Sunday, Oct 17, 2021
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as the elections neared, the ravadis started being distributed musrnt

चुनाव निकट आते ही बंटने लगीं रेवड़ियां

  • Updated on 7/22/2021

हालांकि अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर तथा इसके बाद गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और उनमें अभी 8 महीने से भी अधिक का समय पड़ा है परन्तु विभिन्न राजनीतिक दलों और उनके नेताओं ने चुनाव जीतने के लिए जरूरत के हिसाब से अपनी- अपनी गोटियां बिठानी तथा विभिन्न समुदायों के मतदाताओं को रिझाने की कवायद शुरू कर दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 जुलाई को किए गए विस्तार में उत्तर प्रदेश के चुनावों में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजातीय समुदाय के मतदाताओं को रिझाने के लिए उत्तर प्रदेश से 7 मंत्रियों को शामिल किया जिनमें 3 ओ.बी.सी. और 3 अनुसूचित जाति के अलावा ब्राह्मïण समुदाय को खुश करने के लिए एक ब्राह्मïण सांसद को भी मंत्री बनाया गया है। 

जहां भाजपा उत्तर प्रदेश में ओ.बी.सी. को रिझाने के प्रयासों में जुटी है तो दूसरी ओर बसपा सुप्रीमो मायावती ने ब्राह्मïण समुदाय में अपनी पैठ बनाने के लिए अभियान छेड़ने की घोषणा कर दी है। इसका नेतृत्व पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा को सौंपा गया है जिसकी शुरूआत 23 जुलाई को अयोध्या से की जाएगी।

मायावती ने इस बारे एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने पर पार्टी ब्राह्मïणों के मान-सम्मान और उनके हितों की रक्षा करेगी।’ इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर आरोप लगाया कि 2017 में ब्राह्मïणों की वोटों से सत्ता में आने के बावजूद सरकार ब्राह्मïण समुदाय का शोषण और उन्हें परेशान कर रही है। 

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी उत्तर प्रदेश के चुनावों में अन्य राजनीतिक दलों के साथ गठजोड़ से संकोच न करने का संकेत देते हुए कहा है कि ‘इस विषय में हमारा दिमाग खुला हुआ है। हमें गठजोड़ करने से संकोच नहीं है क्योंकि हमारा लक्ष्य भाजपा को हराना है।’

पंजाब में पिछले 25 वर्षों के बाद पहली बार शिरोमणि अकाली दल (शिअद) अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के बगैर उतरने जा रहा है, अत: भाजपा की कमी पूरी करने के लिए शिअद नेताओं ने भाजपा के परम्परागत हिंदू वोट बैंक में सेंध लगानी शुरू कर दी है।

एक ओर हिंदू वोटों को साधने के लिए शिअद अब अपने हिंदू नेताओं को मैदान में उतार कर शहरी मतदाताओं, व्यापारियों तथा उद्योगपतियों को लामबंद करने की तैयारी में जुट गया है तो दूसरी ओर पार्टी ने दलित वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए बसपा से गठबंधन करके सत्ता में आने पर एक हिंदू और एक दलित समुदाय के सदस्य को उप- मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा भी कर दी है।

शिअद और बसपा द्वारा पंजाब में हिंदू उप-मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा के बाद हिंदू संगठनों के अनेक नेताओं ने 18 जुलाई को चंडीगढ़ स्थित शिअद मुख्यालय में पहुंच कर पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल का आभार प्रकट किया और पहली बार शिअद मुख्यालय ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठा। श्रमजीवी वर्ग को रिझाने के लिए शिअद की ओर से माकपा के साथ गठबंधन किए जाने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है।

कांग्रेस भी इस मामले में पीछे नहीं है जहां कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में नवजोत सिद्धू को कांग्रेस की कमान सौंप दी है वहीं हिंदू, जाट तथा दलित समुदाय से संबंधित इसके 4 कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त कर दिए हैं ताकि उक्त तीनों वर्गों के मतदाताओं को संतुष्ट किया जा सके।

यहीं पर बस नहीं सरकारी कर्मचारियों को खुश करने के लिए केंद्र सरकार ने लम्बे समय से महंगाई भत्ते का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते पर लगी रोक हटाने का फैसला करने के साथ-साथ इसे 17 प्रतिशत से बढ़ा कर 28 प्रतिशत तक कर दिया है। इससे 52 लाख केंद्रीय कर्मचारियों तथा 60 लाख से अधिक पैंशनरों को लाभ होगा। 

यहीं पर बस नहीं इसके कुछ ही दिन बाद केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए मकान किराए भत्ते में भी विभिन्न श्रेणियों में 9 से 27 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी गई है। यह तो अभी शुरूआत मात्र है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे सत्तारूढ़ एवं विरोधी दलों के नेता मतदाताओं को लुभाने के लिए नए- नए चुनावी वायदे करने के साथ- साथ नई- नई घोषणाएं और नए- नए गठजोड़ करेंगे जिसका कुछ न कुछ लाभ उनको तथा उनकी पार्टियों को तो मिलेगा ही साथ ही देशवासियों को भी कुछ न कुछ हासिल हो ही जाएगा।

—विजय कुमार 

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