदाताओं से 3 वर्ष का समय मांगते हुए कहा है कि यदि सत्ता में आने के दो साल के भीतर उन्होंने अपने घोषणापत्र के अनुसार काम नहीं किया और 2 वर्ष में 30,000 स्नातक युवाओं को नौकरी नहीं दी तो वह ‘राजनीतिसे संन्यास ले लेंगे’। 

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नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जद (यू) और भाजपा ने भी पिछले वायदे यथासंभव पूरा करने का दावा किया है परंतु ‘राजद’ और ‘लोजपा’ ने इसका खंडन किया है और नीतीश को इस बार ‘दोनों’ से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि नीतीश कुमार ने वर्तमान कार्यकाल के दौरान ‘शराबबंदी’ जैसे अनेक सुधारवादी पग उठाए हैं परंतु ‘महादलित समुदाय’ की नाराजगी तथा बढ़े हुए अपराधों के कारण भी वह भी ‘विरोधी दलों के निशाने’ पर हैं। चिराग पासवान ने सत्ता में आने पर नीतीश राज के घोटालों की जांच करवा कर मुख्यमंत्री सहित हर भ्रष्टाचारी को ‘जेल भेजने की’ घोषणा की है। 
‘राजद’ के तेजस्वी यादव भी नीतीश सरकार के विरुद्ध रोज नए मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने नीतीश के कार्यकाल में 30,000 करोड़ रुपए के 60 घोटाले होने का आरोप लगाया और चुनाव सभा में अपने हाथों में प्याज की माला लेकर चुनाव सभा में पहुंच कर ‘महंगाई का मुद्दा उठाया’। इस पर ‘भाजपा नेता रवि किशन ने’ कहा कि ‘‘चुनावों के समय प्याज की माला तो क्या ‘पेड़ पर भी उलटा लटक जाएंगे’ विपक्षी नेता।

पहले गलतबयानी फिर कहने पर माफी, यह उचित समाधान नहीं

चिराग पासवान और तेजस्वी यादव द्वारा नीतीश कुमार की सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों को भाजपा अध्यक्ष श्री जे.पी. नड्डा ने 24 अक्तूबर को सिरे से खारिज करते हुए कहा : ‘‘मैं बिहार में पढ़ा-लिखा तथा बिहार राज्य ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। स्कूल के दिनों में मैं हाऊस कैप्टन और तैराकी में जूनियर वर्ग में बिहार में चौथे स्थान पर रहा। जे.पी. ने मुझे सबसे पहले प्रेरित किया और 1974 में मैं सत्याग्रह पर बैठा।मेरे पिता इसी यूनिवॢसटी में प्रोफैसर थे। ‘यूनिवॢसटी राजनीतिक चेतना का केंद्र’ थी और मैं भी उसमें शामिल था। भाजपा और जद (यू) पहले से बेहतर प्रदर्शन करेंगे तथा लोजपा तथा विरोधी दलों का आंकड़ा दो अंकों से आगे नहीं बढ़ेगा। भाजपा नेतृत्व पूर्णत: नीतीश जी के साथ है और ‘वही मुख्यमंत्री बनेंगे’। तेजस्वी यादव की पार्टी का ‘डी.एन.ए. अराजकता का’ है। ये उद्योगों की बात करते हैं लेकिन इन्होंने बिहार में ‘अपहरण का उद्योग’ चलाया हुआ है।’’

उन्होंने लोजपा नेता चिराग पासवान द्वारा खेले जा रहे ‘भाजपा कार्ड’ के बारे में कहा, ‘‘उसकी महत्वाकांक्षाएं अधिक थीं तथा भाजपा के लिए उसे एडजस्ट करना मुश्किल था।’’ श्री नड्डा ने 26 अक्तूबर को औरंगाबाद में चुनावी सभा में भी चिराग पासवान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते कहा कि, ‘‘कुछ लोग चुनाव के समय ‘षड्यंत्र’ करके हमारे बीच सेंध लगाना चाहते हैं। एक ओर वे ‘नीतिश जी को बुरा-भला’ कहते हैं दूसरी ओर मोदी जी की ‘प्रशंसा’ करते हैं।’’ 

तेजस्वी तथा चिराग की चुनाव सभाओं में ‘रिकार्ड तोड़ भीड़’ जुटने पर टिप्पणी करते हुए बिहार भाजपा के प्रधान रहे उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि ‘‘भीड़ ‘किसी पार्टी की लोकप्रियता का पैमाना नहीं’। चुनावों में राजद और कांग्रेस का पता भी नहीं चलेगा। चिराग पासवान भी ‘एक सीट ही जीत’ पाएंगे। यह गठबंधन का जमाना है, कोई पार्टी  गठबंधन के बगैर सरकार नहीं बना सकती।’’ 

इसके चंद मिनटों बाद एक प्रैस कान्फ्रैंस में बुद्धिजीवियों और अन्य दलों के कुछ नेताओं ने सुशील मोदी पर प्रश्नों की बौछार करते हुए पूछा कि आपको उप-मुख्यमंत्री कैसे नामित किया गया है। सुशील मोदी ने कहा कि यह पार्टी हाईकमान का फैसला है। फिर पूछा कहीं यह निर्णय यह देखते हुए तो नहीं लिया गया कि नीतीश जी को कम सीटें मिलने वाली हैं और आप मुख्यमंत्री बनने वाले हैं तो कहा कि यह निर्णय हमारे शीर्ष नेताओं का है। इसके बाद पार्टी के मैनिफैस्टो में वायदों का अंबार (उपरोक्त में दर्ज) लगा दिया गया लेकिन जैसे चुनाव के पांच साल पूरे होते ही लोग कहते हैं कि वायदे ही वायदे थे- इसलिए बिहार में कोई भी सरकार आए ‘अंतत: वही होगा’ न-‘न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी’।

इस बीच राजग के विज्ञापन से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर गायब होने को लेकर बिहार के गलियारों में चर्चा ही चर्चा है और नितिश को घोर निराशा में डुबो दिया और लोग नीतीश जी के खिलाफ नीतीश जी हाय-हाय और मोदी-मोदी तथा हर-हर मोदी के नारों की गूंज अब बिहार में गूंजायमान है।ऐसा दिखाई देता है भाजपा ने यह रणनीति बड़े सोच-समझ कर दूरअंदेशी से बनाई है जो आने वाले दिनों में अन्य पाॢटयों के लिए एक मिसाल बनेगी कि अगर सत्ता में आना है तो यही रास्ता अपनाना होगा नहीं तो 70 वर्षीय  नीतीश जी का तुजुर्बा और दीर्घकालीक शासन चलाने का यह हश्र हो सकता है तो बाकी लीडर ‘किस खेत की मूली हैं’।   

 —विजय कुमार 

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