Thursday, Jun 24, 2021
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Bihar elections defy all estimates of exit poll aljwnt

बिहार चुनावों ने झुठलाए ‘एग्जिट पोल’ के सारे अनुमान

  • Updated on 11/11/2020

कोरोना काल के दौरान भारी सुरक्षा प्रबंधों के बीच हुए बिहार विधानसभा के चुनावों (Bihar Elections) पर सबकी नजरें टिकी हुई थीं जिसके दौरान 15 साल से सत्तारूढ़ जद (यू) सुप्रीमो नीतीश कुमार और भाजपा नीत ‘राजग’ की गठबंधन सरकार को हराने के लिए लालू यादव (Lalu Yadav) के छोटे बेटे तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) के नेतृत्व में गठित ‘राजद’ के ‘महागठबंधन’ तथा जद (यू) से नाराज लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। चिराग पासवान ने कोरोना से निपटने और बिहार लौटे प्रवासियों पर ध्यान न देने के लिए नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जमकर आलोचना की तथा बिहार में स्वतंत्र रूप से चुनाव लडऩे की घोषणा करके और यह कह कर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी कि बिहार में इस बार भाजपा और लोजपा की सरकार बनेगी। 

चिराग पासवान तो मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर पाए परन्तु तेजस्वी यादव की संक्षिप्त ‘मैजिकल कैंपेनिंग’ ने मतदाताओं पर काफी प्रभाव डाला। चुनाव प्रचार के दौरान जहां तेजस्वी ने नीतीश सरकार की खामियां गिनाईं वहीं सत्ता में आने पर अन्य सुविधाओं के अलावा 10 लाख नौकरियां सृजित करने का भी वायदा किया। विकास के मुद्दे पर लड़े गए इस चुनाव में भाजपा का नारा था ‘हमारा विकास उनका जंगलराज’। इसमें स्पष्टï रूप से ‘राजद’ (लालू यादव) का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा था तथा संभावना व्यक्त की जा रही थी कि (लालू यादव)  ‘राजद’ अपना 15 वर्ष का सत्ता का वनवास समाप्त करके दोबारा सत्तारूढ़ हो जाएगी। 

रिहायशी इलाकों में मौत के कारखाने अधिकारियों को नजर नहीं आते

तेजस्वी की सभाओं में भारी भीड़ और एग्जिट पोल भी यही संकेत दे रहे थे जिसने भाजपा और जद (यू) (नीतीश कुमार) खेमे की ङ्क्षचता बढ़ा दी थी। हालांकि बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने तभी कह दिया था कि चुनाव सभाओं में भीड़ का होना किसी पार्टी को समर्थन की गारंटी नहीं होती। 10 नवम्बर को चुनाव परिणामों के रुझान आने शुरू होने पर (लालू यादव) ‘राजद’ को मिलती भारी बढ़त देखते हुए एग्जिट पोलों के अनुमान सच होते लगने लगे परन्तु कुछ ही समय बाद पांसा पलट गया और रुझान तेजी से भाजपा तथा जद (यू) के पक्ष में हो गए। देर रात तक पेंच फंसा रहने से स्थिति स्पष्ट नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि राजग सरकार बनाने जा रही है। 

यह लेख प्रैस में जाने तक भाजपा 54, राजद (लालू यादव) 62, जद (यू)(नीतीश)32, भाकपा (माले) 9, कांग्रेस 16, विकासशील इन्सान पार्टी 4, ए.आई.एम.आई.एम. 4, माकपा 2, ‘हम’ 3, बसपा, भाकपा, लोजपा तथा निर्दलीय 1-1 सीट जीत चुके थे। इन चुनावों में युवाओं पर अनुभव भारी रहा वहीं नीतीशकुमार द्वारा किए गए विकास कार्य, उनके द्वारा राज्य में लागू शराबबंदी तथा तीन तलाक पर कानून जैसे कदमों ने उन्हें लाभ पहुंचाया। इन चुनावों ने सिद्ध कर दिया है कि लुभावने वायदों के मुकाबले जनता को अभी भी परखे हुए नेता पर भरोसा है। 

‘देश में खुशहाली’ लाने के लिए ‘कुछ लाभदायक सुझाव’

जहां तक ‘महागठबंधन’ का सम्बन्ध है लालू राज के पंद्रह वर्षों के ‘जंगल राज’, लालू की चारा घोटाले में संलिप्तता तथा जेल यात्रा, तेजस्वी के बड़े भाई तेजप्रताप द्वारा अपनी पत्नी ऐश्वर्य राय को छोड़ देने के चलते तेज प्रताप के ससुर चंद्रिका प्रसाद का राजद के विरुद्ध चुनाव लडऩा, तेजस्वी का अधिक आत्मविश्वास इसके मुख्य कारण रहे। अपनी चुनाव सभाओं में लोगों की भारी भीड़ देखकर स्वयं को ओवर एस्टीमेट कर लेना भी उसे महंगा पड़ा। 

जहां तक चिराग की ‘लोजपा’ का सम्बन्ध है, प्रेक्षकों के अनुसार चिराग के पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान द्वारा अपनी पहली पत्नी राजकुमारी को त्यागने पर लोगों की नाराजगी का असर चिराग की संभावनाओं पर शायद उसी तरह पड़ा जिस तरह एन.डी. तिवारी तथा अन्य सांसदों आदि के अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ झगड़ों के कारण उन्हें त्याग रखा है। नीतीश की आलोचना में हद से आगे बढ़ जाना भी चिराग पासवान को महंगा पड़ा।

‘कट्टरपंथी सोच’ का हथियार बन रहा ‘लव जेहाद’

राजद की बढ़त को देखते हुए नीतीश कुमार ने तो 6 नवम्बर को पूर्णिया में भाषण देते हुए कह दिया था कि ‘‘यह मेरा अंतिम चुनाव है’’  जिससे लोगों के मन में उनके प्रति सहानुभूति बढ़ गई तथा नीतीश कुमार के 7वीं बार बिहार का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है और यह उपलब्धि प्राप्त करने वाले वह देश के पहले मुख्यमंत्री होंगे। हालांकि नीतीश कुमार के आलोचक उन पर राज्य के विकास की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं लेकिन राज्य में विकास तो जारी है। 

जहां रुझानों में भाजपा और जद (यू) (नीतीश) की सरकार बनती दिखाई दे रही है वहीं तेजस्वी यादव (लालू) ने अपने समर्थकों से कहा है कि सरकार हमारी ही बनेगी। वह काऊंटिंग पूरी होने तक मतगणना केंद्रों पर ही डटे रहें। इन चुनावों का परिणाम 2024 के लोकसभा चुनावों सहित देश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल यह देखना होगा कि जद (यू) (नीतीश) से अधिक सीटें जीत कर ‘छोटे भाई’ से बड़े भाई की भूमिका में आई भाजपा अब जद (यू) (नीतीश) के प्रति क्या रवैया अपनाती है।

—विजय कुमार

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